छठ महापर्व : खरना के साथ शुरू हुआ छठी मइया का निर्जला व्रत

फाइल फोटो

वाराणसी। चार दिवसीय छठ महापर्व की शुरुआत गुरुवार से नहाय खाय से हो चुकी है। आज व्रत का दूसरा दिन है, जिसे खरना कहते है। इस बार के छठ पूजा में खरना के दिन विशेष संयोग बन रहा है। रवि संयोग पड़ने के कारण इस बार का विशेष फलदायी साबित होगा। रवि संयोग नहाय खाय से लेकर दो नवंबर तक बना रहेगा। इसी शुभ योग में सूर्य भगवान को शाम का अर्घ्य दिया जाएगा।

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खरना का महत्त्व 
महापर्व छठ में खरना का विशिष्ट महत्त्व होता है। खरना का मतलब होता है शुद्धिकरण। खरना की शुरुआत नहाय खाय के बाद दूसरे दिनहोती है, जिसमे व्रती महिलाएं अपने कुलदेवता और छठी मैया की पूजा करके उनको गुड़ से बनी खीर का प्रसाद चढाती हैं। खरना का प्रसाद ग्रहण करने के बाद से महिलाएं 36 घंटे निराजल व्रत रखती है, जो उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर समाप्त होता है।

धार्मिक महत्त्व 
खरना का प्रसाद बनाने के लिए मिट्टी के नए चूल्हे का ही प्रयोग किया जाता है। प्रसाद बनाने के लिए आम के लकड़ी का उपयोग शुभ माना जाता है। व्रती महिलाएं खरना का प्रसाद खाने के बाद उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद ही कुछ ग्रहण करती है। खरना का प्रसाद किसी को बांटा नहीं जाता।लोग स्वयं घरों में जाकर प्रसाद मांगकर ग्रहण करते है।

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