विशेष : सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में विदेशी छात्र-छात्राएं सीख रहे हैं हिन्दी और संस्‍कृत का ककहरा

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वाराणसी। एक तरफ बीएचयू के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में जहाँ मुस्लिम प्रोफ़ेसर को लेकर प्रदर्शनों का दौर जारी है। दूसरी तरफ गुरुकुल के लिए जानी जाने वाली काशी में विदेशी छात्र-छात्राएं संस्कृत और हिंदी का ज्ञान ले रहे हैं और सिर्फ ध्यान ही नहीं किसी प्रकांड विद्वान की तरह संस्कृत में श्लोक का पढ़ रहे हैं और उसका भाव भी समझा रहे हैं।

भारत की सभ्यता और संस्कृति कर रही आकर्षित
सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग में आज कोई स्पेशल क्लास नहीं लगी है जिसमे विदेशी नागरिक भी पहुंचे हैं बल्कि संस्कृत और हिंदी का ज्ञान लेने के लिए छात्र विदेशों से इस विश्वविद्यालय का रुख कर रहे हैं। छात्रों को हिंदी पढ़ा रही प्रोफ़ेसर डॉ नीलम सिंह ने बताया कि इन्हे भारत की सभ्यता और संस्कृति आकर्षित कर रही है। इसलिए ये यहां हिन्दी और संस्कृत का ज्ञान लेने आ रहे हैं।

हर वर्ष आते हैं विदेशी छात्र
विदेशी छात्रों को हिंदी पढ़ाने वाली प्रोफ़ेसर डॉ नीलम सिंह ने बताया कि हमारे जो वेद हैं, जो उपनिषद हैं वो विदेशी नागरिकों को आकर्षित कर रहे हैं और ये कोई नयी परम्परा नहीं है। हमेशा से विदेशी नागरिक बनारस में ज्ञान के लिए आये और हमारे विश्वविद्यालय में भी हर वर्ष विदेशी छात्रों का एडमिशन होता है।

प्राइमरी स्टेज से शुरू होती है पढ़ाई
डॉ नीलम सिंह ने बताया कि विदेशी होने की वजह से हम उन्हें सबसे पहले प्राइमरी स्टेज का ज्ञान देते हैं। पहले उन्हें अ से ज्ञ तक का अभ्यास कराते हैं। उसके बाद धीरे-धीरे वो अपने ललक और चाह से हिन्दी और संस्कृत में अभ्यस्त हो जाते हैं।

इन देशों से आते हैं विदेशी
डॉ नीलम सिंह ने बताया कि यहां श्रीलंका, म्यांमार, भूटान, यूक्रेन और रशिया से हर वर्ष बच्चे आते हैं और विश्वविद्यालय में एडमिशन करवाते हैं।

श्रद्धा के साथ ले रहे हैं शिक्षा
सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में आने वाले छात्र सिर्फ ज्ञान के लिए ही नहीं बल्कि पूरी श्रद्धा और निष्ठा के साथ संस्कृत और हिंदी की शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।

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