मन की बात : PM ने भारतेंदु बाबू हरि‍श्‍चंद्र को कि‍या याद, ब्रह्मपुत्र उत्‍सव से देश को कराया परि‍चि‍त

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वाराणसी/नई दि‍ल्‍ली। प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में जिस तरह उनके आगमन का इंतज़ार रहता है। उसी तरह हर माह के अंतिम रविवार को उनके द्वारा की जाने वाली मन की बात का भी इंतज़ार लोगों को रहता है।

रविवार को शहर के अलग-अलग स्थानों पर मन की बात कार्यक्रम का आयोजन हुआ। भाजपा कार्यकार्ताओं ने आम जन के साथ प्रधानमंत्री की मन की बात सुनी। प्रधानमंत्री ने आज एनसीसी दिवस के मौके पर एनसीसी कैडेट्स को सम्बोधित किया और उनसे बात की, साथ ही देशवासियों को गुलाबी ठण्ड में फिट रहने को ‘फिट इंडिया’ से जुड़ने की बात कही।

शहर के गिरजाघर स्थित गीता मंदिर पर भाजपा स्वच्छता प्रकल्प के अनूप जायसवाल के साथ लोगों ने प्रधानमंत्री की मन की बात सुनी। मन की बात कार्यक्रम के बाद अनूप जायसवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘मन की बात’ कार्यक्रम जब से शुरू हुआ है। तब से हम सभी को बेसब्री से उसका इंतज़ार रहता है। आज प्रधानमंत्री ने अपनी मन के बात में एनसीसी कैडेट्स से बात की और उनके अनुभवों को सुना और उनसे अपने अनुभव साझा किये।

पढ़ि‍ए प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज अपने मन की बात कार्यक्रम में कि‍न कि‍न वि‍षयों को देश के साथ साझा कि‍या है।

मेरे प्यारे देशवासियो,
हम सभी देशवासियों को ये कभी भी नहीं भूलना चाहिए कि 7 दिसम्बर को आर्म्‍ड फोर्स फ्लैग डे (Armed Forces Flag Day) मनाया जाता है। ये वो दिन है जब हम अपने वीर सैनिकों को, उनके पराक्रम को, उनके बलिदान को याद तो करते ही हैं लेकिन योगदान भी करते हैं। सिर्फ सम्मान का भाव इतने से बात चलती नहीं है। सहभाग भी जरुरी होता है और 07 दिसम्बर को हर नागरिक को आगे आना चाहिए। हर एक के पास उस दिन Armed Forces का Flag होना ही चाहिए और हर किसी का योगदान भी होना चाहिए। आइये, इस अवसर पर हम अपनी Armed Forces के अदम्य साहस, शौर्य और समर्पण भाव के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करें और वीर सैनिको का स्मरण करें।

मेरे प्यारे देशवासियो,
भारत में फि‍ट इंडि‍या मूवमेंट (Fit India Movement) से तो आप परिचित हो ही गए होंगे। CBSE ने एक सराहनीय पहल की है। Fit India सप्ताह की। Schools, Fit India सप्ताह दिसम्बर महीने में कभी भी मना सकते हैं। इसमें fitness को लेकर कई प्रकार के आयोजन किए जाने हैं। इसमें quiz, निबंध, लेख, चित्रकारी, पारंपरिक और स्थानीय खेल, योगासन, dance एवं खेलकूद प्रतियोगिताएं शामिल हैं। Fit India सप्ताह में विद्यार्थियों के साथ-साथ उनके शिक्षक और माता-पिता भी भाग ले सकते हैं। लेकिन ये मत भूलना कि Fit India मतलब सिर्फ दिमागी कसरत, कागजी कसरत या laptop या computer पर या mobile phone पर fitness की app देखते रहना है, जी नहीं ! पसीना बहाना है। खाने की आदतें बदलनी है। अधिकतम focus activity करने की आदत बनानी है। मैं देश के सभी राज्यों के school board एवं school प्रबंधन से अपील करता हूँ कि हर school में, दिसम्बर महीने में, Fit India सप्ताह मनाया जाए। इससे fitness की आदत हम सभी की दिनचर्या में शामिल होगी। Fit India Movement में fitness को लेकर स्कूलों की ranking की व्यवस्था भी की गई हैं। इस ranking को हासिल करने वाले सभी school, Fit India logo और flag का इस्तेमाल भी कर पाएंगे। Fit India portal पर जाकर school स्वयं को Fit घोषित कर सकते हैं। Fit India three star और Fit India five star ratings भी दी जाएगी। मैं अनुरोध करता हूँ कि सभी school, Fit India ranking में शामिल हों और Fit Indiaयह सहज स्वभाव बने। एक जनांदोलन बने। जागरूकता आए। इसके लिए प्रयास करना चाहिए।

