मदर्स डे स्पेशल : बनारस की ये प्रशासनिक अधिकारी ड्यूटी के साथ निभा रही ममता का फ़र्ज़

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वाराणसी। ‘अक्सर अभीष रोता है तो उनके पिता फोन कर देते हैं, कि अभीष रो रहा है चुप नहीं हो रहा है। इस बात को सुनने के बाद दिल बहुत कचोटता है, लेकिन एक गृहणी के साथ ही साथ मै एक प्रशासनिक ओहदे पर हूँ इसलिए कर्तव्य को निभाकर ही बच्चे के पास पहुँचती हूँ।’ ये कहना है वाराणसी जनपद में एसीएम फोर्थ के पद पर तैनात महिला अधिकारी शुभांगी शुक्ला का।

ममता की छांव में अपने बच्चे को लेकर कर्म भूमि में जाने वाली ये पीसीएस अधिकारी इस समय वाराणसी में चर्चा का विषय बनी हुई है। इसके अलावा महिलाओं के लिए एक मिसाल कायम कर रही हैं।

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एक महिला होते हुए भी दक्ष प्रशासनिक अधिकारी के तौर पर अच्छे से प्रशासनिक सेवा देने का हौसला और एक पत्नी तथा 20 माह के बच्चे की मां होने का गौरव प्राप्त इन तमाम प्रकार की अति आवश्यक जिम्मेदारियों को बखूबी निर्वहन करते हुए समाज को एक सुंदर संदेश देने वाली एसीएम फोर्थ पीसीएस अधिकारी शुभांगी शुक्ला इस समय वाराणसी में अपनी जिम्मेदारियां बखूबी निभा रही हैं।

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इस मदर्स डे हमने 2016 बैच की पीसीएस अधिकारी शुभांगी शुक्ला से बात की। शुभांगी शुक्ला ने बताया कि उनका जन्म बांदा में हुआ है और पढ़ाई झाँसी और प्रयागराज में। उसके बाद सिविल सर्विस में जाने की लालसा बढ़ी तो तैयारी की और प्रदेश सेवा के लिए सिविल सर्विस का एग्जाम पास किया और पहली अंडर ट्रेनी पोस्टिंग मुझे प्रयागराज में ही मिली। उसके बाद पहली पोस्टिंग बनारस में हुई।

शुभांगी शुक्ला की शादी मिर्जापुर के रहने वाले अभिषेक द्विवेदी से हुई है। उन्होंने बताया कि हम दोनों साथ पढ़ते थे और सिविल की तैयारी भी साथ की उनका नहीं हुआ पर मेरा हो गया। अभी वो तैयारी कर रहे हैं। शुभांगी शुक्ला का एक 20 माह का बच्चा है जो अक्सर मां की गोद में लॉकडाउन के पहले तक ड्यूटी पर भी देखा गया है। शुभांगी शुक्ला कड़े तेवर में प्रशासनिक नियम तोड़ने वालों को समझाती दिखाई देती हैं तो रो रहे बच्चे को फालोवर की गोद से लेकर पुचकारती भी दिखाई देती हैं।

शुभांगी शुक्ला ने अपने 20 माह के बच्चे अभीष के बारे में बताया कि बहुत ही शरारती है वो, ज़्यादातर अपने पिता के पास ही रहता है। हमने जब उनसे बात की तो वो उसे खाना खिला रही थी। उन्होंने बताया कि सुबह 5 बजे से डीएम साहब के साथ सम्पूर्णानदं संस्कृत विश्वविद्यालय में लोगों को बिहार भेजने की ड्यूटी में थी अभी आयी हूँ घर तो खाना खिला रही इन्हे फिर सुलाऊँगी।

शुभांगी शुक्ला ने बताया कि अभीष अपने पिता के पास ज़्यादा समय बिताते हैं पर जब ज़्यादा रोने लगते हैं तो मुझे फोन होता है और यदि मै ड्यूटी में रहती हूं तो दिल को तकलीफ होती है पर कर्तव्य पहले है ममता बाद में। शुभांगी शुक्ला ने बताया कि प्रशासनिक सेवा से बढ़कर और कोई दूसरा धर्म नजर नहीं आता बावजूद इसके जो समय बचता है वह अपने 20 माह के नन्हे से बालक अभीष  द्विवेदी के लिए निकालती हैं साथ ही घर में भी अनेक प्रकार के कार्य संपादित करती हैं।

एसीएम फोर्थ शुभांगी शुक्ला ने बड़ी-बड़ी छापेमारी में अपने बच्चे को साथ लेकर ड्यूटी को अंजाम दिया पर उनके माथे पर ज़रा सी शिकन नहीं आयी। इस मदर्स डे टीम Live VNS उन्हें दिल से सलाम करती है।