अब सिलिकॉन वैली दुनिया की संस्कृतियों की दिशा कर रहा है तय 

वाराणसी। बीएचयू के मालवीय सभागार में बुधवार को काशी मंथन द्वारा ‘भारतीय लोकतंत्र और संसदीय प्रणाली’ विषय पर व्याख्यान का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में बतौर मुख्य वक्ता राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश व विशिष्ट अतिथि के तौर पर राज्यसभा सांसद आरके सिन्हा शामिल हुए।

भारत में लोकतंत्र की जड़े है मजबूत 
कार्यक्रम की शुरुआत में विषय प्रस्तावना देते हुए डॉ धीरेन्द्र राय ने भारतीय लोकतांत्रिक परंपराओं के बारे में चर्चा करते हुए बताया आज पश्चिमी देश शोध व ऐतिहासिक आधार पर ईसा पूर्व चौथी शताब्दी में भारत में लोकतंत्र की जड़ों को मान रहे है। नेवल मैक्सवेल का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मैक्सवेल ने साठ के दशक में भारतीय लोकतंत्र के भविष्य पर प्रश्नचिन्ह खड़ा किया था। लेकिन करीब आधी सदी मैक्सवेल को माफ़ी मांगते हुए ये बात माननी पड़ी की भारत में लोकतंत्र की जड़े बहुत मजबूत हैं।

राजनीति में अपराधीकरण के खिलाफ हो एकजुट 
आपातकाल के बारे में चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि ये भारतीय लोकतंत्र के लिए कलंक भले है लेकिन इसने भी भारतीय लोकतंत्र की मजबूती के लिए कई सबक दिए हैं। उन्होंने कहा कि हमें इस पर चर्चा करनी होगी, लोगों को जागृत करना होगा कि वो राजनीति में अपराधीकरण के ख़िलाफ़ लामबंद हो।

वैदिक काल से भारत में है लोकतंत्र परंपरा 
वही विशिष्ट अतिथि राज्यसभा सांसद आरके सिन्हा  ने भारतीय लोकतंत्र और संसदीय प्रणाली पर अपने विचार प्रस्तुत करते हुए कहा कि लोकतंत्र की परंपरा हमारे यहां वैदिक काल से है। हमारी वर्तमान संसदीय प्रणाली हमारी जड़ो, हमारी ज़मीन से ज्यादा आधुनिक या कहें कि पश्चिमी मान्यताओं से ज्यादा प्रेरित हैं। अगर यह हमारी ज़मीन से निकली प्रणाली होती तो वो काफी हद तक गांधी की रामराज्य की संकल्पना से जुड़ी होती। जो ग्राम स्वराज्य की बात करते थे, विकेंद्रीकरण की बात करते थे। जनभागीदारी के माध्यम से जन के भीतर बदलाव की बात करते थे। हम अपनी प्राचीन व्यवस्था में जाये तो राजदण्ड और धर्मदण्ड की बात है। राजसत्ता के ऊपर धर्मसत्ता की बात है, जो सर्वोच्च सत्ता है। इस राजदण्ड और धर्मदण्ड को वर्तमान संदर्भों में समझना चाहे तो राजदण्ड अथार्त सत्ता व धर्मदण्ड अथार्त हमारी न्यायपालिका।

लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप है निराधार 
2014 के बाद से मैं देख रहा हूं कि केंद्र की वर्तमान सत्ता के ऊपर लोकतंत्र को कमजोर करने के आरोप लगते हैं लेकिन मैं 1962 से भारत की चुनावी राजनीति को करीब से देख रहा हूं, उसका भागीदार रहा हूं। मुझे लगता है इन सभी आरोपों का जवाब देश की जनता ने 2019 में केंद्र की सत्ता को और मजबूती के साथ दोबारा भेजकर दे दिया।

तकनीक ने लोकतंत्र को किया है मजबूत 
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश  ने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में अपने छात्र जीवन का स्मरण करते हुए कहा कि एक दौर था जब काशी, कोच्चि, पुणे जैसे शहरों को सांस्कृतिक राजधानियों के तौर पर जाना जाता था। आज सिलिकॉन वैली है जो दुनिया की संस्कृतियों की दिशा तय कर रहा है।

देश, राज्य, शहरों, गांवो तक में लोग कैसे रिएक्ट करेंगे ये सिलिकॉन वैली की टेक कंपनीज तय करती है। हमें समझना होगा कि तकनीकी ने हमारे जीवन में काफ़ी बदलाव लाया है। पहले जो बदलाव दशकों, शताब्दी में होते थे आजपांच -दस सालों में हो जाते हैं। इस तकनीक नेजहां लोकतंत्र को मजबूत किया है, वहीं इसके समक्ष चुनौतियां भी पेश की हैं। आज दुनिया नॉलेज सोसाइटी की तरफ बन रही है, जो भविष्य की अर्थव्यवस्था के विकास का माध्यम भी है।

संसद बन रहा विरोध का अखाड़ा 
लोकतांत्रिक क्रियाकलापों की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि पिछले कुछ दशकों में भारतीय संसद में राज्यसभा व लोकसभा चर्चा से ज्यादा विरोध-प्रदर्शन करने का अखाड़ा बन गए। देश में बदलाव लाने के लिए ऐसे कानून जिन्हें बीस-तीस साल पहले पास होना चाहिए था वो लंबे समय तक संसद में लटके रहे। चिकित्सा क्षेत्र में बदलाव लाने के,  सड़क परिवहन में बदलाव लाने के, खाद्य पदार्थों में मिलावट से जुड़े कानून को लंबे समय तक संसद में ही अटका रहा। हमारे जन प्रतिनिधियों लगातार निष्क्रिय होते चले गए, गैर जिम्मेदार होते गए और ये इसलिए हुआ क्योंकि एक नागरिक के तौर पर हम अपनी जिम्मेदारियों से विमुख होते चले गए।

राजनीति एक आयाम है  
लोकतंत्र में हम विभिन्न आयामों पर काम करते हैं, राजनीति एक आयाम है। उन्होंने कहा कि भविष्य की चुनौतियों को समझते हुए उनके अनुसार तैयार होना होगा। कैरियर्स के नए उभरते विकल्पों को पहचान कर उसकी संभावनाओं के क्षेत्रों को विस्तार देना होगा।

कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन देते हुए काशी मंथन के संयोजक व विश्वविद्यालय के संयुक्त कुलसचिव  मयंक नारायण सिंह ने कहा कि काशी मंथन का मंच युवाओं के लिए एक ऐसा माध्यम है जिसके द्वारा बिना औपचारिक हुए सीधे संवाद के माध्यम से देश-समाज के विभिन्न क्षेत्रों के निर्माण में अपना योगदान दे रही शख्सियतों से सीखने का मौका मिलता है।

इस अवसर पर कार्यक्रम का संचालन अदिति सिंह ने किया व धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सुमिल तिवारी ने दिया। कार्यक्रम में डॉ नेहा पाण्डे,  डॉ ब्युटी यादव, डॉ अभय कुमार, दिव्या सिंह, विक्रान्त कुश्वाहा, पंकज सिंह, कीर्ति,अंशिका, रजित बघेल, देवाशीष गांगुली, राज दुबे सहित विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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