Former cabinet minister Omprakash Rajbhar criticized the gold reserves found in Sonbhadra
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वाराणसी। तमाम मीडि‍या रि‍पोर्ट्स के अनुसार जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया यानी जीएसआई की टीम ने हाल ही में सोनभद्र की सोन पहाड़ी पर तीन हज़ार टन सोने और हरदी ब्लाक में करीब 6 सौ किलो सोने के भण्डार होने की बात कही जा रही है। इसके बाद पूरे देश में सोनभद्र के सोने की चर्चा हो रही है पर वाराणसी पहुंचे पूर्व कैबिनेट मिनिस्टर ओमप्रकाश राजभर ने इसपर तंज़ कसा है।

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ओमप्रकाश राजभर से जब पूछा गया कि 3 हज़ार टन से अधिक का सोना मिलने की बात जीएसआई कर रहा है। क्या इससे प्रदेश के राजस्व में लाभ मिलेगा तो ओमप्रकाश राजभर ने हंसते हुए तंज़ के लहजे में कहा कि ‘न नौ मन गेंहू होई, ना राधा गौने जइहें।’ ये खाली सुनते जाइये। कैसे नाप लिया की तीन हज़ार टन सोना वहां है।

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उनसे जब बताया गया कि सरकार अभी उम्‍मीद जता रही थी, तो उन्होंने फिर हंसते हुए कहा कि अंदेशा हैं न, पहले वो निकले तो। मोदी जी तो खुद ही 365 टन सोना विदेश में ले जाकर गिरवी रख दिए हैं। जितना निकला नहीं रहा उससे ज़्यादा तो गिरवी रख दिए हैं तो कैसा विकास और कैसी विकास की बात कर रहे हैं।

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बता दें कि तमाम मीडि‍या रि‍पोर्ट में ये दावा कि‍या जा रहा है कि‍ जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया यानी जीएसआई की टीम पिछले पंद्रह साल से इस मामले में सोनभद्र में काम कर रही थी। आठ साल पहले टीम ने ज़मीन के अंदर सोने के ख़जाने की पुष्‍टि कर दी थी। यूपी सरकार ने अब इसी सोने की खुदाई करने के मक़सद से इस टीले को बेचने के लिए ई-नीलामी प्रक्रिया शुरू कर दी है।

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मीडि‍या रि‍पोर्ट्स की मानें तो सोनभद्र की सोन पहाड़ी पर क़रीब तीन हज़ार टन सोना और हरदी ब्लॉक में क़रीब छह सौ किलो सोने का भंडार है। मीडि‍या रि‍पोर्ट के मुताबिक इन जगहों के अलावा पुलवार और सलइयाडीह ब्लॉक में भी लौह अयस्क के भंडार का पता चला है। हालांकि इतने लौह अयस्क में कितना सोना मिलेगा, यह अयस्क की गुणवत्ता पर निर्भर करता है। जानकारों के मुताबिक़, यदि अयस्क अच्छा है तो इससे निकलने वाले सोने की मात्रा अयस्क की आधी मात्रा के बराबर हो सकती है।

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