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वाराणसी। धर्म की नगरी काशी में रविवार को शारदीय नवरात्री के प्रथम जगत जननी माँ जगदम्बा के प्रथम स्वरूप माता शैलपुत्री देवी के अलईपुर क्षेत्र स्थित मंदिर में भक्तो की भारी भीड़ रही। दो दिनों से हो रही बारिश के बावजूद श्रद्धालु देवी शैलपुत्री के दर्शन को आतुर दिखे। कुछ बारिश में भीगते हुए तो कुछ छातों और रेनकोट के सहारे माता शैलपुत्री के दरबार में अमृत वर्षा में भीगने के लिए पहुंचे।

वाराणसी में देवी भगवती के नव स्वरूपों में अलग अलग मंदिर हैं, जहां नवरात्री के प्रथम दिन से लेकर नवमी तक जगदम्बा के विभिन्न स्वरूपों के दर्शन की मान्यता है। नवरात्र का पर्व शुरू होते ही नौ दिनों में देवी पूजा का विशेष महत्व है। प्रथम दिन माता शैलपुत्री का दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ मां के दरबार में उमड़ पड़ी है।

माता शैलपुत्री के दरबार में पुजा अर्चना कर रहे महंत परिवार के सदस्य गजेंद्र गोस्वामी ने बताया कि दुर्गा का अर्थ है , परमात्मा की वह शक्ति, जो स्थिर और गतिमान है, लेकिन संतुलित भी है। किसी भी प्रकार की साधना के लिए शक्ति का होना जरूरी है और शक्ति की साधना का पथ अत्यंत गूढ और रहस्यपूर्ण है। हम नवरात्र में व्रत इसलिए करते हैं, ताकि अपने भीतर की शक्ति, संयम और नियम से सुरक्षित हो सकें, उसका अनावश्यक अपव्यय न हो। जिसमे सबसे पहले दिन माता शैल पुत्री के दर्शन का विधान है।

शैलराज हिमालय की कन्या होने के कारण इन्हें शैलपुत्री कहा गया है, माँ शैलपुत्री दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का पुष्प लिए अपने वाहन वृषभ पर विराजमान होतीं हैं। इनके एक हाथ में अमृत कलश है। गजेंद्र गोस्वामी बताते हैं कि हर वर्ष लाखो लोग दर्शन पूजन करते हैं पर मेरे याद में पहली बार हो रही यह वर्षा अमृत सामान है और आज सौभाग्य वाले ही माता का दर्शन करेंगे। सुबह 7 बजे तक ढाई सौ लोगों ने मां के दर्शन किये थे जबकि पहले के वर्षों में यह संख्या इस समय तक हज़ार के पार होती थी।

महंत गजेंद्र स्वामी ने बताया कि ऐसी मान्यता है की देवी के इस रूप ने ही शिव की कठोर तपस्या की थी। इनके दर्शन मात्र से सभी वैवाहिक कष्ट मिट जाते हैं। माता के दरबार में महिलाओं की भीड़ उमड़ी है। सभी अपने वैवाहिक जीवन को और प्रगाढ़ करने की कामना के साथ मां के दरबार में नारियल और गुड़हल का फूल चढाने के लिए लेकर आई थी।

महिला श्रद्धालु विभा जायसवाल रेनकोट पहनकर आई हैं। उन्होंने बताया कि हर साल यहां मां से आशीर्वाद लेने आती हूं। माता के चरणों में आकर सुखद अनुभूती होती है। आज बारिश हो रही है पर माँ का अमृत प्रसाद लेने के लिए मै रेनकोट पहनकर आई हूं।

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