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वाराणसी। यदि आपके बच्चे के दूध के दांत टूटने एवं नये दांत निकलते समय मसूढ़े से लगातार खून बह रहा हो तो सावधान हो जाएं यह हीमोफीलिया के लक्षणों में से एक है। यह कहना है सीएमओ इंचार्ज ब्लड बैंक बीएचयू डॉ एसके सिंह का।

डॉ एसके सिंह ने बताया कि हीमोफीलिया रक्तस्राव संबंधी एक अनुवांशिक बीमारी है। इससे ग्रसित व्यक्ति में लम्बे समय तक रक्त स्राव होता रहता है। यह खून में थक्का जमाने वाले आवश्यक फैक्टर के न होने या कम होने के कारण होता है। रक्तस्राव चोट लगने या अपने आप भी हो सकता है।

मुख्यतः रक्तस्राव जोड़ो, मांसपेशियों और शरीर के अन्य आंतरिक अंगों में होता है और अपने आप बन्द नहीं होता है। यह एक असाध्य जीवन पर्यन्त चलने वाली बीमारी है लेकिन इसको कुछ खास सावधानियां बरतने से और हीमोफीलिया प्रतिरोधक फैक्टर के प्रयोग से नियंत्रित किया जा सकता है।भारत में लगभग 80,000 से 100,000 लोग हीमोफीलिया से ग्रसित हैं।

एक नज़र जिले के आंकड़ों पर :
डॉ एसके सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत बीएचयू सहित पूरे देश में फैक्टर मुफ्त में उपलब्ध कराएं जा रहे हैं। यह 24 घंटे सातों दिन मौजूद हैं। उन्होने बताया कि जनपद में फैक्टर8 के 380, फैक्टर 9 के 97 और फैक्टर 7 के 32 मरीज हैं। जब फैक्टर 8 और 9 के मरीजों की स्थिति गंभीर हो जाती है तो उन्हें फैक्टर 7 दिया जाता है।

पिछले साल जनपद में फैक्टर 8 के लगभग 4000 वाल्व, फैक्टर 9 के लगभग 800 वाल्व और फैक्टर 7 के लगभग 400 वाल्व लगाये गए। फैक्टर 7 सबसे महंगा फैक्टर है लेकिन एनएचएम के तहत सभी फैक्टर निःशुल्क दिये जा रहे हैं।

लक्षण
• यदि प्रसव के समय नाभि की नाल, माँस से अलग करने पर लम्बे समय तक लगातार रक्तस्राव होता है।
• यदि बच्चे के शरीर पर किसी भी जगह नीले या काले दाग पड़ जाते हैं और महीने या उससे अधिक समयतक रहते हैं।
• यदि बच्चे के दूध के दांत टूटने एवं नये दांत निकलने की प्रक्रिया में मसूड़े से लगातार रक्तस्राव होता है।
• यदि बच्चे के किसी भी जोड़ में सूजन आ जाती है और वह फ्रेश फ्रोज़न प्लाज्मा देने से ठीक हो जाती है, तो यह सभी लक्षण बच्चे के हीमोफीलिया से ग्रसित होने की प्रबल सम्भावना को दर्शाते हैं।

हीमोफीलिया के रोगी के जोड़ो में सूजन के साथ अक्सर दर्द का होना असल में उसके जोड़ में आन्तरिक रक्तस्राव होना है यदि यह सूजन या आन्तरिक रक्तस्राव जोड़ो में बार-बार होता है तो वह जोड़ों को विकृत बना देता है और उस जोड़ को बेकार कर देता है।

इस तरह रोगी में विकलांगता की शुरुआत हो जाती है। इसके अतिरिक्त यदि यह रक्तस्राव रोगी की आंतों में अथवा दिमाग के किसी हिस्से में शुरू हो जाये तो यह जान लेवा भी हो सकता है। इसका इलाज तुरन्त अथवा जल्द से जल्द होना अति आवश्यक है।

हीमोफीलिया के प्रकार
यदि हीमोफीलिया रोगी के रक्त में थक्का जमाने वाले फैक्टर VIII की कमी हो तो इसे हीमोफीलिया ए कहते है। यदि रक्त में थक्का जमाने वाले फैक्टर IX की कमी हो तो इसे हीमोफीलिया बी कहते है। इस प्रकार मरीज को जिस फैक्टर की कमी होती है वह इंजेक्शन के जरिये उसकी नस में दिया जाता है। इससे रक्तस्राव रूक सके यही हीमोफीलिया की एक मात्र औषधि है।

हीमोफीलिया से ग्रस्त व्यक्तियों को सही समय पर इंजेक्शन लेना, नित्य आवश्यक व्यायाम करना, रक्त संचारित रोग (एचआईवी, हीपाटाइटिस बी व सी आदि) से बचाव, दांतों की सुरक्षा के बारे में शिक्षित करना ही हीमोफीलिया से बचाव का उपाए है।

ध्यान देने की आवश्यकता है
प्रदेश स्तरीय हीमोफीलिया सोसाइटी के सचिव विनय मनचंदा ने कहा कि हीमोफीलिया के इलाज कि सुविधा प्रदेश के 26 स्वास्थ्य केन्द्रों पर उपलब्ध है। लेकिन धन अभाव में हीमोफीलिया प्रतिरोधक फैक्टर की सप्लाई नहीं हो पा रही है। यूपी के गत वर्ष 42.3 करोड़ दिये गए थे। इस वर्ष के लिए 50 करोड़ की मांग की गई है लेकिन आज बजट रिलीज नहीं हुआ है। उन्होने यूपी सरकार से हीमोफीलिया के मरीजों के लिए प्राथमिकता से कार्य करने की अपील की है।

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