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वाराणसी। महामना मालवीय मिशन, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय इकाई की ओर से शनिवार को आनलाइन त्रिदिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार का उद्घाटन समारोह आयोजित हुआ। तीन दिवसों तक चलने वाले इस वेबिनार का विषय ”कोविड-19: वैश्विक सन्दर्भ में महामना की भारतीय जीवन दृष्टि” है, जिसके उद्घाटन सत्र का आरम्भ मंगलाचरण तथा कुलगीत से हुआ। इस वेबि‍नार में देशभर से 2000 से ज्‍यादा प्रति‍भागी शामि‍ल हुए।

दुनि‍याभर में कोरोना वायरस के खतरे के दौरान आयोजि‍त इस वेबि‍नार के दौरान देश के अलग अलग हि‍स्‍सों से वि‍द्वान भी जुड़े। इस दौरान केंद्रीय मानव संसाधन वि‍कास मंत्री ने नयी शि‍क्षा नीति‍ को लेकर भी इशारा जाहि‍र कि‍या है। उन्‍होंने वैदि‍क ज्ञान वि‍ज्ञान पर बल देते हुए इसे नयी शि‍क्षा नीति‍ का आधार बनाने की बात कही है।

वैदि‍क जीवन पद्धति‍ के वि‍कास मॉडल पर करना होगा वि‍चार
वेबि‍नार के स्वागत वक्तव्य में महामना मालवीय मिशन के अध्यक्ष डॉ उपेन्द्र कुमार त्रिपाठी ने कहा कि हमें वैदिक जीवन पद्धति के विकास मॉडल को अपनाते को लेकर विचार करना होगा, जिसमें महामना द्वारा बताए गये प्रकृति के सभी अंगों के साथ समेकित विकास के मॉडल की बात कही गयी है। उन्होंने कहा कि इस राष्ट्रीय वेबिनार के तकनीकि सत्रों से निकले विचारों से वैश्विक कोरोना महामारी के विषाणुओं से लड़ने का कोई न कोई मार्ग अवश्य प्रशस्त होगा।

वेबिनार की परिकल्पना प्रस्तुत करते हुए संयोजिका प्रो0 कविता शाह ने बताया कि इस वेबिनार पर एक ई-पुस्तक भी प्रकाशित की जायेगी।

सभ्‍यता बदल जाती है, संस्‍कृति‍ चि‍रस्‍थायी है
कार्यक्रम के मुख्यवक्ता राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ कृष्ण गोपाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि सभ्यता कुछ वर्षों में बदल जाती है, किन्तु संस्कृति दूध में घी जैसी चिरस्थायी है। परिवार व्यवस्था की धुरी महिलाएँ हैं, जिनका आदर व सम्मान नितान्त आवश्यक है क्योंकि अगर परिवार मूल्य नष्ट हो जायेगा तो संस्कृति को बचाना कठिन हो जायेगा।

मांसाहार है कोरोना संकट का मूल आधार
कोरोना संकट के विषय में उन्होंने कहा कि कोरोना जैसे संकट का मूलाधार मांसाहार है। मांसाहार अब वीभत्स रूप लेकर हमारे समक्ष खड़ा है। इस मांसाहार से मन के विचार भी दूषित होते चले जाते हैं। महामना एवं गाँधी जी ने कभी मांसाहार को स्वीकार नहीं किया। डॉ कृष्ण गोपाल जी ने कहा कि हमें तेन त्यक्तेन भुंजीथा अर्थात् दान कर उपभोग करने की वैदिक संस्कृति को अपनाना चाहिए।

संयमि‍त होकर रहना सीख गये हैं हम
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, नई दिल्ली के अध्यक्ष प्रो धीरेन्द्र पाल सिंह ने कहा कि इस कोरोना संकट काल में हम सब पुनः संयमित होकर रहना सीख गये हैं। हम सब अपने नैतिक कर्तव्यों का यथास्थान रहकर भिन्न-भिन्न निर्वहन कर रहे हैं और आगे भी हमें देशहित में ऐसा करते रहना होगा।

पूरी दुनि‍या भारत की ओर देख रही है
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केन्द्रीय मंत्री, मानव संसाधन विकास डॉ रमेश पोखरियाल ने कहा कि आज पूरी दुनिया भारत की ओर देख रही है। उन्होंने कहा कि आज के सन्दर्भ में महामना का चिन्तन निश्चित रूप से हमारे लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है। हमारी सांस्कृतिक शक्ति ही हमारा सम्बल है।

वैदि‍क ज्ञान वि‍ज्ञान पर होगी भारत की नयी शि‍क्षा नीति‍
वेबिनार के आयोजकों को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि हम महामना की कल्पना के आधार पर हम नयी शिक्षानीति लेकर आयेंगे जो वैदिक ज्ञान-विज्ञान पर आधारित होगी तथा महामना की परिकल्पनाओं पर खरी उतरेगी। इसी क्रम में प्रधानमंत्री द्वारा काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में वैदिक विज्ञान केन्द्र की स्थापना 18 सितम्बर, 2018 को की गयी है।

महामना की जीवनशैली कोरोना से लड़ने में सहायक
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कुलपति एवं महामना मालवीय मिशन, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय इकाई के संरक्षक प्रो0 राकेश भटनागर ने कहा कि महामना का जीवन अत्यन्त सरल था। उनकी जीवनशैली का अनुसरण कोरोना से लड़ने में सहायक होगा।

सत्र संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन आय¨जन सचिव प्रो सुमन जैन ने किया। इसके पूर्व मंगलाचरण की प्रस्तुति डॉ अनयमणि द्वारा तथा कुलगीत की प्रस्तुति डॉ मधुमिता भट्टाचार्या के द्वारा की गई।

प्रथम-सत्र : महामना का जीवन दर्शन और धर्म
इसके पश्चात् वेबिनार के प्रथम सत्र का आयोजन हुआ जिसमें मुख्यवक्ता प्रो0 हृदय रंजन शर्मा, मानोन्नत आचार्य, वेद विभाग, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय तथा डॉ प्रभु नारायण श्रीवास्तव, राष्ट्रीय अध्यक्ष, महामना मालवीय मिशन रहे। इस सत्र का विषय- ”महामना का जीवन दर्शन और धर्म” था।

प्रो0 हृदय रंजन शर्मा ने अपने वक्तव्य में कहा कि ”महामना” यह सम्मान रूप उपाधि केवल मालवीय जी को ही प्रदान की गई है, जो प्राचीन ऋषियों एवं तत्त्ववेत्ताओं के लिए प्रयोग की जाती थी। उन्होंने महामना शब्द का अर्थ बताते हुए कहा कि जिसका मन दूर तक देख सकने में समर्थ हो तथा उदार हृदय हो, वही महामना है।

डॉ प्रभु नारायण श्रीवास्तव ने भी महामना के चिन्तन पर अपने भावोद्गारों को व्यक्त किया। इस प्रथम सत्र का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन सह-आय¨जन सचिव डॉ अभय कुमार सिंह ने किया। बता दें कि‍ इस त्रिदिवसीय वेबिनार में ऑनलाइन माध्यम से 2000 से अधिक प्रतिभागियों ने प्रतिभागिता ग्रहण की और समस्त विद्वानों के व्याख्यानों को सुना।

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