प्रतिकात्मक चित्र
विज्ञापन

वाराणसी। प्रसव के बाद 45 दिनों के काल को सुतिकावस्था कहते हैं। गर्भ में 9 महीने तक पलने के बाद शिशु का जन्म होता है। इस नौ महीनों तक शिशु को गर्भाशय में जीवित रहने के लिए प्रकृति ने व्यवस्था बनाई है। कभी-कभी महिलाओं को प्रसव के बाद शारीरिक या मानसिक दिक्कतें भी होती हैं साथ ही शरीर में निश्चित रुप से कुछ बदलवा और प्रभाव भी पड़ते हैं।

डॉ संध्या, सीनियर रेजिडेंट, प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग, चिकित्सा विज्ञान संस्थान, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रसव काल की इस अवधि में प्रसूता के शरीर पर निश्चित कुछ प्रभाव पड़ता है। श्वास प्रस्वास की गति और शारीरिक तापमान घटता बढ़ता रहता है। पाचन क्रिया मंद्द सी रहती है। प्रसव के बाद मां को पहले दिन थकावट की वजह से भूख नहीं लगती। उसे गरम चाय अथवा दूध लेना चाहिए। दो दिन तक हल्का आहार और तीसरे दिन शौच होने के बाद हल्का सुपाच्य विटामिन युक्त भोजन देना चाहिए।

उन्होंने बताया कि एक निश्चित काल तक प्रसूता यानी मां को पथ्यादि व्यवस्था का पालन करना चाहिए। प्रसूता के पैड जब जब गंदे हो तुरंत बदलने चाहिए। यदि टांके लगे हों तो विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। प्रसव के बाद रक्तस्राव की ओर ध्यान देना चाहिए। इसके लिए प्रसूता के बाह्य अंग पर बंधे कपड़े देखना चाहिए। प्रसव के समय और बाद में मां के शरीर में विषाणु का प्रवेश ना हो इस पर भी ध्यान देना चाहिए।

डॉ संध्या ने बताया कि प्रसव के बाद यदि नींद आने में कठिनाई होती है तो डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए, उचित मात्रा में नींद लेना मां के लिए आवश्यक है। शिशु जन्म के दो महीने के बाद जब स्त्री अपने स्वाभाविक स्वास्थ्य को प्राप्त करने के बाद आसन या व्यायाम चिकित्सक के सलाह से शुरू कर सकती हैं। छठें या आठवें सप्ताह के बाद स्त्री को अपनी सार्वदेहिक जांच करा लेनी चाहिए। इस समय अवशिष्ट रह गए छोटे मोटे विकार की ओर यदि ध्यान ना दिया जाए तो भविष्य में परेशानी का कारण बन सकती है। इस प्रकार गर्भावस्था एवं प्रसवकाल की व्यथावों से ग्रस्त स्त्री धीरे धीरे पूर्णतः स्वस्थ हो जाती है।

उन्होंने बताया कि महिला द्वारा यदि इसका पूर्ण पालन ना किया गया तो ज्वर, कास, पिपाशा, शरीर का भारीपन, शूल तथा अतिसार आदि रोग होने की संभावना बनी रहती है। वर्तमान में कोविड-19 संक्रमण तेजी से फैल रहा है, ऐसे में अधिक सावधानी की जरूरत है। हाथों को बार बार साफ करें साथ ही सोशल डिस्टेंसइंग एवं मास्क का हमेशा प्रयोग करें।

विज्ञापन