बोले मनोज यादव, ‘योगी जी से मिलकर आ गया दोगुना जोश, जरूर फतह करूंगा माउंट एवरेस्‍ट’

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दिव्यांग पर्वतारोही अरुणिमा सिन्हा को समर्पित करना चाहते हैं मनोज अपनी ‘एवरेस्ट फतह’
पर्वतारोही मनोज यादव से ने की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलकात, मिला मदद का आश्वासन
माउन्ट एवरेस्ट फतह करने में लगेंगे 20 से 25 लाख, गरीब पान वाले का बेटा है मनोज
प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र से माउन्ट एवरेस्ट फतह करने वाला पहला पर्वतारोही बनना चाहते हैं मनोज

वाराणसी। युवा पर्वतारोही मनोज यादव ने आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उसके बाद वाराणसी पहुंचे उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या से मुलकात की और अपने ‘माउन्ट एवरेस्ट’ फतह के सपने को साकार करने में मदद मांगी है। मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री ने मनोज को मदद का आश्वासन दिया है। इस मुलकात के बाद जब Live VNS ने मनोज यादव से बात की और पूछा कि ये ‘एवरेस्ट फतह’ यदि आप करते हैं तो किसे समर्पित करना चाहेंगे। इसपर उन्होंने कहा कि वो फतह पद्मश्री दिव्यांग पर्वतारोही अरुणिमा सिन्हा को समर्पित करेंगे।

मनोज यादव के माउन्ट एवरेस्ट फतह करने के सपने को लेकर हमने उनसे विशेष बातचीत की, पेश है बातचीत के प्रमुख अंश

जनपद के चांदपुर के रहने वाले मनोज यादव ने जब लेह-लद्दाख में सबसे दुर्गम पहाड़ी स्टाक कांगड़ी ट्रेक (हिमालयन ट्रेक) की 20800 फीट की ऊंचाई को फतह किया था तभी से उनका सपना है कि वो ‘माउन्ट एवरेस्ट भी फतह करें, लेकिन इस सपने में रोड़ा बन रहा है पैसा, मनोज के पिता पान की दुकान चलाते हैं। मनोज ने बताया कि माउन्ट एवरेस्ट की चोटी फतह करने के लिए 10 से 20 लाख का खर्च आएगा। करीब 8 लाख नेपाल सरकार ले लेती हैं। किट, ट्रेवलिंग समेत बहुत खर्च है। भारतीय पर्वतारोहण संस्थान नई दिल्ली से दो महीने की ट्रेनिंग भी लेनी होती है।

मनोज ने वाराणसी के युवाओं को पर्वतारोहण में आगे आने और ट्रेनिंग कहाँ से लेने के सवाल पर कहा कि वाराणसी में कोई पहाड़ी नहीं है। उसके लिए आप को उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम या नार्थ सिक्किम, दार्जलिंग जाना होगा। वहां से आप को पर्वतारोहण की सफल पर्वतरोही से ट्रेनिंग दिलाई जाएगी, जिसके बाद आप पहले छोटी पहाड़ियां चढ़ेंगे फिर बड़ी पहाड़ियों के लिए आप को ग्रुप में रखा जायेगा।

पर्वतारोही मनोज यादव ने बताया कि जब हम एप्लाई करते हैं एक पहाड़ी पर चढ़ने के लिए तो हम अपना एक शेड्यूल बनाते हैं। 15 दिन का 20 दिन का उसमे हम पूर्वाभ्यास करते हैं और फिर उस मुख्य चढ़ाई के लिए आगे बढ़ते हैं। काशी के आने वाले पर्वतारोहियों के लिए उन्होंने बताया कि ट्रेनिंग और फिर फील्ड में आने के लिए लेनी होगी। मनोज ने बेसिक ट्रेनिंग क्लाइम्बिंग की मनाली में अटल बिहारी बाजपेयी इंस्टीट्यूट से और एडवांस ट्रेनिंग हिमालया माउंटेनिंग इंस्टीट्यूट दार्जलिंग से ली थी।

माउन्ट एवरेस्ट फतह करने का जज़्बा लिए मनोज यादव आज मुख्यमंत्री से मिले तो उसके बाद उनकी खुशियों का ठिकाना नहीं था। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद ऐसा लगता है कि अब मेरा और बनारस का सपना पूरा हो जाएगा।

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