अनुसूचित जनजाति के फर्जी सर्टिफिकेट पर ले ली बीएचयू में नौकरी, जांच शुरू

सोनभद्र से बनवाया खरवार जनजाति का फर्जी सर्टिफिकेट
दबाव बनाने के लिए बीएचयू के अधिकारियों पर दर्ज कराया था मुकदमा

वाराणसी। बीएचयू में नौकरी और पोस्‍ट डॉक्‍टरल फेलोशिप के लिए फर्जी जाति प्रमाण पत्र लगाने का एक मामला सामने आया है। उप्र अनुसूचित जाति और जनजाति आयोग के अध्‍यक्ष बृजलाल ने मामले की जांच एडीजी वाराणसी जोन को सौंपी है। जांच के बाद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर आख्‍या देने के लिए 30 अक्‍टूबर तक का समय दिया गया है।

पिछड़ी जाति के थे, बनवाया अनुसूचित जाति का सर्टिफिकेट
प्रकरण बीएचयू के समाजशास्‍त्र विभाग में कार्यरत सहायक प्रोफेसर मनोज वर्मा और उनके भाई अरविंद कुमार का है। शिकायतकर्ता अनंत नारायण मिश्रा ने आरोप लगाया है कि दोनों कहार जाति के हैं और इन्‍होंने बीएचयू में नौकरी और पोस्‍ट डॉक्‍टरल फेलोशिप के लिए खरवार जनजाति (अनुसूचित जनजाति) का सर्टिफिकेट सोनभद्र से बनवा लिया। इसके आधार पर दोनों भाइयों ने अपने नाम के आगे वर्मा टाइटल लगा लिया और आरक्षण का लाभ लिया।

दबाव बनाने को कराया मुकदमा
शिकायतकर्ता के मुताबिक दोनों भाइयों ने पद का लाभ लेने के लिए लंका थाने में समाजशास्‍त्र विभाग के हेड अरविंद जोशी, अनंत नारायण मिश्रा व अन्‍य के खिलाफ एससीएसटी एक्‍ट व मारपीट की धाराओं में मुकदमा भी करा दिया। मुकदमा 28 जनवरी 2019 को दर्ज कराया गया था। शिकायतकर्ता ने आरोपियों की जाति बताने के लिए कई साक्ष्‍य भी आयोग के समक्ष पेश किए हैं। वाराणसी एडीजी जोन कार्यालय ने प्रकरण की जांच शुरू कर दी है।

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