घरेलू हिंसा के कारकों को एक स्तर पर समझ पाना मुश्किल है : हर्षिता पांडेय

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वाराणसी। वसंत महिला महाविद्यालय राज घाट के छात्र सलाहकार एवं शिकायत प्रकोष्ठ द्वारा दो दिवसीय “घरेलू हिंसा और कोविड महामारी के दौरान सुरक्षा के उपाय” विषयक ऑनलाइन राष्ट्रीय सिम्पोजियम का सफल आयोजन हुआ। ऑनलाइन सिम्पोजियम के द्वितीय दिवस के कार्यक्रम का हर्षिता पांडेय सलाहकार व् सदस्य, राष्ट्रीय महिला आयोग ने महिलाओं के अधिकार पर अपना उदबोधन देते हुए कहा कि हम एक बहुसांस्कृतिक देश में रहते हैं, इसलिए हमारी भाषा,जीवन शैली अलग होने के कारण एक जैसी समस्या की पहचान मुश्किल होती है, अतएव घरेलू हिंसा के कारकों को एक स्तर पर समझ पाना मुश्किल है।

दूसरी वक्ता के रूप में कल्याणी शरण,अध्यक्ष, राष्ट्रीय महिला आयोग,झारखण्ड ने घरेलु हिंसा और सुरक्षा के उपाय विषय पर बोलते हुए कहा कि घरेलू हिंसा पर रोक तभी लग सकता जब महिलायें सशक्त,शिक्षित और जागरूक हों।

डीएवी पीजी कॉलेज के स्त्री विमर्श एक की संयोजक डॉ स्वाति सुचरिता नंदा ने कोविड 19 तथा महिलाओं की स्थिति विषय पर बोलते हुए कहा कि आर्थिक विभाजन का आधार एक स्तर पर नहीं होने के कारण महिलाएं पुरुषों के व्यवहार से प्रभावित होती हैं इसलिए घरेलू हिंसा को रोक सकने में हम सफल नहीं हो पाते।महिलाओं कीआर्थिक भागीदारी बढ़ानी होगी।

अंतिम वक्ता के रूप में आर्य महिला पी जी कॉलेज के स्त्री विमर्श प्रकोष्ठ की संयोजक डॉ वंदना चौबे ने कोविड 19 के दौरान घरेलू हिंसा और स्त्री विषयक चिंतन के बारे में कहा कि जब तक मानसिकता में बदलाव नहीं होगा हम इसे रोकने में असफल रहेंगे।पितृसत्तात्मक समाज की चिंतन धरा को बदलना होगा तभी घरेलू हिंसा और असामान्य व्यवहार पर काबू पाया जा सकता है।

विभिन्न सत्रों का सञ्चालन और अतिथि परिचय डॉ रवींद्र नाथ मोहंता, डॉ प्रीति सिंह, डॉ योगिता बेरी, डॉ संजय वर्मा ने विभिन्न सत्रों का सञ्चालन किया।वेबिनार के रिपोर्ट को डॉ आशा पांडेय ने पढ़ा। सभी अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन डॉ प्रीति सिंह ने किया।

सेल की समन्वयक डॉ आम्रपाली त्रिवेदी ने कहा कि कोविड महामारी के कारण हिंसा के कई परिप्रेक्ष्य उभरे हैं, जिनमे से घरेलू हिंसा भी एक है।महिलाओं ने कोरोना की जंग में अपने कार्यस्थल के साथ घर को भी बचाया है लेकिन घरेलू हिंसा के कारणों से हम उन्हें बचा सकने में असमर्थ रहे हैं । आवश्यकता है उन्हें जागरूक करने की और कठोर कानून बनाने की।