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वाराणसी। देश के प्रधानमंत्री और वाराणसी के सांसद नरेन्‍द्र मोदी वीडि‍यो कांन्‍फ्रेंसिंग के जरि‍ये नई दि‍ल्‍ली से वाराणसी की जनता के साथ रूबरू हुए। इस दौरान उन्‍होंने सबको नवरात्रि‍ की शुभकामनाएं देते हुए काशीवासि‍यों से कोरोना के खि‍लाफ छि‍ड़े इस महायुद्ध में सहयोग का आह्वान कि‍या। प्रधानमंत्री ने नवरात्रि‍ की प्रथम देवी मां शैलपुत्रि‍ को करुणा, ममता और प्रकृति‍ की देवी बताते हुए कोरोना के खि‍लाफ छेड़े गये अभि‍यान में वि‍जय के लि‍ये आशीर्वाद भी मांगा।

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प्रधानमंत्री ने श्रीरामचरि‍त मानस के सोरठा के जरि‍ये काशी की महि‍मा का भी बखान कि‍या।

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मुक्ति जन्म महि जानि ग्यान खान अघ हानि कर।
जहँ बस संभु भवानि सो कासी सेइअ कस न॥
जहाँ श्री शिव-पार्वती बसते हैं, उस काशी को मुक्ति की जन्मभूमि, ज्ञान की खान और पापों का नाश करने वाली जानकर उसका सेवन क्यों न किया जाए?

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प्रधानमंत्री के वाराणसी की जनता से संबोधन के मुख्‍य अंश

मां शैलपुत्री करुणा और ममता की देवी हैं, प्रकृति‍ की देवी हैं।
देश जि‍स संकट से गुजर रहा है, हम सबको मां शैलसुते के आशीर्वाद की बहुत आवश्‍यक्‍ता है।
मां से कामना है कोरोना महामारी के वि‍रुद्ध देश ने जो युद्ध छेड़ा है उसपर वि‍जय प्राप्‍त हो।
काशी का सांसद होने के नाते मुझे ऐसे समय आपके बीच होना चाहि‍ए, लेकि‍न दि‍ल्‍ली में चल रही गति‍वि‍धि‍यों से आप परि‍चि‍त हैं।

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यहां की व्‍यस्‍तताओं के बावजूद मैं वाराणसी की गति‍वि‍धि‍यों के बारे में अपडेट ले रहा हूं।
साथि‍यों याद कीजि‍ए महाभारत का युद्ध 18 दि‍न में जीता गया था। आज कोरोना के खि‍लाफ युद्ध पूरा देश लड़ रहा है। इस युद्ध में 21 दि‍न लगने वाले हैं। हमारा प्रयास है कि‍ इसे 21 दि‍न में जीत लि‍या जाए।

महाभारत युद्ध के समय कृष्‍ण सारथी थे। आज 130 महारथि‍यों के बलबूते कोरोना के खि‍लाफ इस लड़ाई को जीतना है। इसमें काशीवासि‍यों की बड़ी भूमि‍का है।

संकट की घड़ी में काशी संबका मार्गदर्शन करके उदाहरण पेश कर सकती है।
काशी शास्‍वत समयातीत है।

आज लॉकडाउन की परि‍स्‍थि‍ति‍ में देश को संयम, समन्‍वय और संवेदनशीलता सि‍खाती है। सहयोग शांति‍ सहनशीलता, साधना सेवा और समाधान सि‍खाती है।

साथि‍यों काशी का अर्थ ही है शि‍व यानी कल्‍याण, महाकाल महादेव की नगरी में संकट से जूझने का सामर्थ नहीं होगा तो कि‍समें होगा।
कोरोना वैश्‍वि‍क महामारी को देखते हुए देश भर में व्‍यापक तैयारी की जा रही है।
हम सबके लि‍ये मेरे लि‍ये भी आपके लि‍ये भी सोशल डि‍स्‍टेंसिंग इस समय एक मात्र उपाय है।