मेरे प्यारे देशवासियो,
हमारे देश इतना विशाल है। इतना विविधिताओं से भरा हुआ है। इतना पुरातन है कि बहुत सी बातें हमारे ध्यान में ही नहीं आती हैं और स्वाभाविक भी है। वैसे एक बात मैं आपको share करना चाहता हूँ। कुछ दिन पहले MyGov पर एक comment पर मेरी नजर पड़ी। ये comment असम के नौगाँव के श्रीमान रमेश शर्मा जी ने लिखा था। उन्होंने लिखा ब्रहमपुत्र नदी पर एक उत्सव चल रहा है। जिसका नाम है ब्रहमपुत्र पुष्कर। 04 नवम्बर से 16 नवम्बर तक ये उत्सव था और इस ब्रहमपुत्र पुष्कर में शामिल होने के लिए देश के भिन्न-भिन्न भागों से कई लोग वहाँ पर शामिल हुए हैं। ये सुनकर आपको भी आश्चर्य हुआ ना। हाँ यही तो बात है ये ऐसा महत्वपूर्ण उत्सव है और हमारे पूर्वजों ने इसकी ऐसी रचना की है कि जब पूरी बात सुनोगे तो आपको भी आश्चर्य होगा, लेकिन दुर्भाग्य से इसका जितना व्यापक प्रचार होना चाहिए। जितनी देश के कोने-कोने में जानकारी होनी चाहिए, उतनी मात्रा में नहीं होती है। और ये भी बात सही है इस पूरा आयोजन एक प्रकार से एक देश-एक सन्देश और हम सब एक है। उस भाव को भरने वाला है, ताकत देने वाला है।

सबसे पहले तो रमेश जी आपका बहुत बहुत धन्यवाद कि आपने ‘मन की बात’ के माध्यम से देशवासियों के बीच ये बात शेयर करने का निश्चय किया। आपने पीड़ा भी व्यक्त की है कि है इतने महत्वपूर्ण बात की कोई व्यापक चर्चा नहीं होती है, प्रचार नहीं होता है। आपकी पीड़ा मैं समझ सकता हूँ। देश में ज्यादा लोग इस विषय में नहीं जानते हैं। हाँ, अगर शायद किसी ने इसको International River festival कह दिया होता, कुछ बड़े शानदार शब्दों का उपयोग किया होता, तो शायद, हमारे देश में कुछ लोग है जो ज़रूर उस पर कुछ न कुछ चर्चाएँ करते और प्रचार भी हो जाता।

मेरे प्यारे देशवासियों पुष्करम, पुष्करालू, पुष्करः क्या आपने कभी ये शब्द सुने हैं, क्या आप जानते हैं आपको पता है ये क्या है, मैं बताता हूँ। यह देश कि बारह अलग अलग नदियों पर जो उत्सव आयोजित होते हैं उसके भिन्न- भिन्न नाम है। हर वर्ष एक नदी पर यानि उस नदी का नंबर फिर बारह वर्ष के बाद लगता है, और यह उत्सव देश के अलग-अलग कोने की बारह नदियों पर होता है, बारी- बारी से होता है और बारह दिन चलता है कुम्भ की तरह ही ये उत्सव भी राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देता है और ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के दर्शन कराता है। पुष्करम यह ऐसा उत्सव है जिसमें नदी का मह्त्मय, नदी का गौरव, जीवन में नदी की महत्ता एक सहज रूप से उजागर होती है!

