नगर निगम ने लगाया है मुग़ल कालीन जजिया कर, संत समाज करेगा विरोध : स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती

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वाराणसी। नगर निगम द्वारा नदी किनारे रख रखाव संरक्षण एवं नियंत्रण उपविधि 2020 के अंतर्गत गंगा तट पर सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक अनुष्ठान पर कर लगा दिया है। इन कार्यों के लिए अब नगर निगम को टैक्स देना होगा। इस घोषणा के बाद जहां तीर्थ पुरोहितों ने इसका विरोध किया वहीं अखिल भारतीय संत समिति के स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने भी कड़े लफ़्ज़ों में इस टैक्स की आलोचना करते हुए इसे नकारा है।

स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने इसे मुग़ल कालीन जजिया कर बताया है। साथ अधिकारियों द्वारा प्रदेश की योगी और केंद्र की मोदी सरकार को आपराधिक षणयंत्र कर बदनाम करने का आरोप भी लगाया।

स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि मुग़ल काल से लेकर अंग्रेज़ों तक उसके बाद स्वतंत्र भारत की सरकारों में भी आज तक किसी की यह हिम्मत नहीं हुई कि बाबा विश्वनाथ, मां गंगा और काशी के घाटों पर किसी प्रकार का टैक्स ठोंक दिया जाए और वो भी तीर्थ पुरोहितों पर, ये तो मुग़ल कालीन जजिया कर की याद दिलाता है।

स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि मुझे लगता है कि काशी में नियुक्त प्रशासनिक अधिकारी, विशेषकर नगर निगम के अंदर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र के अंदर किसी आपराधिक षणयंत्र के तहत नियुक्त हैं और षणयंत्र के तहत पूरी दुनिया में हिंदुत्ववादी सरकार की, योगी और मोदी की छवि खराब करने के लिए इस प्रकार के टैक्स लगाने की आज्ञा दी है।

स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने आक्रोशित होते हुए कहा कि अखिल भारतीय संत समिति काशी में धर्म के आधार पर किसी भी प्रकार के टैक्स को बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि क्या काशी के घाटों पर ईसाई और मुसलमान उत्सव करने आते हैं। उन्होंने प्रश्न पूछते हुए कहा कि क्या हिन्दू समाज ने आप को वोट देकर के सत्ता इसलिए सौंपी है कि आप के ये निरक्षर भट्टाचार्य जो बैठे हैं, जो ब्यूरोक्रेट्स हैं वो हमपर टैक्स लगाएं और हम सर झुकाकर बर्दाश्त करते रहें।

स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने चेतावनी देते हुए कहा कि किसी भी सूरत में धार्मिक आधार पर इस जजिया कर से काशी के घाटों की स्वतंत्रता को छीना जा रहा है जो हमें बर्दाश्त नहीं है। अखिल भारतीय संत समिति इस प्रतिकार के लिए डट कर मुकाबला करेगी।