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वाराणसी। दिल्ली में चल रही हिंसा को लेकर बीएचयू के मधुबन पार्क में आइसा से जुड़े छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि लगभग तीन महीने से देशभर में सीएए, एनआरसी, एनपीआर के खिलाफ विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। इसी क्रम में दिल्ली के शाहीन बाग़ में महिलाओं का एक लंबा और बड़ा आंदोलन चल रहा, जिसके बाद से देश के तमाम शहरों में ऐसे आंदोलन शुरू हुए जो आज तक चल रहे हैं।

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शुरू से ही आंदोलन को लगातार बदनाम किया जा रहा और हिंसा,दंगा भड़काने व साम्प्रदायिक माहौल बनाने का काम खुद सरकार व आरएसएस के अपने अलग अलग संगठन व एजेंसियों द्वारा किया जा रहा है।

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आइसा से विवेक ने कहा कि दिल्ली में केंद्र सरकार पुलिस व गुंडों के बल पर दमन कर रही है। बीसीएम से नीतीश ने कहा कि हमारे देश में फासीवाद का चेहरा उग्र होता जा रहा है। एक तरफ जहां अर्थव्यवस्था चरमरा चुकी है। मज़दूर, किसान, छात्र-छात्राएँ, दलित, आदिवासी की जनता की व्यापक आबादी अपने मूलभूत मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। दूसरी तरफ इस चरमरा चुकी व्यवस्था से न उबर पाने के कारण व व्यवस्था को टिकाने के लिए दंगे व हिन्दू मुस्लिम की साम्प्रदायिक राजनीति की जा रही।

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इसके साथ ही एससी एसटी संघर्ष समिति से चंदन ने कहा कि इस हिंसा के लिए सरकार, दिल्ली पुलिस के ज़िम्मेदार लोगो पर कार्रवाई की जानी चाहिए। सभी ने सीएए, एनआरसी, एनपीआर को तत्काल वापस लेने की मांग की। प्रदर्शन में शशांक, आकांक्षा, राहुल, अभिषेक, महेश, चंदन सागर, शैली, प्रियांक, शशिकान्त, आदर्श, विवेक इत्यादि लोग शामिल हुए।

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