हमारे पूर्वजो ने प्रकृति को, पर्यावरण को, जल को, जमीन को, जंगल को बहुत अहमियत दी। उन्होंने नदियों के महत्व को समझा और समाज को नदियों के प्रति सकारात्मत भाव कैसा पैदा हो, एक संस्कार कैसे बनें, नदी के साथ संस्कृति की धारा, नदी के साथ संस्कार की धारा, नदी के साथ समाज को जोड़ने का प्रयास ये निरंतर चलता रहा और मजेदार बात ये है कि समाज नदियों से भी जुड़ा और आपस में भी जुड़ा। पिछले साल तमिलनाडु के तामीर बरनी नदी पर पुष्करम हुआ था। इस वर्ष यह ब्रह्मपुत्र नदी पर आयोजित हुआ और आने वाले साल तुंगभद्रा नदी आँध्रप्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में आयोजित होगा। एक तरह से आप इन बारह स्थानों की यात्रा एक Tourist circuit के रूप में भी कर सकते हैं। यहाँ मैं असम के लोगों की गर्मजोशी उनके आतिथ्य की सराहना करना चाहता हूँ जिन्होंने पूरे देश से आये तीर्थयात्रियों का बहुत सुन्दर सत्कार किया। आयोजकों ने स्वच्छता का भी पूरा ख्याल रखा। plastic free zone सुनिश्चित किये। जगह-जगह Bio Toilets की भी व्यवस्था की। मुझे उम्मीद है कि नदियों के प्रति इस प्रकार का भाव जगाने का ये हज़ारों साल पुराना हमारा उत्सव भावी पीढ़ी को भी जोड़े। प्रकृति, पर्यावरण, पानी ये सारी चीजें हमारे पर्यटन का भी हिस्सा बनें, जीवन का भी हिस्सा बनें।

मेरे प्यारे देशवासियों,
Namo App पर मध्यप्रदेश से बेटी श्वेता लिखती है, और उसने लिखा है, सर, मैं क्लास 9thमें हूँ मेरी बोर्ड की परीक्षा में अभी एक साल का समय है लेकिन मैं students और exam warriors के साथ आपकी बातचीत लगातार सुनती हूँ, मैंने आपको इसलिए लिखा है क्योंकि आपने हमें अब तक ये नहीं बताया है कि अगली परीक्षा पर चर्चा कब होगी। कृपया आप इसे जल्द से जल्द करें। अगर, सम्भव हो तो, जनवरी में ही इस कार्यक्रम का आयोजन करें।

साथियो, ‘मन की बात’ के बारे में मुझे यही बात बहुत अच्छी लगती है- मेरे युवा-मित्र, मुझे, जिस अधिकार और स्नेह के साथ शिकायत करते हैं, आदेश देते हैं, सुझाव देते हैं- यह देख कर मुझे बहुत खुशी होती है। श्वेता जी, आपने बहुत ही सही समय पर इस विषय को उठाया है। परीक्षाएँ आने वाली हैं, तो, हर साल की तरह हमें परीक्षा पर चर्चा भी करनी है। आपकी बात सही है इस कार्यक्रम को थोड़ा पहले आयोजित करने की आवश्यकता है!

