नवरात्र के नौवे दिन पूजिये मां सिद्धिदात्री को, इन्ही की अनुकम्पा से बाबा भोलेनाथ कहलाये अर्धनारीश्वर

वाराणसी। शारदीय नवरात्र के अंतिम दिन माता सिद्धिदात्री की पूजा का विधान है। इन्ही माता की वजह से भगवान् भोले शंकर को अर्द्धनारीश्वर नाम मिला। मां सिद्धदात्री का मंदिर मैदागिन क्षेत्र के गोलघर इलाके के सिद्धदात्री गली में स्थित है। माँ सिद्धदात्री के नाम पर ही गली का नाम रखा गया है। सुबह से श्रद्धालु कतारबद्ध होकर मां की एक झलक पाने के लिए आतुर दिखे।

आम दिनों में माता के दर्शन का मंगलवार को विधान है लेकिन नवरात्र पर यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ होती है क्योंकि नव दुर्गा रूपों में यह अंतिम दुर्गा रूप है और भोले की नगरी में इसका विशेष महत्त्व इसलिए भी है क्योंकि भगवान् शिव को अर्द्धनारीश्वर इसी माता की वजह से कहा जाता है।

मां दुर्गा की नौवीं शक्ति के स्वरूप में माँ सिद्धिदात्री है । ये सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली हैं। मार्कण्डेय पुराण के अनुसार अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वाशित्व-ये आठ सिद्धियां होती हैं। देवी पुराण के अनुसार भगवान शिव ने सिद्धिदात्री की कृपा से ही इन सिद्धियों को प्राप्त किया था। उनकी अनुकंपा से ही भगवान शिव का आधा शरीर देवी का हुआ था। इसी कारण वह लोक में ‘अर्धनारीश्वर’नाम से प्रसिद्ध हुए।

मान्यता है कि जिस प्रकार इस देवी की कृपा से भगवान शिव को आठ सिद्धियों की प्राप्ति हुई ठीक उसी तरह इनकी उपासना करने से बुद्धि और विवेक की प्राप्ति होती है। माता को गुड़हल का फूल विशेष पसंद है।

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