राम मंदिर भूमि पूजन के लिए BHU प्रोफेसर अयोध्या लेकर पहुंचेंगे स्वर्ण सर्प, चांदी के बेल पत्र और कश्यप

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वाराणसी। पांच अगस्त को अयोध्या में श्रीराम जन्म भूमि मंदिर की आधारशिला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रखने वाले हैं। इसके लिए काशी से तीन बीएचयू के प्रोफेसर काशी विद्वत परिषद के तहत अयोध्या जा हैं। इन तीन विद्वानों की निगरानी में ही श्री राम जन्म भूमि मंदिर का भूमि पूजन होना है और यह तीन विद्वान काशी से स्वर्ण सर्प, कश्यप और बाबा विश्वनाथ को चढ़ा हुआ रजत बेलपत्र लेकर अयोध्या भूमी पूजन के लिए जा रहे हैं। ये सभी चीजें शिलान्यास के समय चांदी के ईट के साथ इन पूजी सामग्रियों को भी भूमी में डालने के लिए आग्रह करेंगे।

प्रोफेसर रामनारायण द्विवेदी बीएचयू, संस्कृत धर्म विद्या विज्ञान विभाग, काशी विद्वत परिषद के संयोजक एवं महामंत्री ने बताया कि काशी विद्वत परिषद के तत्वाधान में बीएचयू के तीन प्रोफेसर राम मंदिर शिलान्यास के लिए अयोध्या रवाना हो रहे है ये प्रोफेसर अपने साथ राम मन्दिर शिलान्यास के लिए कुछ धार्मिक वस्तु ले जा रहे हैं, जिनमे स्वर्ण के नाग नागिन और चाँदी कश्यप और चांदी का बलेपत्र जो बाबा विश्वनाथ को अर्पण किया हुआ शामिल है।

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उन्होंने बताया कि बीएचयू के प्रोफेसरों के अनुसार शेष नाग पर पृथ्वी स्तिथ है इसलिए हम स्वर्ण नाग ले जा रहे है और शेष नाग कश्यप पर है इसलिए चांदी का कश्यप हमारे साथ है और चांदी का बेलपत्र बाबा विश्वनाथ के आशिष के रुप में ले जा रहे है जिससे शिलान्यास सम्पन्न होगा।

प्रोफेसर विनय पांडेय विभागाध्यक्ष, ज्योतिष विभाग, बीएचयू पाँच अगस्त को पीएम मोदी खुद भूमि पूजन करेंगे इस महाआयोजन के लिए वाराणसी के काशी विद्वत परिषद के विद्वानों में बीएचयू के प्रोफेसर भी हैं। काशी विद्वत परिषद अपनी तरफ से उपहार स्वरुप राम जन्म भूमी पूजन के लिए नाग नागिन का जोड़ा, चांदी के बेल पत्र और कश्यप लेकर जा रहा है। वहां पर मौजूद वैदिक विद्वान जो कर्मकाण्ड संपन्न कराएंगे उस वक्त हमारी यह इच्छा और कोशिश होगी की इन सामग्रियों को भूमी में डाला जाए, जिससे भगवा शिव का आशीर्वाद प्राप्त हो।

काशी विद्वत परिषद के संयोजक एवं महामंत्री और बीएचयू के धर्म विद्या विज्ञान विभाग के प्रोफेसर और बीएचयू के प्रोफेसर राम चन्द्र और बीएचयू के ज्योतिष विभाग के प्रमुख भी इस महायोजन में हिस्सा लेने अयोध्या जा रहे हैं। उन्होंने बताया की हमारा कार्य इस शिलान्यास समारोह में ये देखना है की सबकुछ धर्म के अनुरूप होता रहे।