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वाराणसी। आइडल स्‍वयंभू लॉर्ड वि‍श्‍वेश्‍वर बनाम अंजुमन इंतेजामि‍या बनारस और एक अन्‍य प्रति‍वादी यूपी सुन्‍नी सेंट्रल वक्‍फ बोर्ड के बीच चल रहे कानूनी मामले में बुधवार को वाराणसी की फास्‍ट ट्रैक कोर्ट ने प्रति‍वादीगण की याचि‍का को खारि‍ज कर दि‍या है। प्रति‍वादीगण की मांग थी कि‍ कोर्ट इस मामले में स्‍टे बरकरार रखे।

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कोर्ट ने ज्ञानवापी मस्‍जि‍द के पुरातत्‍वि‍क सर्वेक्षण की वादी पक्ष की मांग पर सुनावाई के लि‍ये अगली तारीख 17 फरवरी को मुकर्रर कर दी है।

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आइडल स्‍वयंभू लॉर्ड वि‍श्‍वेश्‍वर की ओर से वरि‍ष्‍ठ अधि‍वक्‍ता राजेन्‍द्र प्रताप पांडेय ने इस मामले में Live VNS से बातचीत की है।

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अधि‍वक्‍ता राजेन्‍द्र प्रताप पांडेय ने बताया कि‍ अंजुमन इंतेजामि‍या बनारस और यूपी सुन्‍नी सेंट्रल वक्‍फ बोर्ड (प्रति‍वादीगण) की दरख्‍वास्‍त थी कि‍ इस मुकदमे की कार्यवाही स्‍थगि‍त कर दी जाए और आगे कोई कार्यवाही न हो। इसे कोर्ट ने खारि‍ज कर दि‍या है। अब कोर्ट में इसपर कार्यवाही चलेगी। उन्‍होंने बताया कि‍ इस पूरे मामले पर एक वादबिंदु बना था। उस वादबिंदु में कहा गया था कि‍ प्‍लेस ऑफ वर्शिप स्‍पेशल प्रॉवि‍जन्‍स एक्‍ट 1991 के आधार पर इस मुकदमे को नि‍रस्‍त कर दि‍या जाए। इसपर ट्रायल कोर्ट के फैसले के बाद रि‍वीजन कोर्ट का फैसला 23 सि‍तम्‍बर 1998 को आइडल स्‍वयंभू लॉर्ड वि‍श्‍वेश्‍वर के पक्ष मे आया था।

अधि‍वक्‍ता राजेन्‍द्र प्रताप पांडेय के अनुसार इसके बाद प्रति‍वादीगण हाईकोर्ट गये और वहां आर्टि‍कि‍ल 226 में एक रि‍ट दाखि‍ल की। उस रि‍ट में 13 अक्‍टूबर 1998 को एक आदेश हुआ कि‍ 23 सि‍तम्‍बर 1998 के आदेश के परि‍प्रेक्ष्‍य में कोई आगे की कार्यवाही न की जाए। कोर्ट ने मुकदमे की कार्यवाही स्‍थागि‍त नहीं की थी। इसके बाद हाईकोर्ट का इसमें कोई स्‍पेसि‍फि‍क ऑर्डर नहीं हुआ।

अधि‍वक्‍ता राजेन्‍द्र प्रताप पांडेय ने बताया कि‍ इस बीच सर्वोच्‍च न्‍यायालय के तीन जजों की पीठ ने 2018 में एक आदेश पारि‍त कि‍या कि‍ बहुत पुराने पुराने जो मुकदमे हैं, जि‍समें स्‍टे ऑर्डर लंबे समय से पेंडिंग हैं और 6 महीने में उसमें कोई नया आदेश नहीं हुआ है, ऐसे स्‍टे समाप्‍त हो जाएंगे।

हालांकि‍ प्रति‍वादीगण का इसपर ये कहना था कि‍ उस आदेश के बाद 2019 में सुप्रीम कोर्ट के दो जजों की पीठ ने एक आदेश दूसरे मुकदमे में स्‍टे को लेकर नया आदेश दि‍या था। मगर 2019 का आदेश जहां कि‍रायेदारी के वि‍वाद में दि‍या गया था वहीं 2018 का अदेश सभी लंबे समय से पेंडिंग मामलों को लेकर था। दोनों मुकदमे के तथ्‍य भि‍न्‍न हैं। पहला फैसला 3 जजों का था, जबकि‍ दूसरे वाले में दो जजों ने फैसला दि‍या था।

अधि‍वक्‍ता राजेन्‍द्र प्रसाद पांडेय के अनुसार सभी तथ्‍यों की वि‍धि‍वत वि‍वेचना करने के बाद वाराणसी की फास्‍टट्रैक कोर्ट ने प्रति‍वादीगण की याचि‍का को खारि‍ज कर दि‍या है। कोर्ट ने कहा कि‍ वि‍धि‍ की मंशा यही है कि‍ इस मुकदमे की कार्यवाही आगे चले। अब 17 फरवरी 2020 को इस मामले में अगली ति‍थि‍ मुकर्रर की गयी है।

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