पिछले कार्यक्रम के बाद कई लोगों ने इसे और अधिक प्रभावी बनाने के लिए अपने सुझाव भी भेजे हैं, और, शिकायत भी की थी कि पिछली बार देर से हुआ था, परीक्षा एकदम से निकट आ गई थी। और श्वेता का सुझाव सही है कि मुझे, इसको, जनवरी में करना चाहिए HRD Ministry और MyGov की टीम, मिलकर, इस पर काम कर रही हैं। लेकिन, मैं, कोशिश करुगां, इस बार परीक्षा पर चर्चा जनवरी की शुरू में या बीच में हो जाए। देश भर के विद्यार्थियों-साथियों के पास दो अवसर हैं। पहला, अपने स्कूल से ही इस कार्यक्रम का हिस्सा बनना। दूसरा, यहाँ दिल्ली में होने वाले कार्यक्रम में भाग लेना। दिल्ली के लिए देश-भर से विद्यार्थियों का चयन MyGov के माध्यम से किया जाएगा। साथियो, हम सबको मिलकर परीक्षा के भय को भगाना है। मेरे युवा-साथी परीक्षाओं के समय हँसते-खिलखिलाते दिखें, Parents तनाव मुक्त हों, Teachers आश्वस्त हों, इसी उद्देश्य को लेकर, पिछले कई सालों से, हम, ‘मन की बात’ के माध्य म से ‘परीक्षा पर चर्चा ’Town Hall के माध्यम से या फिर Exam Warrior’s Book के माध्यम से लगातार प्रयास कर रहें हैं। इस मिशन को देश-भर के विद्यार्थियों ने,Parents ने, और Teachers ने गति दी इसके लिए मैं इन सबका आभारी हूँ,और, आने वाली परीक्षा चर्चा का कार्यक्रम हम सब मिलकर के मनाएँ – आप सब को निमंत्रण हैं।

साथियो,
पिछले ‘मन की बात’ में हमने 2010 में अयोध्या मामले में आये इलाहाबाद हाई कोर्ट के Judgementके बारे में चर्चा की थी, और, मैंने कहा था कि देश ने तब किस तरह से शांति और भाई-चारा बनाये रखा था। निर्णय आने के पहले भी, और, निर्णय आने के बाद भी। इस बार भी, जब, 9 नवम्बर को सुप्रीम कोर्ट का Judgement आया, तो 130 करोड़ भारतीयों ने, फिर से ये साबित कर दिया कि उनके लिए देशहित से बढ़कर कुछ नहीं है। देश में, शांति, एकता और सदभावना के मूल्य सर्वोपरि हैं। राम मंदिर पर जब फ़ैसला आया तो पूरे देश ने उसे दिल खोलकर गले लगाया। पूरी सहजता और शांति के साथ स्वीकार किया। आज,‘मन की बात’ के माध्यम से मैं देशवासियों को साधुवाद देता हूँ, धन्यवाद देना चाहता हूँ। उन्होंने, जिस प्रकार के धैर्य, संयम और परिपक्वता का परिचय दिया है, मैं, उसके लिए विशेष आभार प्रकट करना चाहता हूँ। एक ओर, जहाँ, लम्बे समय के बाद कानूनी लड़ाई समाप्त हुई है, वहीं, दूसरी ओर, न्यायपालिका के प्रति, देश का सम्मान और बढ़ा है। सही मायने में ये फैसला हमारी न्यायपालिका के लिए भी मील का पत्थर साबित हुआ है। सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले के बाद, अब देश, नई उम्मीदों और नई आकांशाओं के साथ नए रास्ते पर, नये इरादे लेकर चल पड़ा है। New India, इसी भावना को अपनाकर शांति, एकता और सदभावना के साथ आगे बढ़े-यही मेरी कामना है, हम सबकी कामना है।

