Ekadashi drenched in colors, when the procession of Baba Vishwanath's cowl came out with the thunder of the Damroos
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वाराणसी। रंग भरी एकादशी के पावन पर्व पर आज शिव की नगरी काशी में भक्तों ने भगवान् शिव और माता पार्वती के साथ जमकर होली खेली, मौका था भगवान् शंकर के गौने का। पौराणिक कथाओं के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन बाबा भोलेनाथ की शादी हुई थी और आज यानी एकादशी के दिन भगवान् शंकर माता पार्वती का गौना करवा के लाये थे।

काशी में 365 वर्ष पुरानी परम्परा का नि‍र्वहन इस वर्ष पूर्व महंत डॉ कुलपति तिवारी के मौजूदा आवास टेढ़ी नीम स्थित गेस्ट हॉउस से निभायी गयी। रजत पालिका पर सवार बाबा विश्वनाथ और माता पार्वती की चल प्रतिमा के समक्ष श्रद्धालु दोपहर बाद से ही गुलाल चढाने पहुंच रहे थे, जैसे ही बाबा की पालकी उनके ससुराल से बाहर निकली पूरी गली हर हर महादेव के जयघोष और डमरुओं की नाद से गूँज उठी।

काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत और सारी रस्मों को अपने पूर्वजों की भाँती वर्षों से निभाते आ रहे डॉ कुलपति तिवारी बताते हैं कि वैसे तो काशी में रंगों की छठा शिवरात्रि के दिन से ही शुरू हो जाती है, लेकिन काशी नगरी में एक दिन ऐसा भी रहता है जब बाबा खुद अपने भक्तों के साथ होली खेलते है। रंगभरी एकादशी के दिन बाबा की चल प्रतिमा अपने परिवार के साथ निकलती है।

द्वादश ज्योति‍र्लिंगों में शामि‍ल वि‍श्‍वेश्‍वर के इस अदभुत रंगों के खेल में मानों पूरी काशी अपने बाबा वि‍श्‍वनाथ के रंग में रंग जाती है। मंदिर के प्रमुख अर्चक श्रीकांत महराज बताते हैं कि देवों के देव महादेव बाबा विश्वनाथ स्वयं ही काशी में विराजते हैं और ये उनका अवि‍मुक्‍त क्षेत्र है यानि‍ शि‍व काशी को कभी नहीं छोड़ते। काशी में वैसे तो हर दिन बाबा भोले से जुड़ा रहता है, लेकिन शिवरात्रि के बाद पड़ने वाली रंगभरी एकादशी का अपना अलग ही महत्व है।

श्रीकांत महराज ने बताया कि इस दिन काशी मानों भोले भंडारी के रंग में रंग जाती है। भोले बाबा इस दिन माँ पार्वती के साथ खुद ही निकलते है भक्तों के साथ होली खेलने। आज के पावन दिन बाबा के चल प्रतिमा का दर्शन भी श्रद्धालुओं को होता है और बाबा के दर्शन को मानों आस्था का जन सैलाब काशी की इन वि‍श्‍वप्रसि‍द्ध गलियों में उमड़ पड़ता है।

मान्यता है की देव लोक के सारे देवी देवता इस दिन स्वर्गलोक से बाबा के ऊपर गुलाल फेकते हैं। भक्त जमकर बाबा के साथ होली खेलते हैं। मान्यता है की बाबा इस दिन माँ पार्वती का गौना कराकर कैलाश धाम लौटते हैं। बाबा की पावन मूर्ति को बाबा विश्वनाथ के आसान पर बैठाया जाता है कुछ भक्त तो दूर दराज से आज के इस विशेष दिन के लिये भी आते हैं।

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