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वाराणसी। चांद दिखने पर भले ही ईद आ जाये, लेकिन घर में जब घर में खाने का सामान ही न हो तो ईद मनायी कैसे जायेॽ यह प्रश्न कोरोना लॉकडाउन के दौरान उन मुस्लिम महिलाओं का है जिसमें शौहर ने तीन तलाक देकर उनको घर से बेदखल कर दिया। पहले ही उनकी माली हालत खराब थी, लॉकडाउन के दौरान तो दाने-दाने को मोहताज हैं, तो ईद की खुशी कैसे मनायें। ऐसी ही एक तलाकशुदा मां है सबीना, अपने तीन बच्चों को लेकर संघर्ष कर रही हैं।

तीन तलाक पीड़ित महिलाओं के लिये बड़ी उम्मीद हैं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेता इन्द्रेश कुमार, इसलिये सबीना ने इन्द्रेश कुमार को फोन किया और तलाक पीड़ित महिलाओं की स्थिति बतायी और निवेदन किया कि ईद की खुशियों में हमारे बच्चों को भी शामिल होने का मौका मिले, न कुछ हो तो पेट भर भोजन नसीब हो जाये। इन्द्रेश कुमार ने विशाल भारत संस्थान द्वारा संचालित अनाज बैंक के चेयरमैन डॉ राजीव श्रीवास्तव को फोन कर निर्देशित किया कि तलाकशुदा महिलाओं को सूचीबद्ध कर तत्काल ईद की खुशी मनाने के लिये सारी सामग्री दी जाये।

अनाज बैंक कोरोना लॉकडाउन के दौरान भूख पीड़ितों की मदद के लिये 24 घंटे की रसोई 57 दिन से लगातार चला रहा है। ईद को देखते हुये अनाज बैंक ने खुशियों की सौगात वाली ‘इन्द्रेश ईद पोटली’ तैयार की, जिसमें खाद्य सामग्री के साथ सेंवई भी रखी गयी है। इन्द्रेश नगर, लमही के सुभाष भवन में खुशियों की सौगात वाली इन्द्रेश ईद पोटली का ऑनलाईन उद्घाटन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य इन्द्रेश कुमार ने किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उद्योग उपायुक्त वीरेन्द्र कुमार ने सुभाष मंदिर में दीपोज्वलन एवं 5 तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं को ईद की पोटली देकर सेवा के अभियान की शुरूआत की। शहनाज, सबीना, मदीना ने कभी यह सोचा भी नहीं था कि ईद की खुशियां कोई यूं ही दे जायेगा। जब वीरेन्द्र कुमार ने उनको पोटली पकड़ाई तो उनकी आंखे भर आयी।

इस अवसर पर उद्योग उपायुक्त वीरेन्द्र कुमार ने कहा कि अनाज बैंक द्वारा तलाक पीड़ितों और उनके बच्चों के लिये खुशियों की सौगात देना मर्मस्पर्शी है। यह जानकर खुशी हो रही है कि तलाकशुदा महिलायें और उनके बच्चे ईद की खुशी मना पायेंगे। अनाज बैंक ने ऐतिहासिक काम किया है, आस्था के अनुरूप ईद के त्यौहार में तलाक पीड़ितों के साथ शामिल होना अनाज बैंक की सेवा में चार चांद लगा देता है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य इन्द्रेश कुमार ने कहा कि तीन तलाक जैसी कुप्रथा ने मुस्लिम महिलाओं की जिन्दगी बदतर बना दी थी, लेकिन कानून बन जाने से स्थिति में सुधार आयेगा। तलाक पीड़िताओं और उनके बच्चों को भी ईद की खुशी पर वही हक हासिल है जो सबको है। अनाज बैंक सिर्फ ईद तक ही नहीं उसके बाद भी इनका ख्याल रखेगा। तलाकशुदा महिलाओं को समर्थ और सशक्त बनाने के लिये समाज को भी बड़ी भूमिका निभाना चाहिए खासकर उनके बच्चों की शिक्षा और बेटियों की शादी में।

अनाज बैंक के संस्थापक चेयरमैन डॉ राजीव श्रीवास्तव ने कहा कि तीन तलाक की पीड़ा का दंश मुस्लिम महिलाओं को हमेशा से व्यथित करता रहा है। हम उनके गम को कम तो नहीं कर सकते लेकिन उनकी खुशियों में शामिल हो सकते हैं। विशाल भारत संस्थान ने अपने स्तर पर तलाक पीड़ित महिलाओं के लिये गैर सरकारी पेंशन योजना भी शुरू किया था। भले ही ईद के लिये लोगों को चांद का इंतजार हो लेकिन तलाक पीड़ितों को तो उन सामानों का इंतजार था जिससे उनके बच्चे पेट भर भोजन पा सके। अनाज बैंक अनवरत् इनकी मदद करता रहेगा।

तीन तलाक की लड़ाई लड़ने वाली मुस्लिम महिला फाउण्डेशन की नेशनल सदर नाजनीन अंसारी ने कहा कि हम तलाक पीड़ितों की हर सम्भव मदद करेंगे। कानूनी अधिकार दिलवाया है, अब सामाजिक अधिकार एवं जीने का सम्मान भी दिलायेंगे।

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