बाहुबली मूवी के एक सीन ने बदल दी बनारस के इस बच्चे की ज़िन्दगी, जीत रहा मेडल पर मेडल

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वाराणसी। बाहुबली फिल्म के हीरो प्रभास ने एक बार में तीन तीर चलाकर मूवी इफेक्ट दिया था। इस इफेक्ट को हम और आप कम्‍प्‍यूटर से बना जानते हैं, पर एक बच्चे पर इस सीन का असर ऐसा पड़ा कि वह आज देश और प्रदेश में बनारस का नाम रौशन कर रहा है।

वाराणसी का रहने वाले आदित्य सिंह राठौर (अर्जुन) बाहुबली के एक सीन को देखने के बाद तीर धनुष का इतना दीवाना हुआ कि आज देश के लिए पदक जीत लाया। इस बच्चे की उम्र जानकार भी हर कोई हैरान है, महज़ 6 साल का अर्जुन हाल ही में चीन से वर्ल्ड चैम्पियनशिप में सिल्‍वर मेडल जीतकर लौटा है।

कहतें हैं सफलता में आप की उम्र बाधा नहीं बनती और इस बात को सच साबित किया है वाराणसी के कक्षा एक में पढ़ने वाले ‘अर्जुन’ ने, शहर के ‘मास्टर आर्चर’ आदित्य सिंह राठौर चीन के मकाऊ शहर में आयोजित इंटरनेशनल इनडोर तीरंदाज़ी, ग्लोबल आरचरी एलियांस यूथ इनडोर आर्चरी वर्ल्डकप में रजत पदक जीत बनारस का सर गर्व से ऊंचा कर दिया। अर्जुन इस समय फरवरी 2020 में होने वाली प्रतियोगिता की तैयारी अपने घर की छत पर करने में जुटा हुआ है। यह प्रतियोगिता लास वेगास में होगी।

माता-पिता तैयार कर रहें सफल आर्चर
काशी के इस अर्जुन की सफलता की कहानी जानने के लिए हम डॉ अजय सिंह के घर पहुंचे। घर पर डॉ अजय अपने बेटे अर्जुन को छत पर प्रैक्टिस करवा रहे थे। हमें देख खुश हुए पर बेटे की प्रैक्टिस जारी रही। थोड़ी देर बाद जब प्यास से आदित्य व्याकुल हुआ तो मां ने पानी पिलाया। आधे घंटे चली प्रैक्टिस के बाद हम सभी अर्जुन के रूम में थे। यहां अर्जुन के पिता, अर्जुन मां ने हमसे विस्तार से बात की, जिसमे बेटे के पदक का गर्व साफ़ झलका।

बाहुबली मूवी देखकर मंगवाया था तीर-धनुष
आदित्य (अर्जुन) की मां गृहणी शशिकला सिंह ने बताया कि अर्जुन अभी 6 साल का है। शशिकला ने बॉलीवुड की रिकार्डतोड़ फिल्म बाहुबली देखने के बाद अपने पिता के पीछे लग लगाया था कि मुझे तीर-धनुष चाहिए। तीर धनुष कब उसका पैशन बन गया ये हमें पता ही नहीं चला। इसके बाद हमने उसे ट्रेनिंग दिलवानी शुरू की और हाल ही में उसने चीन के मकाऊ शहर में रजत पदक जीता है।

सुबह तीन बजे उठ जाता है अर्जुन
अर्जुन की मां शशिकला ने बताया कि अर्जुन बहुत ही हार्ड वर्किंग है और सुबह तीन बजे ही उठ जाता है। सुबह उठ के रनिंग करता है। उसके साथ उसके पिता काफी मेहनत करते हैं। सुबह रनिंग के बाद अर्जुन छत से नीचे आता है तो दूध पीने के बाद फिर आर्चरी की प्रैक्टिस के लिए ऊपर जाता है और स्कूल जाने के पहले नीचे आता है। अर्जुन बाबतपुर स्थित सेठ एम आर जयपुरिया स्कूल की बाबतपुर शाखा में कक्षा एक का छात्र है।

निराश थे पिता
अर्जुन के पिता डॉ अजय सिंह ने बताया कि जब ये तीन साल का तभी से तीर धनुष से खेलना शुरू कर दिया था। उसके बाद बार बार तीरंदाज़ी सिखने की ज़िद करने लगा। हमने आस पास पता किया एक एकेडमी में तो वहां ट्रेनर ने मन कर दिया कि जब तक ये 8 साल का नहीं होगा हम नहीं सीखा सकते इसे आर्चरी। इससे हमें निराशा हाथ लगी थी।

मणिपुर से मंगवाया लकड़ी का धनुष
डॉ अजय ने बताया कि लड़के की ख़ुशी के लिए हमने मणिपुर से लकड़ी का धनुष मंगाया और अर्जुन ने उससे आर्चरी शुरू की पर जब ये प्रतियोगिताओं में जाने की बात करते तो यह तय हुआ रिकर्व धनुष ( Recurve bows) जो की इंटरनेशनल स्पर्धाओं में मान्य है वो लायी जाए।

ढाई लाख धनुष से भेदा स्टेट लेवल का लक्ष्य
अर्जुन के पिता ने बताया कि उसके बाद कोरिया से ढाई लाख में रिकर्व बो मंगवाया गया और इनकी प्रैक्टिस शुरू हुई। इस बो के आने के बाद अर्जुन ने मेरठ में स्टेट लेवल प्रतियोगिता जो की अंडर 9 और 14 की हुई थी उसमे सबसे छोटे आर्चर के रूप में शिरकत की और पहली बार में ही मैडल जीतकर नेशनल के लिए क्वालीफाई कर लिया। उसके बाद से अर्जुन ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

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