मां जाह्नवी के तट पर 25वें काशी गंगा महोत्सव का हुआ आगाज़

8 से 12 नवम्बर तक राजघाट के मुक्ता काशी मंच पर होंगे सांस्कृतिक कार्यक्रम
संस्कृति की आत्मा संगीत में बसती है- डॉ नीलकंठ तिवारी
काशी विश्व की प्राचीनतम नगरी के साथ-साथ सांस्कृतिक राजधानी भी है- पर्यटन एवं संस्कृति राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)
काशी गंगा महोत्सव उभरते एवं प्रतिष्ठित कलाकारों को मंच प्रदान करता है

वाराणसी। उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ नीलकंठ तिवारी ने 25वें काशी गंगा महोत्सव का विधिवत उद्घाटन कि‍या। 8 से 12 नवम्बर तक राजघाट के मुक्ता काशी मंच पर चलने वाले इस महोत्‍सव के उद्धाटन के पश्चात उन्‍होंने कहा कि‍ काशी के कण-कण में संगीत बसा है। यहां के गली एवं मोहल्लों से गुजरते हुए संगीत के धुन यूं ही कानो में गूँजते हैं। काशी विश्व की प्राचीनतम नगरी के साथ-साथ सांस्कृतिक राजधानी भी हैं।

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उन्होंने कहा कि काशी गंगा महोत्सव विश्व में अपनी पहचान बना चुका है। स्थानीय उभरते एवं प्रतिष्ठित कलाकारों के साथ-साथ के कोने-कोने से कलाकार अपने कला का प्रदर्शन करने आते हैं।

काशी गंगा महोत्सव के दौरान गंगा की गोद में बनने वाले मंच के महत्व पर प्रकाश डालते हुए पर्यटन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ नीलकंठ तिवारी ने विशेष रूप से जोर देते हुए कहा कि गंगा गोद में बनने वाला ऐसा मंच विश्व में कहीं भी नहीं बनाया जाता। उन्होंने बताया कि काशी के लोगों को अपने पर्वों को कैसे मनाते हैं, इसे देखने और महसूस करने के लिए देश-विदेश से लोग यहां आते हैं। उन्होंने बताया कि काशी गंगा महोत्सव हर वर्ष अपने सफलता के सर्वोच्च शिखर को प्राप्त कर रही है।

काशी गंगा महोत्सव के पहले दिवस शुक्रवार को संगीत के पहले निशा में अंशुमान महाराज एवं समूह द्वारा थीम सॉन्ग, शुभम केसरी द्वारा कत्थक नृत्य, सुश्री गीता महालिक द्वारा ओडिसी समूह नृत्य, पंडित विकास महाराज द्वारा सरोद वादन एवं निर्गुण भजन सम्राट भरत शर्मा व्यास द्वारा आकर्षक प्रस्तुति प्रस्तुत की गई।

इससे पूर्व उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉक्टर नीलकंठ तिवारी ने दीप प्रज्वलित कर 25वे काशी गंगा महोत्सव का विधिवत शुभारंभ किया।

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