वाराणसी आने वाले हैं प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी, जंगमबाड़ी मठ में वीरशैव महाकुंभ में होंगे शामिल

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वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में आयोजित होने जा रहे एक बड़े धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होने फरवरी महीने में यहां आने वाले हैं। पीएम मोदी यहां वाराणसी के सबसे पुराने मठों में से एक जंगमबाड़ी मठ में आयोजित होने जा रहे वीरशैव महाकुंभ में शामिल होंगे।

महाशिवरात्रि से पहले होने वाले इस आयोजन के बारे में जंगमबाड़ी मठ के डॉ चंद्रशेखर शिवाचार्य महाराज ने बताया कि प्रधानमंत्री महाकुम्भ में शामिल होने के लिए 16 फरवरी को मठ में पहुंचेंगे। जंगमबाड़ी मठ के ज्ञानसिंहासन पीठ के सौ वर्ष पूरे होने पर 38 दिवसीय कार्यक्रम की शुरआत मकर संक्रांति पर्व से होगी और यह उत्सव महाशिवरात्रि के दिन 22 फरवरी को समाप्त होगा।

इस सम्बन्ध में डॉ चंद्रशेखर शिवाचार्य महाराज ने बताया कि 38 दिवसीय वीरशैव महाकुम्भ का आयोजन मकर संक्रांति के अवसर पर शुरू होने जा रहा है। ज्ञानसिंहासन पीठ के सौ वर्ष पूरे होने पर यह आयोजन किया जा रहा है। इसमें देश विदेश से आये शैव सम्प्रदाय के लोगों का अच्‍छा खासा जमावड़ा होगा। जंगमबाड़ी मठ में मकर संक्रांति से शुरू हो कर महाशिवरात्रि तक चलने वाले इस कार्यक्रम में देश के अधिकांश राज्यो से आये शैव सम्प्रदायों के अधिवेशन होंगे, जिसमे वीरशैव समाज की दशा और दिशा को प्रस्तुत किया जाएगा।

डॉ चंद्रशेखर शिवाचार्य महाराज ने बताया कि इस आयोजन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सहित तेलंगाना के कई मंत्री शामिल होंगे। आयोजन के दौरान वीरशैव महाकुम्भ में शामिल होने 16 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी पहुंचेंगे ।

डॉ चंद्रशेखर शिवाचार्य महाराज ने बताया कि इस समारोह में कर्नाटक, आंध्रा, तेलंगाना, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ आदि प्रांतों के वीरशैव सम्प्रदाय के उपाधिवेशन भी होंगे। इन अधिवेशनों में अखिल भारतीय वीरशैव समाज, काशी के ज्ञानपीठ के समक्ष अनेक प्रकार के कार्यक्रमों को एवं अखिल भारतीय स्तर पर वीरशैव समाज की दशा और दिशा प्रस्तुत करेगा।

बता दें कि काशी के प्राचीनतम मठों में जंगमबाड़ी मठ का उल्लेखनीय स्‍थान है। तीन हज़ार वर्ष पुरातन यह पीठ काशी के मूल धरोहरों में प्रथम गणनीय है। इसके अलावा किम्बहुना वीरशैव सम्प्रदाय के पंचपीठों में भी इसका महत्व है। यह केवल सम्प्रदाय रक्षा के लिए ही नहीं अपितु ज्ञान सिंहासन पीठ भी है।

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