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जैतपुरा स्थित बागेश्‍वरी देवी मंदिर में विराजती हैं मां स्‍कंदमाता

वाराणसी। नवरात्र के पांचवें दिन मां स्कंदमाता के दर्शन का विधान है। वाराणसी में मां स्कंदमाता जैतपुरा स्थित बागेश्वरी देवी मंदिर में विराजती हैं। यह मंदिर अति प्राचीन माना जाता है।

विद्या की देवी हैं मां बागेश्‍वरी
स्कंदमाता रूपी देवी बागेश्वरी को विद्या की देवी माना जाता है। इसीलिए यहां छात्रों की भीड़ सालभर रहती है। मान्‍यता है कि मां के दर्शन से विद्यार्जन में आने वाली सभी रुकावटें दूर हो जाती हैं। पढ़ाई के बाद नौकरी की मन्‍नतें भी मां पूरी करती हैं। यहां मां को नारियल का चढ़ावा चढ़ता है। मां को चुनरी के साल लाल अड़हुल की माला व मिष्‍ठान का भी भोग लगाया जाता है। मां अपने भक्‍तों को उनकी सद्बुद्धि और विद्या के अनुरूप वरदान देती हैं।

मंदिर के पुजारी गोपाल मिश्रा ने बताया कि स्कंदमाता शिक्षा और संतान प्राप्ति की मां हैं। पढ़ने लिखने वाले बच्चे यहां शिक्षा और ज्ञान में वृद्धि के लिए यहां दर्शन करते हैं और माताएं संतानप्राप्ति के लिए यहां दर्शन करती हैं। स्कंदमाता का दर्शन साल में 6 महीने के बाद वासंतिक नवरात्र की तिथि को और शारदीय नवरात्रि की पंचमी तिथि को होता है।

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