वाराणसी के वि‍भि‍न्‍न प्रति‍ष्‍ठि‍त लोगों ने प्रधानमंत्री से प्रश्‍न पूछे
पहला सवाल प्रो कृष्‍ण कांत बाजपेयी ने कि‍या। उन्‍होंने पूछा कि‍ आपने जो युद्ध छेड़ा है उसमें एक सैनि‍क हूं। पता चलता है कि‍ ये बीमारी हमें नहीं हो सकती है। वातावरण है गर्मी आ जाएगी उसमें मार्गदर्शन करें।

कृष्‍णकांत जी मुझे गर्व होता है जब आप जैसे प्रबुद्ध नागरि‍कों को लोगों को जागरूक करते हुए देखता हूं। समाज के प्रति‍ ये संवेदना जरूर परि‍णाम लाएगी, हमें वि‍जय दि‍लाएगी। आपने जो बात कही वो सही है। कई लोगों को कुछ गलत फहमी है। मनुष्‍य का स्‍वभाव है सरल और अनुकूल को स्‍वीकार कर लो। कोई बात अपनी पसंद की लगती है सूट करती है तो उसे तुरंत सच मान लेते हैं। कई बार अहम बातें प्रमाणि‍क और अधि‍कृत होती है उसपर लोगों का ध्‍यान नहहीं जाता।

मेरा आग्रह है कि‍ जि‍तनी जल्दी  हो सकके अपनी गलत फहमी से बाहर नि‍कलें। इस बीमारी में जो बातें सामने आयी हैं उसमें सबसे बड़ी सच्‍चाई ये है कि‍ कि‍सीसे भेद भाव नहीं करती। ये अमीर गरीब से भी भेदभाव करती है। ये वायरस सेहतमंद को भी अपनी चपेट में ले सकता है। कौन क्‍या है कहांं है क्‍या करता है इसका कोई महत्‍व नहीं है।

इसमें दि‍माग लगाने के बजाए बीमारी की भयानकता पर दीमाग लगाना चाहि‍ए। कुछ लोग ऐसे हैं अपने कानों से सुनते हैं और ओंखों से देखते हैं बुद्धी से समझते हैं मगर अमल नहीं करते । उनको बेफि‍क्री होती है। वो अमल में लेना ही नहीं चाहते। सि‍गरेट पीने से कैंसर होता है। गुटका खाने से कैंसर होता है लेकि‍न उनके मन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

लोग कई बार जानते बूझते भी सावधानी नहीं बरतते। लेकि‍न हमें नागरि‍क के रूप में अपने कर्तव्‍य करना चाहि‍ए। घर में रहना चाहि‍ए आपस में दूरी बनाये रहना चाि‍ए। अभी यही एक मात्र उपाय है। व्‍यक्‍ति‍ संयम से रहे और नि‍र्देशों का पालन करे तो संभावना कम हो जाती है चपेट में आने से। कोरोना से संक्रमि‍त दुनि‍या में एक लाख से अधि‍क लोग ठीक भी हो चुके हैं। भारत में भी दर्जनों लोग कोरोना के शि‍केंजे से नि‍कले हैं।

इटली में 90 वर्ष की ज्‍यादा आयु की माता जी भी स्वस्थ हुई हैं।  कोरानेो से जुड़ी सही सटीक जानकारी के लि‍ये वाट्सअप  के जरि‍ये एक हेल्‍पडेस्‍क की शुरुआत की है। 9013151515 वाट्सएप नंबर पर करके इस सेवा से जुड सकते हैं। नमस्‍ते लि‍खि‍ये आपको अपडेट आना शुरू हो जाएगा।

मोहि‍नी झंवर सामाजि‍क कार्यकर्ता। सोशल डि‍स्‍टेंसिंग का अमल कर रहे हैं। डॉक्‍टर और एयरलाइन के कर्मचारि‍यों के साथ भेदभाव बरता जा रहा है। सरकार क्‍या कदम उठा रही है।