मेरे प्यारे देशवासियो,
हमारी सभ्यता, संस्कृति और भाषाएं पूरे विश्व को, विविधता में, एकता का सन्देश देती हैं। 130 करोड़ भारतीयों का ये वो देश है, जहाँ कहा जाता था, कि, ‘कोस-कोस पर पानी बदले और चार कोस पर वाणी ’। हमारी भारत भूमि पर सैकड़ों भाषाएँ सदियों से पुष्पित पल्लवित होती रही हैं। हालाँकि, हमें इस बात की भी चिंता होती है कि कहीं भाषाएँ और बोलियाँ ख़त्म तो नहीं हो जाएगी! पिछले दिनों, मुझे, उत्तराखंड के धारचुला की कहानी पढ़ने को मिली। मुझे काफी संतोष मिला। इस कहानी से पता चलता है कि किस प्रकार लोग अपनी भाषाओँ, उसे बढ़ावा देने के लिए, आगे आ रहें है। कुछ, Innovative कर रहें हैं धारचुला खबर मैंने, मेरा, ध्यान भी, इसलिए गया कि किसी समय, मैं, धारचूला में आते-जाते रुका करता था। उस पार नेपाल, इस पार कालीगंगा- तो स्वाभाविक धारचूला सुनते ही, इस खबर पर, मेरा ध्यान गया। पिथौरागढ़ के धारचूला में, रंग समुदाय के काफ़ी लोग रहते हैं, इनकी, आपसी बोल-चाल की भाषा रगलो है। ये लोग इस बात को सोचकर अत्यंत दुखी हो जाते थे कि इनकी भाषा बोलने वाले लोग लगातार कम होते जा रहे हैं – फिर क्या था, एक दिन, इन सबने, अपनी भाषा को बचाने का संकल्प ले लिया। देखते-ही-देखते इस मिशन में रंग समुदाय के लोग जुटते चले गए। आप हैरान हो जायेंगे, इस समुदाय के लोगों की संख्या, गिनती भर की है। मोटा-मोटा अंदाज़ कर सकते हैं कि शायद दस हज़ार हो, लेकिन, रंग भाषा को बचाने के लिए हर कोई जुट गया, चाहे, चौरासी साल के बुज़ुर्ग दीवान सिंह हों या बाईस वर्ष की युवा वैशाली गर्ब्याल प्रोफेसर हों या व्यापारी, हर कोई,हर संभव कोशिश में लग गया। इस मिशन में, सोशल मिडिया का भी भरपूर प्रयोग किया गया। कईWhatsapp group बनाए गए। सैकड़ों लोगों को, उस पर भी, जोड़ा गया। इस भाषा की कोई लिपि नहीं है। सिर्फ, बोल-चाल में ही एक प्रकार से इसका चलन है। ऐसे में, लोग कहानियाँ, कवितायेँ और गाने पोस्ट करने लगे। एक-दूसरे की भाषा ठीक करने लगे। एक प्रकार से Whatsappही classroom बन गया जहाँ हर कोई शिक्षक भी है और विद्यार्थी भी! रंगलोक भाषा को संरक्षित करने का एक इस प्रयास में है। तरह-तरह के कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, पत्रिका निकाली जा रही है और इसमें सामाजिक संस्थाओं की भी मदद मिल रही है।

साथियो, ख़ास बात ये भी है कि संयुक्त राष्ट्र ने 2019 यानी इस वर्ष को ‘International Year of Indigenous Languages’ घोषित किया है। यानी उन भाषाओँ को संरक्षित करने पर जोर दिया जा रहा है जो विलुप्त होने के कगार पर है। डेढ़-सौ साल पहले, आधुनिक हिंदी के जनक, भारतेंदु हरीशचंद्र जी ने भी कहा था :-

“निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल,
बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल।|”

अर्थात, मातृभाषा के ज्ञान के बिना उन्नति संभव नहीं है। ऐसे में रंग समुदाय की ये पहल पूरी दुनिया को एक राह दिखाने वाली है। यदि आप भी इस कहानी से प्रेरित हुए हैं, तो, आज से ही, अपनी मातृभाषा या बोली का खुद उपयोग करें। परिवार को, समाज को प्रेरित करें।

19वीं शताब्दी के आखरी काल में महाकवि सुब्रमण्यम भारती जी नें कहा था और तमिल में कहा था। वो भी हम लोगों के लिए बहुत ही प्रेरक है। सुब्रमण्यम भारती जी ने तमिल भाषा में कहा था –

मुप्पदु कोडी मुगमुडैयाळ
उयिर् मोइम्बुर ओंद्दुडैयाळ
इवळ सेप्पु मोळी पधिनेट्टूडैयाळ
एनिर्सिन्दनैओंद्दुडैयाळ

(Muppadhu kodi mugamudayal, enil maipuram ondrudayal
Ival seppumozhi padhinetudayal, enil sindhanai ondrudayal)

