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वाराणसी। साल 2020 में कुल छह ग्रहण के संयोग बन रहे हैं। 10 जनवरी को पहला चंद्रगहण बीत चुका है, जबकि पांच ग्रहण अभी बाकी हैं। ज्योतिषियों के अनुसार, इस साल दो चंद्रगहण शेष हैं, जिसमें एक पांच जून और दूसरा 5 जुलाई को होगा। यह दोनों पूरी तरह से उपछाया ग्रहण हैं, अर्थात छाया की छाया। मांद्य चंद्रग्रहण होने से इस ग्रहण का सूतक नहीं लगेगा। शास्त्रों में इसे ग्रहण के रूप में मान्यता नहीं है।

इस ग्रहण काल में पूजा-पाठ किया जा सकता है। ज्योतिषों के अनुसार उपछाया ग्रहण तब लगता है, जब चंद्रमा पृथ्वी की वास्तविक छाया में न आकर, उसकी उपछाया से ही लौट जाता है। ऐसी स्थिति में चंद्रमा पर एक धुंधली सी परत नजर आती है। वास्तविक चंद्रग्रहण की तरह इसमें चंद्रमा के आकार पर कोई फर्क नहीं पड़ता है और न ही चंद्रमा का कोई भाग ग्रसित होता है। सिर्फ हल्की सी कांति मलीन होती है।

5 जून को चंद्रगहण का समय स्पर्श रात 11.16 बजे से रात 2.32 बजे तक है, जिसकी कुल अवधि 3 घंटे 15 मिनट 37 सेकेंड है।

ज्योतिषों के अनुसार 21 जून को वर्ष का पहला सूर्यग्रहण लगेगा। यह कंकणाकृति सूर्यग्रहण होगा। इसकी अवधि चार घंटा 12 मिनट है। ग्रहण का समय सुबह 9:15 बजे से दोपहर 3:4 बजे तक होगा। पूर्ण ग्रहण 10:17 से 2:02 बजे तक होगा।

ग्रहण का सबसे ज्यादा प्रभाव 12:10 बजे होगा। 5 जुलाई को होने वाले चंद्रग्रहण की अवधि सुबह 8:37 से 11:22 बजे तक होगी। वर्ष का आखिरी सूर्य ग्रहण 14 दिसंबर को है। ग्रहण का समय सुबह 7:3 बजे से 12 बजे तक होगा।

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