Baba Vishwanath plays Holi wearing Akbari Turban this special turban makes Muslim family
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वाराणसी। रंगभरी एकादशी का उल्लास काशीवासियों के सर चढ़कर बोल रहा है। गुरुवार दोपहर बाद जब बाबा का डोला पूर्व महंत आवास से गर्भगृह के लिए उठेगा तो भक्त बाबा संग गुलाल से होली खेलेंगे। इस दौरान बाबा के मस्तक पर अकबरी पगड़ी सजेगी जो बनकर तैयार हैं। गंगा जमुनी तहज़ीब की मिसाल रंगभरी एकादशी की ये अकबरी पगड़ी हर वर्ष की भाँति‍ इस वर्ष भी लल्लापुरा के ग्यासुद्दीन ने तैयार की है।

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काशी का कोई पर्व हो और उसमे गंगा जमुनी तहज़ीब का मिलन न हो यह संभव नहीं। यहाँ के हर त्यौहार में गंगा जमुनी तहज़ीब की बयार दिखाई देती है। चाहे कांवर यात्रा में आये कावड़ियों के लिए मुस्लिमो बंधुओं का मेडिकल कैम्प या भंडारा हो या मोहर्रम के जुलूस में मठों, मंदिरों पर पानी की सबील। इसी में से एक है रंगभरी एकदशी पर बाबा के मस्तक पर सजने वाली अकबरी पगड़ी।

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लल्लापुरा निवासी ग्यासुद्दीन और उनके परिवार के सदस्य बाबा के लिए रेशमी शाही पगड़ी कई वर्षों से तैयार करते आ रहे हैं। इस पगड़ी को सजाने का काम राजादरवाजा के कारोबारी नंदलाल अरोड़ा करते हैं। ग्यासुद्दीन का परिवार विगत सात पुश्तों से बाबा के लिए रंगभरी एकादशी पर शाही पगड़ी बनाने का जिम्मा निभाता आ रहा है, जबकि नंदलाल अरोड़ा के पूर्वज इस पगड़ी को सजाने का दायित्व निभाया करते थे। उनकी वंशपरंपरा में यह जिम्मा अब नंदलाल अरोड़ा निभा रहे हैं।

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ग्यासुद्दीन ने बताया कि मेरी सात पुश्तों से बाबा की पगड़ी बनाने का कार्य मेरे घर में होता आ रहा है। रंगभरी एकदशी से एक माह पहले से परिवार के सदस्यों के साथ इस पाक काम के लिए एक निश्चित स्थान को स्वच्छ कर वहां पगड़ी का कार्य किया जाता है। बाबा के मस्तक पर लगने वाली पगड़ी काशी की गंगा जमुनी तहज़ीब की मिसाल है।

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