मोहि‍नी जी आपकी पीड़ा सही है। कल मैंने नर्सेस डॉक्टर लैब टेक्‍नि‍शि‍यन के साथ बात की है। इस देश के सामान्‍य मानवीय का मन समय पर सही कदम उठाने में बहुत वि‍श्‍वास रखते हैं। 22 मार्च के दि‍न पूरे देश ने जनता कफ्यू में बढ़ चढ़कर अपनी भागीदारी दि‍खाई है।
शाम को 5 बजे लोग अभि‍वादन के लि‍ये सामने आये। कोरोना के खि‍लाफ नर्सेज डॉक्‍टर, लैब टेक्‍नीशि‍यन पैरा मेडि‍कल के प्रति‍ धन्‍यवाद का दृश्‍य प्रस्‍तुत कि‍या। बहुत कम लोग ये समझ पाते हैं।

इसके अंतनिहि‍त एक और बात थी। समाज के मन में इन सबके प्रति‍ आदर होता है। हम उनका रि‍ण कभी नहीं उतार सकते हैं। जि‍न लोगों ने वुहान में रेस्‍क्‍यू आपरेशन कि‍या उनके लि‍ये पत्र लि‍खा। इटली से आने वाले लोगों को लाने वाली महि‍लाओं को।

मेरी सभी नागरि‍कों से अपील है कि‍ अगर ऐसी कोई गति‍वि‍धि‍ दि‍खाई दे रही है। इस सेवा में लगे लोगों के प्रति‍ बुरा बर्ताव होता है तो आप भी उन लोगों को चेतावनी दीजि‍ए कि‍ ये गलत हो रहा है ऐसा नहीं कर सकते।

जो भी सेवा कर रहे हैं उनकी मदद करनी चाहि‍ए। मैं आपको बता दूं तो मुझे पता लगा तो मेरे लि‍ये गंभीर है। मैंने गृह वि‍भाग को सख्‍ती से काम लेने के लि‍ये कहा है। संकट की इस घड़ी में अस्‍पतालों में इस समय सफेद कपड़ों में दि‍ख रहे डॉक्‍टर नर्स ईश्‍वर का रूप हैं। आज यही हमें बचा रहे हैं अपने जीवन को खतरे में डालकर हमारा जीवन बचा रहे हैं। ये हम सबका दायि‍त्‍व है जो देश के लि‍ये खुद को खपा रहे हैं उनका सार्वजनि‍क सम्‍मन हर पल होना चाहि‍ए। एयरपोर्ट पर जब फौज के जवान जाते हैं तो उनके सम्‍मान में लोग खड़े हो जाते हैं। ये आभार का तरीका बढ़ना चाहि‍ए।

अखि‍लेश खेमका, कपडे का कारोबारी हूं। आज के दि‍न लॉक डाउन हो गया है। बहुत से साथ अपनी जगह पर अटक गये हैं, मजदूर वर्ग के सामने मुश्‍कि‍ल है। पूरे देश के गरीबों पर वि‍शेष ध्‍यान देने की जरूरत हैं। हमलोगों को मार्गदर्शन करें।

काशी में बात होती हो और कपड़े वाले से बात न हो तो बात अधूरी हो रह जाती है। आप व्‍यापारी हैं और गरीबों की बात की बहुत अच्‍छा है। एक्‍सपर्ट से मि‍ले दि‍शा निर्देश  के अनुसार ये कहा जा रहा है कि‍ हर व्‍यक्‍ति‍ एक दूसरे से एक डेढ मीटर दूर रहे। ये सैन्‍य नीति‍ है इस लड़ाई की।

हम ये मानते हैं कि‍ मनुष्‍य ईश्‍वर का ही अंश है। व्‍यक्‍ति‍ में ईश्‍वर का वास है। यही हमारी संस्‍कृति‍ है। कारोन हमारी संस्‍कृति‍ और संस्‍कार को नहीं मि‍टा सकता। संकट के समय हमारी संवेदनाएं और जागरूक हो जाती हैं। कोरोना को जवाब देने का दूसरा तरीका है करुणा। हम गरीबों और जरूरतमंदों के प्रति‍ करुणा दि‍खा कर कोरोनों को पराजि‍त करने की ओर कदम बढ़ा सकते हैं।

