बनारस मेरा परि‍वार है, यही मेरी जि‍म्‍मेदारी है…

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वाराणसी। इस वैश्‍वि‍क संकट कोरोना के दौर में देशभर के सि‍वि‍ल सेवा के अधि‍कारि‍यों की मेहतन, हि‍म्‍मत, धैर्य और हौसले की हर कोई सराहना कर रहा है। ऐसा पहली बार है जब बड़े पैमाने पर जनता के दि‍लों में प्रशासनि‍क अधि‍कारि‍यों के प्रति‍ इतनी मोहब्‍बत देखने को मि‍ल रही है। हो भी क्‍यों ना… आईएएस, आईपीएस सहि‍त सि‍वि‍ल सेवा के सभी वर्ग के अधि‍कारी और कर्मचारी इस संकटकाल में सबकुछ भूलकर अपनी जि‍म्‍मेदारि‍यों को नि‍भाने में इतने व्‍यस्‍त हैं कि‍ खुद वे अपने परि‍वार को भी ठीक से समय नहीं दे पा रहे हैं।

बनारस वालों के दि‍ल पर राज कर रहे कौशल राज…
वाराणसी जि‍ले की कमान संभाल रहे डि‍स्‍ट्रि‍क्‍ट मजि‍स्‍ट्रेट कौशल राज शर्मा भी इस वक्‍त बनारस वालों के दि‍ल पर राज कर रहे हैं। अपने अपने घरों में रहकर कोराना महामारी के खि‍लाफ वैश्‍वि‍क लड़ाई लड़ रही जनता इस वक्‍त जि‍लाधि‍कारी की मेहनत, लगन, हि‍म्‍मत और धैर्य को देखकर उन्‍हें जीभरकर आशीर्वाद दे रही है।

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क्‍योंकि‍ आज सि‍वि‍ल सर्वि‍स डे है…
आज 21 अप्रैल को भारत में सि‍वि‍ल सर्वि‍स डे के रूप में मनाया जाता है। कोरोना संकट के काल में अपनी भागमभाग भरी दि‍नचर्या के बीच जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने मीडि‍या से खुद से जुड़ी बातें शेयर की हैं।

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पूरा बनारस मेरा परि‍वार है…
कोरोना काल में परि‍वार को समय कम दे पाने के मीडि‍या के सवाल के जवाब में जि‍लाधि‍कारी कौशल राज शर्मा ने कहा जैसे प्रधानमंत्री कहते हैं कि पूरा राष्ट्र उनका परिवार है, उसी प्रकार हमें भी जिले के रूप में छोटी इकाई का चार्ज मिला है, तो पूरा जिला ही हमारा परिवार है। उन्होंने कहा कि कोरोना की जद्दोजहद में अपने परिवार को समय न दे पाने की कसक कम और प्रेरणा अधिक मिलती है, क्योंकि पूरा जिला ही अपना परिवार है। कुल मि‍लाकर परि‍वार वालों में भी संतुष्‍टि‍ है और हममे भी है।

घरवाले जानते हैं, जि‍म्‍मेदारी बड़ी है…
उन्‍होंने कहा कि‍ परि‍वार से उन्‍हें मोरल सपोर्ट मि‍लता है। परि‍वार वालों को भी मालूम है कि‍ इस वक्‍त हमारी जि‍म्‍मेदारी हमारे बड़े परि‍वार यानी पूरे जि‍ले को लेकर है। जब पूरा जि‍ला अपना परि‍वार है तो हम उनकी भी केयर अपने परि‍वार के सदस्‍यों की तरह ही कर रहे हैं।

सांत्‍वना देना पड़ता है, ढांढस बंधाना पड़ता है…
डीएम ने बताया कि‍ जि‍ले का कोई भी व्‍यक्‍ति‍ बीमार है, कि‍सी का टेस्‍ट पॉजि‍टि‍व आ गया है तो उसके घर वालों को सांत्‍वना देना होता है, खुद उस मरीज को सांत्‍वना देना पड़ता है, बाकी पब्‍लि‍क का ख्‍याल रखना पड़ता है, यही हमारी सबसे बड़ी जि‍म्‍मेदारी है। रह गयी अपने घरवालों की बात तो जब समय मि‍लेगा उनपर तब भी ध्‍यान दि‍या जा सकता है, परंतु ये जो घड़ी है इसमें हमें अपने बड़े परि‍वार यानी पूरे जि‍ले की जि‍म्‍मेदारी संभालनी है, इस वक्‍त ये बहुत जरूरी है।

