वसंत महिला महाविद्यालय में पांच दिवसीय फैकल्टी डेवलेपमेंट ऑनलाइन कार्यशाला का हुआ शुभारम्भ

Advertisements

वाराणसी। वसंत महिला महाविद्यालय,राज घाट के आई क्यू ए सी सेल द्वारा पांच दिवसीय फैकल्टी डेवलोपमेंट ऑनलाइन कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस ऑनलाइन कार्यशाला का विषय डिजिटल लर्निंग एंड प्रोफेशनल एथिक्स है। अगले पांच दिनों में इस ऑनलाइन कार्यशाला में 13 सत्र होंगे।

मंगलवार को उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि रावेंसा यूनिवर्सिटी,कटक के कुलपति प्रोफेसर ईशान पात्रा ने कहा कि पोस्ट कोविड जैसी कोई चीज नहीं है हमें इसके साथ रहना होगा। नए तरीके के अधिगम का प्रयोग अध्ययन और अध्यापन के लिए करना होगा। प्रायोगिक,सैद्धान्तिकौर विश्लेषणवादी तरीकों को समझना होगा। हमें देखना होगा कि क्या डिजिटल लर्निंग के लिए हर जगह कनेक्टिविटी ,बिजली की सुविधा है कि नहीं।

Advertisements

उन्होंने कहा कि हमें देखना होगा कि गूगल अकाउंट सभी के पास है कि नहीं क्योंकि घर के पुरुषों के पास पति ,भाई,बेटे के पास तो यह होता है लेकिन उसी मात्रा में स्त्री के पास नहीं होता। बदलते परिदृश्य में हमें तकनीक प्रेमी बनने की आवश्यकता है। निश्चित रूप से शिक्षक संवेदनाओं के साथ पढ़ाता है लेकिन यह आभासी माध्यम में संभव नहीं है। हमारे सामने स्क्रीन पर चेहरे के साथ भावनाओं की जगह वर्णमाला के शब्द होते हैं ऐसे में विद्यार्थी के सांस्कृतिक परिवेश,उनकी आवश्यकता का पता करना मुश्किल काम है। साथ ही कौन हमें सुन रहा और कौन नहीं सुन रहा यह जानना भी कठिन होता क्योंकि फोटो और आवाज को एक खास समय के लिए म्यूट कर रखा जाता। हम वैश्विक रूप से जुड़ तो जाते हैं लेकिन विशेष आवश्यकता की समझ इस माध्यम से नहीं बन पाती।

Advertisements

विशिष्ट अतिथि के रूप में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग के संकायाध्यक्ष एवं अध्यक्ष प्रोफेसर एस के स्वाइन ने कहा कि कोरोना के कारण हुए वैश्विक विध्वंश के बाद जिस माध्यम से शैक्षणिक गतिविधि की नई दुनिया में हम प्रवेश कर रहे वहाँ हमें नैतिकता को ध्यान में रखना होगा। गुणवत्ता,नेटवर्किंग की सुविधा, इ पुस्तकालय की बेहतरीन सुविधा की आवश्यकता पर बल देना होगा।

प्रोफेसर एस के स्वाइन ने कहा कि डिजिटल सशक्तिकरण काने के बाद ही हम नए आयाम स्थापित कर सकते हैं। उन्होंने 1991 में हुए कई वैश्विक बैठकों का उद्धरण देते हुए कहा कि गुणवत्ता ही सर्वोत्तम रूप है और इसे प्राप्त करने के लिए पारदर्शिता का होना आवश्यक है।

सत्र का प्रारम्भ महाविद्यालय के कुलगीत से हुआ जिसे डॉ विलंबिता वानीसुधा ने गाया। उद्घाटन सत्र का संचालन डॉ श्रेया पाठक ने किया।अतिथियों का परिचय डॉ मीनाक्षी विश्वाल ने किया।आयोजन की अवधारणा के बारे में विषय स्थापन डॉ आशा पांडेय ने किया। स्वागत करते हुए प्राचार्या डॉ अलका सिंह ने बहुआयामी चुनौतियों की बात करते हुए उच्चतम स्तर की नैतिकता की आवश्यकता के बारे में बताते हुए कहा कि यह नैतिकतापूर्ण व्यवहार से ही पाया जा सकता है।

अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्रबंधक एस एन दुबे ने कहा कि मनुष्य के व्यवहार और मस्तिष्क के साथ मनुष्य का स्वभाव कहीं उपकरण मात्र न बन जाय अतएव एक नए तरीके के व्यावहारिक नैतिकता को निर्मित कर हमें इंटरनेट एथिक्स और प्रोफेशनल एथिक्स को देखना होगा।

इस सत्र में धन्यवाद ज्ञापन डॉ सीमा श्रीवास्तव समन्वयक आई क्यू ए सी सेल ने यह कहते हुए किया आज बदलते परिवेश में डिजिटल लर्निंग के साथ प्रोफेशनल एथिक्स को भी समझना होगा।

उद्घाटन सत्र के बाद प्रथम तकनीकी सत्र का सञ्चालन डॉ अर्चना तिवारी एवं डॉ रविंद्रनाथ मोहंता ने किया। प्रथम वक्ता के रूप में डॉ योगेंद्र पाल,प्रोजेक्ट मैनेजर,कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट आई आई टी,मुम्बई एवं दूसरे वक्त के रूप में डॉ प्रवीण कुमार शर्मा, महर्षि मारकंडेश्वर डीम्ड विश्वविद्यालय,अम्बाला थे।वक्ता द्वय ने इ कंटेन्ट को विकसित करने, पॉडकास्ट को विकसित करने के साथ यू ट्यूब चैनल बनाने,एडिटिंग सॉफ्टवेयर विकसित करने,सॉफ्टवेयर रिकॉर्डिग आदि अनेक विषयों पर चर्चा कर शिक्षण अधिगम में उसके अनुप्रयोग के बारे में बताया ।