और उस समय ये 19वीं शताब्दी के ये आखरी उत्तरार्ध की बात है। और उन्होंने कहा है भारत माता के 30 करोड़ चेहरे हैं, लेकिन शरीर एक है। यह 18 भाषाएँ बोलती हैं, लेकिन सोच एक है।

मेरे प्यारे देशवासियो,
कभी-कभी जीवन में, छोटी-छोटी चीज़ें भी हमें बहुत बड़ा सन्देश दे जाती हैं। अब देखिये न, media में ही scuba divers की एक story पढ़ रहा था। एक ऐसी कहानी है जो हर भारतवासी को प्रेरित करने वाली है। विशाखापत्तनम में गोताखोरी का प्रशिक्षण देने वाले scuba divers एक दिनmangamaripeta beach पर समुद्र से लौट रहे थे तो समुद्र में तैरती हुई कुछ प्लास्टिक की बोतलों और pouch से टकरा रहे थे। इसे साफ़ करते हुए उन्हें मामला बड़ा गंभीर लगा। हमारा समुद्र किस प्रकार से कचरे से भर दिया जा रहा है। पिछले कई दिनों से ये गोताखोर समुद्र में, तट के, करीब 100 मीटर दूर जाते है, गहरे पानी में गोता लगाते हैं और फिर वहाँ मौजूद कचरे को बाहर निकालते हैं। और मुझे बताया गया है कि 13 दिनों में ही, यानी 2 सप्ताह के भीतर-भीतर, करीब-करीब 4000 किलो से अधिक plastic waste उन्होंने समुद्र से निकाला है। इन scuba divers की छोटी-सी शुरुआत एक बड़े अभियान का रूप लेती जा रही है। इन्हें अब स्थानीय लोगों की भी मदद मिलने लगी है। आस-पास के मछुआरें भी उन्हें हर प्रकार की सहायता करने लगे है। जरा सोचिये, इस scuba diversसे प्रेरणा लेकर, अगर, हम भी, सिर्फ अपने आस-पास के इलाके को प्लास्टिक के कचरे से मुक्त करने का संकल्प कर लें तो फिर ‘प्लास्टिक मुक्त भारत’ पूरी दुनिया के लिए एक नई मिसाल पेश कर सकता है।

मेरे प्यारे देशवासियो,
दो दिन बाद 26 नवम्बर है। यह दिन पूरे देश के लिए बहुत ख़ास है। हमारे गणतंत्र के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि इस दिन को हम ‘संविधान दिवस’ के रूप में मनाते हैं। और इस बार का ‘संविधान दिवस’ अपने आप में विशेष है, क्योंकि, इस बार संविधान को अपनाने के 70 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इस बार इस अवसर पर पार्लियामेंट में विशेष आयोजन होगा और फिर साल भर पूरे देशभर में अलग-अलग कार्यक्रम होंगे। आइये, इस अवसर पर हम संविधान सभा के सभी सदस्यों को आदरपूर्वक नमन् करें, अपनी श्रद्धा अर्पित करें। भारत का संविधान ऐसा है जो प्रत्येक नागरिक के अधिकारों और सम्मान की रक्षा करता है और यह हमारे संविधान निर्माताओं की दूरदर्शिता की वजह से ही सुनिश्चित हो सका है। मैं कामना करता हूँ कि ‘संविधान दिवस’ हमारे संविधान के आदर्शों को कायम रखने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की हमारी प्रतिबद्धता को बल दे। आखिर ! यही सपना तो हमारे संविधान निर्माताओं ने देखा था|

मेरे प्यारे देशवासियो,
ठंड का मौसम शुरू हो रहा है, गुलाबी ठंडअब महसूस हो रही है। हिमालय के कुछ भाग बर्फ की चादर ओढ़ना शुरू किये हैं लेकिन ये मौसम ‘Fit India Moment’ का है। आप, आपका परिवार, आपके मित्रवार्तूरआपके साथी, मौका मत गंवाइये।‘Fit India Moment’ को आगे बढ़ाने के लिए मौसम का भरपूर फ़ायदा उठाइए।

बहुत-बहुत शुभकामनाएँ। बहुत-बहुत धन्यवाद।

 

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