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विश्वनाथ धाम में बनेगा वैदिक केंद्र
वैदिक केंद्र में पौरोहित प्रशिक्षण केंद्र खोला जाएगा
शास्त्री को कर्मकांड करने की शिक्षा, कंप्यूटर शिक्षा और अंग्रेजी की शिक्षा का कराया जाएगा कोर्स

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वाराणसी। श्री काशी विश्वनाथ धाम के लिए खरीदे गए भवनों के ध्वस्ती करण के बाद निकले मंदिरों और विग्रह को संयोजित करने को लेकर विद्वत परिषद के साथ चर्चा हुई। रविवार को कमिश्नरी सभागार में काशी विद्वत परिषद् की अहम् बैठक हुई। इस बैठक में मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी, विद्वत परिषद् के सदस्यों ने पर्यटन एवं धर्मार्थ कार्य मंत्री डॉ नीलकंठ तिवारी के समक्ष कई सारे फैसले लिए और कई समस्यायों के सम्बन्ध में चर्चा की।

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इस चर्चा में मंदिर प्रशासन ने विद्त परिषद को बताया गया कि भवनों को तोड़ने के बाद 43 से अधिक मंदिर निकले हैं। इसके अलावा कुछ विग्रह भी मिले हैं, जिनको शास्त्र सम्मत विधि से एक स्थान पर संयोजित कर उसका पूजन किया जा सके। इन मंदिरों की जानकारी के बाद विद्वत परिषद के सदस्यों ने कहा कि आज सारा भ्रम दूर हो गया। यह तो बहुत ही हर्ष की बात है अब तक हम लोगों को मंदिरों को तोड़ने और विग्रह के हटाने की सूचना मिल रही थी, लेकिन मंदिर प्रशासन द्वारा ऐसा नहीं किया गया है जो कि सराहनीय है और इतने प्राचीन मंदिरों के मिलने के बाद हम लोगों की इच्छा है कि हम लोग श्री काशी विश्वनाथ धाम में मिले मंदिरों का निरीक्षण करें।

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उन्होंने बताया कि विद्वत परिषद् निरीक्षण के बाद इनमें से कितने ऐसे विग्रह हैं जिनको शास्त्रीय विधि से संयोजित किया जा सके इसकी रूप रेखा तय करेंगे।

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विद्वानों ने कहा कि किसी भी स्थान का बहुत ही बड़ा महत्व होता है इसलिए सभी विग्रह को शास्त्रोक्त और पौराणिक विधि से संयोजित कर सही किया जाएगा। इस दौरान विद्वत परिषद ने मंदिर प्रशासन से मंदिर में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए साक्षी विनायक ढूढ़ीराज गणेश वाले मार्ग से दर्शन पूजन कराने और काशी खंड के वे सभी मंदिर जो काशी में हैं उन सभी के जीर्णोद्धार कराने की मांग की गई।

इस पर मंत्री डॉ नीलकंठ तिवारी ने कहा कि धर्मार्थ कार्य विभाग एक पावन पथ बनवाया है। इस पावन पथ में उन सभी मंदिरों को लिया गया है, जो काशी खंडों के है। विद्त परिषद के सदस्यों ने बन रहे श्री काशी विश्वनाथ धाम में शास्त्र और शास्त्रार्थ केंद्र खोलने की मांग की। इस पर धर्मार्थ कार्य मंत्री ने कहा कि विश्वनाथ धाम के मॉडल में पहले से ही एक वैदिक केंद्र बनाने की तैयारी है। इसमें पौरोहित प्रशिक्षण केंद्र भी खोला जाएगा, जिसमें इस केंद्र में सभी शास्त्री को कर्मकांड करने की शिक्षा, कंप्यूटर शिक्षा और अंग्रेजी की शिक्षा का तीन-तीन माह का कोर्स कराया जाएगा। साथ ही शास्त्र पुराण की सभी पुस्तकें उपलब्ध रहेगी। शास्त्रार्थ के लिए एक केंद्र भी बनाया जा रहा है। इस पर विद्त परिषद ने धर्मार्थ कार्य विभाग द्वारा बनवाए गए कॉरिडोर के मॉडल की सराहना भी की।

बैठक में वशिष्ठ तिवारी पूर्व अध्यक्ष दर्शन विभाग संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, प्रोफेसर राम चंद्र पांडे उपाध्यक्ष काशी विद्वत परिषद, डॉ सुखदेव त्रिपाठी संगठन मंत्री काशी विद्त परिषद, प्रोफेसर राम किशोर त्रिपाठी उपाध्यक्ष काशी विद्त परिषद, डॉक्टर दिनेश कुमार गर्ग प्रवक्ता श्री काशी विद्त परिषद, डॉ राम नारायण द्विवेदी मंत्री श्री काशी विद्वत परिषद, कमिश्नर दीपक अग्रवाल, श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक विशाल सिंह, डिप्टी कलेक्टर विनोद सिंह, अपर मुख्य कार्यपालक निखिलेश मिश्रा, तहसीलदार विनय राय उपस्थित रहे।

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