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वाराणसी। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग द्वारा आयोजित तीन दिवसीय अन्तरराष्‍ट्रीय वेबिनार एपेडमिक, सोसायटी एंड एनवायर्नमेन्ट इन इंडिया: ए हिस्टॉरिकल ओवरव्यू के दूसरे दिन दो मुख्य सत्रों के अतिरिक्त 10 तकनीकी सत्र आयोजित हुए। इनमें 150 प्रतिभागियों ने अपने शोध पत्र पढ़े। प्रथम मुख्य सत्र में तीन वक्ताओं के व्याख्यान हुए।

पहले वक़्ता वरिष्ठ इतिहासकार प्रोफ़ेसर हितेंद्र पटेल ने समाज और महामारी के इतिहास के दार्शनिक पक्षों पर अपनी बात रखी। दूसरे वक़्ता वरिष्ठ पत्रकार विचित्र मणि सिंह राठौर ने कोरोना से प्रभावित लोगों और मीडिया के सम्ब्न्धों पर चर्चा की और भारतीय मीडिया द्वारा कोरोना को धर्म से जोड़ने पर मीडिया की भूमिका की आलोचना की और कहा की यह कोड़ा जो मैं चला रहा हूँ वो मेरी पीठ पर भी चल रहा है।

इसी सत्र में बोलते हुए कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय में पोस्ट डाक्टरोंल फ़ेलो डाक्टर अमित यादव ने मानव जनित व्यवहार और रोग जनित नशे पर चर्चा करते हुए कहा कि सिर्फ़ उत्तर प्रदेश में लगभग 4 करोड़ लोग तम्बाकू का प्रयोग करते हैं। यदि ये नियंत्रित नहीं हुए तो इनके थूकने की प्रवृत्ति द्वारा कोरोना महामारी बन सकती है।

दूसरे मुख्य सत्र में मशहूर विज्ञान इतिहास लेखक प्रोफेसर जगदीश नारायण सिन्हा ने गांधीवाद उपनिवेशवाद और प्रकृति के साथ यूरोपियन वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर गम्भीर चर्चा कि गई। इसी सत्र में बोलते हुए मगध विश्वविद्यालय के इतिहासकार प्रोफेसर पीयूष कमल सिन्हा ने आदिवासी समुदाय पर्यावरण और आदिवासी समाज में व्याप्त सामाजिक संसतरीकरण के मुद्धे पर कहा की मानव समाज को पर्यावरण के नज़दीक और संरक्षण भाव को अपनाना चाहिए।

इस सत्र को डाक्टर गोपाल जी सिंह और प्रोफ़ेसर गंगाथरन द्वारा भी सम्बोधित किया गया।

इस कार्यक्रम का संयोजन और संचालन इतिहास विभाग की एसोसियेट प्रोफ़ेसर डाक्टर अनुराधा सिंह द्वारा किया गया। विभागाध्यक्ष प्रोफ़ेसर केशव मिश्र और प्रोफ़ेसर घनश्याम, प्रोफ़ेसर मालविका रंजन, डाक्टर सत्यपाल यादव,डाक्टर अशोक सोनकर व विभाग के अन्य सभी शिक्षक आनलाइन उपस्थित रहें।

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