हमारे यहां कहा जाता है कि‍ साईं इतना दीजि‍ए जा में कुटंब समाये मैं भी… अभी नवरात्रऋि‍ शुरू हुआ है। अगले 21 दि‍न तक जि‍नके पास ये करने की शक्‍ति‍ है। देश में भी जि‍सके पास है ये शक्‍ति‍ है।

अगले 21 दि‍न तक प्रति‍दि‍न नौ गरीब परि‍वारों का मदद करें। मैं मानता हूं अगर इतना भी हम कर लें तो। अपने आस पास जो पशु हैं उनकी भी चि‍ंता करनी है। अनेक जानवरों के सामने भोजन का संकट आ गया है। अखि‍लेश जी अगर मे कहूं कि‍ सबकुछ ठीक है सबकुछ सही है तो मैं खुद को धोखा दे रहा हूं। इस समय केंद्र हो या राज्‍य सरकार हो जि‍तना ज्‍यादा हो उतना भरसक प्रयास कर रही है। राज्‍य सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ अपने प्रदेशवासि‍यों की देखभाल कर रही है।

हम ये भी जानते हैं कि‍ सामान्‍य परि‍स्‍थि‍ति‍ में कभी बि‍जली चली जाती है, पानी बंद हो जाता है, कर्मचारी छुट्टी पर चले जाते हैं। कठि‍नाइयां हमारे जीवन में आती रहती हैं। ऐसे में जब देश के सामने इतना बड़ा संकट हो पूरे वि‍श्‍व के सामने इतनी बड़ी चुनौती हो तब मुश्‍कि‍लें नहीं आएंगी सबकुछ अच्‍छे से होगा ये धोखा होगा।

ये सवाल बहुत महत्‍वपूण है। सबकुछ सही हो रहा है या नहीं। जरा पलभर सोचि‍ए इससे भी ज्‍यादा महत्‍वपूर्ण सवाल ये है कि‍ हमें वि‍जयी होना है या नहीं। जो मुश्किल आज हो रही है उसकी उम्र फि‍लहाल 21 दि‍न ही है। इसका फैलना नहीं रुका तो ये संकट और तकलीफें कि‍तना ज्‍यादा हो सकता है इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। प्रशासन नागरि‍क संगठन, सि‍वि‍ल संगठन, धामि‍रक संगठन को प्रोत्‍साहि‍त करने की आवश्‍यक्‍ता है।

अस्‍पतालों में लोग 18 घंटे काम कर रहे हैं। कई जगह दो तीन घंटे से ज्‍यादा सोने को नहीं मि‍ल रहा। कई लोग गरीबों के लि‍ये दि‍न रात एक कि‍ये हुए हैं। हां हो सकता है कुछ जगहों पर कमि‍यां हों। कि‍सी ने लापरवाही की हो। ऐसी घटना को खोज खोज के उन्‍हीं को आधार बना के उनको बदनाम करना लाभदायक नहीं है।

मैं तो आग्रह करूंगा नि‍शारा फैलाने के लि‍ये हजारों कारण हो सकते हैं। जीवन आशा और वि‍श्‍वास के साथ ही चलता है। नागरि‍क होने के नाते कानून का जि‍तना ज्‍याददा सहयोग करेंगे उतने बेहतर नतीजे मि‍लेंगे। प्रशासन पर कम से कम दबाव डालें।

अस्‍पताल में काम करने वाले, पुलि‍स कर्मी, सरकारी दफ्तरों में काम करने वाले। ये हमारे ही लोग हैं। इतना बड़ा बोझ आया है तो कुछ बोझ हम भी उठायें।

अखि‍लेश जी व्‍यापार जगत में रहते हुए गरीबों की चिंता करने वाले देश ऐसे अखि‍लेशों से भरा हुआ है।

डॉ गोपाल नाथ। प्रो डि‍पार्टमेंट माइक्रोलॉजी, कोराना लैब का इंचार्ज हूं। हमारे यहां आम तौर पर लोगों की आदत है कि‍ खुद से डॉक्‍टर बन जाते हैं। कोरानो की इस बीमारी में ये स्‍थि‍ति‍ भयावह हो जाती है। तरह तरह की भ्रांति‍यां समाज मे फैली हैं।

आप तो स्‍वयं इस क्षेत्र के वि‍शेषज्ञ हैं1 आप सच क्‍या है झूठ क्‍या है भली भांति‍ परख सकते हैं। उसके बाद भी आपकी चि‍ंता जायज है। हमारे यहां डॉक्‍टरों को पूछे बि‍ना भी सर्दी जुकाम की दवा लेने की आदत है। रेल गाड़ी के डि‍ब्‍बे में बच्‍चा रोता है….