पूरी दि‍नचर्या बि‍गड़ चुकी है…
जि‍लाधि‍कारी ने बताया कि‍ वर्तमान में दि‍नचर्या पूरी तरह बि‍गड़ चुकी है। उन्‍होंने कहा, ”सि‍र्फ मेरी ही नहीं, सि‍वि‍ल सर्वि‍स से जि‍तने भी लोग जुड़े हैं, सबकी दि‍नचर्या ऐसी ही चल रही होगी। क्‍योंकि‍ जो घटनाएं घटती हैं, वो कि‍सी के कंट्रोल में नहीं होती। अब जैसे बात करें तो… कोरोना का टेस्‍ट होता है, उसके बाद जांच की रि‍पोर्ट आती है। रि‍जल्‍ट आने के बाद उस क्षेत्र को हॉटस्‍पॉट करना होता है, इलाके की सीलिंग करनी होती है, वहां पर जरूर चीजों की सप्‍लाई कैसे पहुंचे इसकी व्‍यवस्‍था बनानी होती है। इसके बाद पॉजि‍टि‍व रि‍पोर्ट आने वाले लोगों से जि‍न लोगों के कॉन्‍टैक्‍ट होते हैं उनकी ट्रेसिंग करानी होती है, सभी की सैम्‍पलिंग करानी होती है।

कब रात के दो-तीन बज जाते पता ही नहीं चलता…
इसके अलावा पैरलल घटनाक्रम चलते रहते हैं, जैसे पूरे जि‍ले में जो हमारा रुटीन का लॉकडाउन हैं उसको पालन कराना। जो जरूरी सामग्री हैं उन्‍हें लोगों तक पहुंचाना, जो वस्‍तुएं हैं उनके दाम को कंट्रोल में रखना। वि‍भि‍न्‍न प्रकार के वर्ग, जि‍समें व्‍यापारी हैं, ट्रांसपोर्टर्स हैं, सप्‍लाई चेन वाले लोग हैं उनकी समस्‍याओं का समाधान करना, वि‍वि‍ध प्रकार की दि‍क्‍कतें हैं, कुछ मरीज हैं उनकी दि‍क्‍कतें सॉल्‍व करना और इसके बाद हेल्‍थ के इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर को मजबूत रखना। हॉस्‍पीटल की व्‍यवस्‍था को सुचारू रखवाना, इन सारी चीजों को करते करते कब रात के दो-तीन बज जाते पता ही नहीं चलता। फि‍र सुबह 6 बजे से वही दि‍नचर्या शुरू हो जाती है।

कभी थकान और तनाव महसूस नहीं होता…
जि‍लाधि‍कारी के अनुसार यह अप्रत्‍याशि‍त घड़ी है, तो जाहि‍र सी बात है अप्रत्‍याशि‍त ऊर्जा भी हम लोगों को मि‍ल रही है, कभी ऐसा महसूस नहीं होता कि‍ हम थके हुए हैं या तनाव में हैं। हम इतने उत्‍साह और जोश के साथ पब्‍लि‍क की सेवा करते हैं कि‍ कभी भी ये फील नहीं होता कि‍ ये हमारे ऊपर बोझ है या कोई हमसे मजबूरी में ये सब करवा रहा है। डीएम के अनुसार-

”ये एक्‍स्‍ट्रा ऑर्डि‍नरी समय है तो एक्‍स्‍ट्रा ऑर्डि‍नरी सर्वि‍स भी एक्‍स्‍ट्रा ऑर्डि‍नरी ऊर्जा के साथ हो रही है।”

कोरोना और पब्‍लि‍क के बीच ढाल के रूप में हैं हम…
डीएम ने बताया कि‍ सि‍वि‍ल सर्वि‍स चुनौति‍यों से भरी सेवा है।

इस वर्ष का चैलेंज यही है कि हमें कोरोना और पब्लिक के बीच में ढाल के रूप में खड़ा रह कर इसे जल्द से जल्द परास्त करना है।

इसी के लिए पिछले एक-डेढ़ माह से सभी पब्लिक सेवा से जुड़े लोग लगे हुए हैं और कोशिश है कि जल्दी से जल्दी कोरोना को हम परास्त कर लेंग। जैसे पहले जो भी विपत्ति आयी और उससे पार पाया गया, वैसे ही कोरोना के जंग को भी हम जीतेंगे तथा सारी जनता को देश के साथ आगे लेकर जाएंगे।