जिन्हे धर्म के नाम पर देश चाहिए था वो पकिस्तान चले गए, यहां सब हिन्दुस्तानी : स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती

वाराणसी। अयोध्या मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट कभी भी अपना फैसला सुना सकती है। ऐसे में पूरे प्रदेश में सुरक्षा बढ़ा दी गयी है। इसी बीच हमेशा अमन का पैगाम देने वाली काशी नगरी से के बार फिर इस फैसले के पहले अमन का पैगाम आया है। यह पैगाम दिया है अयोध्या मामले में पक्षकार और अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने।

Live VNS से ख़ास बातचीत में स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती नें कहा कि जिन्हे धर्म के नाम पर देश चाहिए था वो पकिस्तान चले गए। यहां जो 8 फीसदी मुस्लिम बचे वो हमारे भाई हैं हम बड़े भाई तो वो छोटे भाई। इसलिए इस मसले पर जो भी फैसला आये हमें मोहब्बत और प्यार से रहना है। उन्होंने कहा कि हिन्दू मुस्लिम से नहीं जोड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके पहले जो चीफ जस्टिस थे जस्टिस दीपक मिश्रा उन्होंने कहा था कि मै इस ज़मीन के मालिकाना हक़ के विवाद के रूप में देखता हूँ। उन्होंने पैगम्बर साहब का उदहारण देते हुए कहा कि उन्होंने स्वयं एक मस्जिद गिरवाई थी और कहा था की जो इबादत के स्थान सियासत का अड्डा बन जाए तो वो इबादतगाह नहीं रह जाते। सनातन धर्म में होने के नाते यह कहना चाहूंगा कि हमारे धार्मिक स्थलों को सियासत का अड्डा नहीं बनना चाहिए।

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अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती से जब पूछा गया कि अयोध्‍या जन्‍मभूमि‍ मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी हो चुकी है अब फैसले का इंतजार है। क्‍या लग रहा है हि‍न्‍दुओं के पक्ष को कि‍तने मजबूती के साथ कोर्ट में रखा गया है ? तो उन्होंने तपाक से कहा मुकदमा या चुनाव जो भी लड़ता है उसमे सबको यह रहता है कि वह जीत रहा है। आप हिन्दुधर्माचार्य से पूछ रहे हैं तो मै कहूंगा कि मै जीत रहा हूं पर अभी लखनऊ में मुस्लिम पक्षकार आल इंडिया मुस्लिम परसनल लॉ बोर्ड के सदस्यों से मुलकात की तो उन्होंने कहा कि हमने अपना पक्ष मज़बूती से रखा है। उन्होंने कहा कि 1882 से चल रहे मुकदमे की बारी है। सभी को लग रहा है कि वो जीत रहा है क्योंकि सभी विजय की अकांक्षा से लड़ रहा है।

स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती से जब पूछा गया कि हाईकोर्ट के फैसले की तरह ही अगर यहां भी फैसला दोनों पक्षों को संतुष्‍ट करने वाला आया तो संत समाज का क्‍या रुख होगा, तो उन्होंने कहा कि यदि हाईकोर्ट का फैसला सही होता तो सुप्रीम कोर्ट पहले दिन ही कह देता कि फैसला संवैधानिक है। उन्होंने कहा कि कोर्ट ने ही कहा ‘मीडिएशन इज़ फेल।’ क्यों ? क्योंकि हमने भी कहा हमें सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर विश्वास है और मुस्लिम पक्ष ने भी कहा कि हमें सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर विश्वास है। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले को आने दीजिये क्योंकि विश्वास तो हम दोनों ने व्यक्त किया है। नैतिकता का तकाज़ा भी यही है कि हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले को मानें। किन्तु-परन्तु, बटा हुआ फैसला क्या आएगा ये भविष्य के गर्त की बाते हैं, उसके आधार पर नहीं इस आधार पर की हमने सुप्रीम कोर्ट पर विश्वास किया है तो उसके आने वाले निर्णय पर भी विश्वास होना चाहिए।

अगर इस मामले में फैसला पूरी तरह से हि‍न्‍दुओं के पक्ष में आया तो कि‍तने दि‍नों में वहां भव्‍य मंदि‍र का नि‍र्माण संभव हो सकेगा ? इस प्रश्न का उत्तर देते हुए स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि फैसला आने के बाद भी बहुत सारी दुश्वारियां हैं। फैसला क्या आता है कैसे आता है। किसी निर्माण को तोड़ने में समय नहीं लगता डायनामाइट लगाया और वह ज़मीदोज़ और कुछ घंटों में मलबा भी गायब, लेकिन दुनिया की अनूठी कृति बनाने में बहुत समय लगेगा क्योंकि उसे सजा संवार के बनाया जाएगा अगर देखा जाए तो यदि दिन रात मिलकार काम हुआ तो 5 से 10 वर्ष लगेंगे।

स्वामी जितेंद्रानंद से जब पूछा गया कि अगर फैसला आपके पक्ष में नहीं आया तो हि‍न्‍दू समाज से आप क्‍या अपील करना चाहेंगे, क्‍या आश्‍वासन देंगे, क्‍योंकि‍ सुप्रीम कोर्ट से ऊपर भारत में कोई कोर्ट नहीं है और सरकार ने साफ कर दि‍या है कि‍ सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ही माना जाएगा, यानि‍ संसद में कानून नहीं बनेगा। इसपर उन्होंने कहा कि सरकार ने ऐसा कुछ भी नहीं कहा है। प्रधानमंत्री महोदय ने चुनाव के दौरान एक सभा में कहा था कि उच्चतम न्यायलय अपनी ज़िम्मेदारी को पूरा करे उसके बाद संसद में दरवाज़े।

उन्होंने हिन्दू समाज से अपील करते हुए कहा कि भारत में रहने वाले सभी लोगों को न्यायपालिका, कार्यपालिका और व्यवस्थापिका पर विश्वास है। सभी इनके फैसलों को सवीकार करते हैं। फैसला कुछ भी आये किसी के भी पक्ष में आये, प्रिय आये या अप्रिय कोई देश से बढ़कर नहीं है। हमारे लिए राष्ट्रधर्म, एकता और अखंडता महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि में अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री के हैसियत से संविधान पर विश्वास रखें। उन्होंने कहा कि फैसला सुप्रीम कोर्ट का सर-आंखों पर रही बाद निर्णय की समीक्षा करना तो वो काम वकील करेंगे।

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