कोरोनो के संक्रमणों का इलाज अपने स्‍तर पर नहीं करना है। घर में रहना है। टेलीफोन पर अपने डॉक्‍टर से बात कीजि‍ए। अभी तक कोरोना के खि‍लाफ कोई भी दवाई कोई भी वैक्‍सि‍न पूरी दुनि‍या में नहीं बनी है। हमारे देश में भी और दूसरे देशों में भी तेजी से काम हो रहा है। वैज्ञानि‍क जुटे हैं। देशवासि‍यों आपको कोई भी कि‍सी भी दवाई का सुझाव डॉक्‍टरों से सलाह लीजि‍ए।

आपने खबरों में भी देखा होगा। दुनि‍या के कुछ देखा होगा। अपनी मर्जी से दवाएं लेने से कैसे संकट में पड़ गये हैं। डॉ गोपाल जी आपका आभारी हूं।

अंकि‍ता खत्री गृहणी हूं। जो रचता है वहीं बचता है। आपकी प्रेरणा से रचनाकारों को आमंत्रि‍त कर रही हूं। 21 दि‍न का जो रचना हो उसका प्रकाशन हो और आप को समर्पि‍त हूं। मेरा बेटा 12वीं का बोर्ड दे रहा था। प्रधानमंत्री जी ऐसे में क्‍या करें।

आप रचनाकरों को इकट्ठा न करें। आप ऑनलाइन सबसे मांगि‍ये। उनकी रचनाएं देश के काम आएंगी। आपदा को अवसर में बदलना ही मानव जीवन की उपलब्‍धि‍ है। बहुत से लोग सोशल मीडि‍या पर वि‍स्‍तार से बता रहे हैं। पहले संयुक्‍त परि‍वार होता था। बच्‍चों को दादा दादी संभाल लेते थे। इसे लेकर कई नये नये शो बन रहे हैं। उन्‍होंने घरों में लोगों को इंगेज करने के लि‍ये लोगों को बता रहे हैं।

मेरे मन को कुछ और बातेें भी प्रभावि‍त कर रही हैं। मानव जाति‍ कैसे इस वैष्‍वि‍क संकट से जीतने के लि‍ये एक साथ आ गयी। हमारी बाल सेना सबसे बड़ी भूमि‍का नि‍भा रही है। मैंने ऐसे वीडि‍यो देखें जि‍समें बच्‍चे माता पि‍ता को समझा रहे हैं। छोटे छोटे बच्‍चे इस संकट पर अपनी प्रति‍क्रि‍या दे रहे हैं।

आपको याद होगा बचचों ने इस अभि‍यान की कमान संभाल ली थी। आज के बच्‍चों का टैलेंट और सोचने का तरीका मुझे आनंद होता है। इतने लंबे समय तक बच्‍चे उन्‍हें घर में बि‍ठाकर पढ़ाने न लगें। बच्‍चे अपने मां बाप को 21 दि‍न में बहुत कुछ सि‍खा देंगे।

पूरे देश से हजारों प्रबुद्ध नागरिकों ने सोशल मीडि‍या पर यही सलाह दी है कि‍ लॉक डाउन को कड़ाई से पालन हो, मुझे पूरा भरोसा है कि‍ देश इस महामारी को जरूर हराएगा।

अंत में फि‍र आपसे कहूंगा कि‍ आप सब, मैं आपके बीच नहीं आ पाया मुझे छमा करें। खुद को भी सुरक्षि‍त रखें, देश को भी सुरक्षि‍त रखें।

सभी काशी वासि‍यों को प्रणाम करता हूं। आप ने काशी को संभाला है।

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