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वाराणसी। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (काशी हिन्दू विश्वविद्यालय) में गुरूवार को केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री  रमेश पोखरियाल ’निशंक’ ने संस्थान में तीन नए भवनों शिक्षकों के लिए आवास फेज-द्वितीय, छात्रों के लिए मोर्वी छात्रावास द्वितीय और एनी बेसेंट व्याख्यान संकुल परिशिष्ट का शिलान्यास किया।

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इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री की उपस्थिति में आईआईटी (बीएचयू) और भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के मध्य संस्थान में नए छात्रों के लिए 21 दिन का इंडक्शन कार्यक्रम चलाने के लिए समझौता पत्र पर हस्ताक्षर भी हुआ।

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इस अवसर पर पोखरियाल ने कहा कि काशी धर्म, आध्यात्मिक, संस्कृति और ज्ञान की भूमि है। आज बनारस आईआईटी(बीएचयू) में छात्रों के लिए छात्रावास, संकाय सदस्यों के लिए आवास एवं व्याख्यान कक्षों के विस्तार का शिलान्यास किया।

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यशस्वी प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी  के नेतृत्व में हम अपने शीर्ष संस्थानों में श्रेष्ठ ढांचागत अवस्थापना के माध्यम से शैक्षणिक स्तरोन्नयन के लिए संकल्पित है। मुझे इस बात की प्रसन्नता है कि आईआईटी(बीएचयू) अपने सामाजिक दायित्वों के तहत सामाजिक उद्यमिता विकास के अंतर्गत क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के सहयोग से कृषि उद्योगों को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।

आईआईटी(बीएचयू) रक्षा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश सरकार के साथ सूक्ष्मता अभियांत्रिकी ;च्तमबपेपवद म्दहपदममतपदहद्ध और मानव संपदा विकास केंद्र पर कार्य कर रही है।

संस्थान के निदेशक प्रोफेसर प्रमोद कुमार जैन ने केंद्रीय मंत्री  रमेश पोखरियाल का स्वागत किया। इस अवसर पर काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर राकेश भटनागर, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के सदस्य सचिव प्रोफेसर राजीव कुमार, संस्थान के अधिष्ठाता, रिसर्च एंड डेवलेपमेंट प्रोफेसर राजीव प्रकाश, श्री नितिन मल्होत्रा, अधीक्षण अभियंता डाॅ. एसके गुप्ता आदि गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

फैकल्टी आवास में दो ब्लाॅक में 3बीएचके के 80 आवास बनेंगे। वहीं दस मंजिली मोर्वी छात्रावास में कुल 570 कमरे बनेंगे। एक कमरे में दो छात्र रह सकेंगे। एबीएलटी परिशिष्ट में निदेशक कार्यालय, ऑडिटोरियम, कांफ्रेंस हाॅल, लेक्चर थियेटर बनेंगे। तीनों भवन दो साल के भीतर बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

आईआईटी(बीएचयू) और भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के मध्य हुए समझौता के संबंध में निदेशक प्रोफेसर प्रमोद कुमार जैन ने बताया कि देश के सभी एआईसीटीई प्रमाणित शैक्षणिक संस्थानों में नए छात्रों के लिए 21 दिन का इंडक्शन प्रोग्राम चलाया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों को नए परिवेश के बारे में बताना, उस परिवेश में ढालने, अपने वरिष्ठ सहपाठियों, शिक्षकों संग सामंजस्य स्थापित करने में सहयोग किया जाएगा।

साथ ही, शारीरिक क्रियाकलाप, रचनात्मक कला, सांस्कृतिक गतिविधियों, पाठ्येत्तर गतिविधियां भी शामिल हैं। छात्रों के हित में स्टूडेंट काउंसिल सर्विसेज (एससीएस) का गठन भी मुख्य घटक होगा। उन्होंने बताया कि इस तरह के कार्यक्रमों की शुरूआत सबसे पहले आईआईटी(बीएचयू) ने ही की थी।

कार्यक्रम सुचारू रूप से चलाने के लिए आईआईटी(बीएचयू) एआईसीटीई को रिसोर्स मैटेरियल्स, ऑडियो  लेक्चर उपलब्ध कराएगा। संस्थान और परिषद की एक संयुक्त कमेटी का भी गठन होगा जो इस कार्यक्रम को देश के अन्य शैक्षणिक संस्थानों में चलाने में मदद और मूल्यांकन भी करेगी। साथ ही विभिन्न कार्यशालाओं का भी आयोजन किया जाएगा ताकि एआईसीटीई से संबद्ध अन्य कालेज के शिक्षकों भी इस प्रोग्राम को चलाना सीख सकें।

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