पुरोहि‍तों का क्रोध देख बैकफुट पर सरकार, मंत्री बोले घाट के पंडि‍तों को नहीं देना होगा कोई टैक्‍स

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वाराणसी। नगर नि‍गम द्वारा काशी के घाटों पर धार्मि‍क अनुष्‍ठान आदि‍ करने वाले पंडों और पुरोहि‍तों से टैक्‍स वसूलने की अधि‍सूचना जारी होने के बाद इसका जबरदस्‍त वि‍रोध शुरू हो गया है। घाट के पंडि‍तों, पुरोहि‍तों और धर्माचार्यों ने इस टैक्‍स की तुलना मुगलकालीन जजि‍या कर से कर दी है। इसके बाद प्रदेश सरकार में धर्मार्थ कार्य राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ नीलकंठ ति‍वारी ने आधि‍कारि‍क बयान जारी करते हुए कहा है कि‍ इससे गंगा के घाटों पर परंपरागत तरीके से पूजा पाठ, धार्मिक कार्य एवं कर्मकांड कराने वाले पंडा समाज को चिंता करने की कोई बात नहीं है, उनसे कोई भी शुल्क नहीं लिया जाएगा।

उन्‍होंने स्‍पष्‍ट कि‍या है कि‍ गंगा के घाटों पर परंपरागत तरीके से पूजा पाठ, धार्मिक कार्य एवं कर्मकांड कराने वाले पंडा समाज के लोग अपनी इच्छानुसार इच्छुक हो तो रजिस्ट्रेशन कराएं, अन्यथा इसके लिए भी कोई बाध्यता नहीं होगी। मंत्री ने नगर निगम की घोषणा के बाद पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए कमिश्नर एवं नगर आयुक्त से बात की है।

उत्तर प्रदेश के पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉक्टर नीलकंठ तिवारी ने कहा है कि गंगा के घाटों पर परंपरागत तरीके से पूजा पाठ, धार्मिक कार्य एवं कर्मकांड कराने वाले पंडा समाज को चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है, उनसे कोई भी शुल्क नहीं लिया जाएगा।

उन्होंने विशेष रूप से जोर देते हुए कहा कि गंगा के घाटों पर परंपरागत तरीके से पूजा पाठ, धार्मिक कार्य एवं कर्मकांड कराने वाले पंडा लोग अपनी इच्छानुसार इच्छुक हो तो रजिस्ट्रेशन कराएं, अन्यथा इसके लिए भी कोई बाध्यता नहीं होगी।

गौरतलब है कि गंगा घाटों पर गंगा आरती के लिए आयोजकों से सालाना तथा गंगा घाटों पर परंपरागत तरीके से पूजा पाठ कराने, धार्मिक कार्य एवं कर्मकांड कराने वाले पंडो से नगर निगम द्वारा शुल्क लिए जाने की घोषणा की गयी थी। जिसे संज्ञान देते हुए उत्तर प्रदेश के पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉक्टर नीलकंठ तिवारी ने कमिश्नर दीपक अग्रवाल एवं नगर आयुक्त गौरांग राठी से फोन पर वार्ता कर इसे अव्यवहारिक बताते हुए इस पर तत्काल रोक लगाए जाने हेतु कहां है।

मंत्री डॉक्टर नीलकंठ तिवारी ने कहां की काशी एक धार्मिक नगरी है, पूरी दुनिया से लोग यहां पर आकर गंगा के घाटों पर पूजन पाठ एवं धार्मिक कार्य के साथ-साथ कर्मकांड यहां के विद्वान ब्राह्मणों के द्वारा कराते हैं। ऐसी स्थिति में पंडो से शुल्क लिया जाना कतई व्यवहारिक नही है।