BHU : लोकगीत और लोक कथाओं के ज़रिये संगीतकारों ने दिया कोरोना संक्रमण और वृक्षारोपण का संदेश

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वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय राष्ट्रीय सेवा योजना के तत्वावधान में “आत्मनिर्भर भारत जागे युवा जागे भारत” कार्यक्रम की श्रृंखला में एक भारत श्रेष्ठ भारत अभियान के तहत आठवें ऑनलाइन राष्ट्रीय युवा संगीत सम्मेलन में युवा कलाकारों के लोकगीतों के माध्यम से कोरोना जागरूकता और वृक्षारोपण के संदेशों के प्रचार प्रसार के संकल्प के साथ संपन्न हुआ।

राष्ट्रीय युवा संगीत सम्मेलन का शुभारंभ इंदौर की युवा कलाकार अनुभा कलाकोतर के शास्त्रीय गायन से हुआ। आरंभ में उन्होंने राग मुल्तानी में गायन की प्रस्तुति की। इसके उपरांत उन्होंने ‘मन लागो मेरो यार फकीरी में’ भजन की प्रस्तुति की। अपने कार्यक्रम का समापन उन्होंने ठुमरी गायन से किया। कार्यक्रम में दूसरी प्रस्तुति में तेजपुर केंद्रीय विश्वविद्यालय की युवा कलाकार डॉक्टर अनन्या बोन ज्योत्सना ने आसाम के लोक जन जीवन पर आधारित लोकगीतों की प्रस्तुति की।

जीएफ कॉलेज शाहजहांपुर के यशस्वी रजनी ने अपने बांसुरी वादन से श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया। उन्होंने कारगिल में शहीद हुए सैनिकों के लिए वंदे मातरम धुन की प्रस्तुति भी की। इस अवसर पर राजीव गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय ईटानगर के छात्र रूंका छेडा ने अरुणाचल प्रदेश के विविध जनजातियों द्वारा गाए जाने वाले लोकगीत संस्कार गीत और पर्यावरण गीत आदि की प्रस्तुति की।

राष्ट्रीय युवा संगीत सम्मेलन का उद्घाटन भारत सरकार युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के राष्ट्रीय सेवा योजना के राष्ट्रीय कार्यक्रम सलाहकार डॉ सतीश कुमार साहनी ने किया। अपने उद्घाटन भाषण में उन्होंने कहा कि युवाओं को भारतीय संस्कृति से जोड़ने के लिए एक राज्य से दूसरे राज्य के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान के माध्यम से प्रारंभ यह कार्यक्रम एक समृद्ध और अखंड भारत के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने कहा कि एक भारत श्रेष्ठ भारत कार्यक्रम से युवाओं में राष्ट्रीय गौरव की चेतना प्रस्फुटित हो रही है।

विशिष्ट अतिथि काशी हिंदू विश्वविद्यालय महिला महाविद्यालय की पूर्व प्राचार्या डॉ चंद्रकला त्रिपाठी ने कहा कि भारत में लोकगीतों और लोक साहित्य की एक समृद्ध परंपरा है, जिससे जुड़कर युवा अपनी संस्कृति अपनी सभ्यता और अपने पूर्वजों के व्यवहारिक ज्ञान को जान सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारत के प्रत्येक प्रदेश में लोकगीतों और लोक कथाओं में प्रकृति, वृक्ष, नदियां, पहाड़ और लोकजीवन प्रमुखता के साथ वर्णित हुआ है।

राष्ट्रीय युवा संगीत सम्मेलन समारोह की अध्यक्षता अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के प्रख्यात शिक्षाविद साहित्यकार डॉ जॉनी फास्टर ने की। अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने कहा कि दुनिया भर की समस्याओं का समाधान भारतीय संगीत में समाहित है। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि जब भी वे तनावग्रस्त हो और उन्हें किसी समस्या का समाधान दिखाई ना दे तो वह शास्त्रीय संगीत सुनें या फिर वे लोक कथाओं को पढ़ें उन्हें अपनी समस्या का समाधान अवश्य मिलेगा।

राष्ट्रीय युवा संगीत सम्मेलन में काशी हिंदू विश्वविद्यालय के एक भारत श्रेष्ठ भारत कार्यक्रम के नोडल अधिकारी प्रोफेसर वशिष्ठ नारायण त्रिपाठी, पटना विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना की अधिकारी डॉ पूनम सिंह, झारखंड विश्वविद्यालय से डॉ रंजीत कुमार सिंह, कार्यक्रम अधिकारी डॉ एकता चौहान, डॉ सच्चिदानंद त्रिपाठी, डॉ दुर्लभ सोनोवाल, डॉ रश्मि सक्सैना सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने सहभागिता की।