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वाराणसी। कोरोना वायरस को मात देने के लिए घर से बाहर निकलना पूरी तरह से मना है, ऐसे में लोग घर में मन लगाने की तरह-तरह की तरकीब आजमा रहे हैं । इस महत्वपूर्ण समय को घर-परिवार के साथ बिताने के साथ ही सगे-सम्बन्धियों और इष्ट मित्रों से फोन या संदेशों के आदान-प्रदान के जरिये संपर्क में रहना भी एक अच्छा तरीका साबित हो सकता है । इससे जहां एक-दूसरे का हालचाल जान सकेंगे वही संबंधों में एक मिठास का भाव भी देखने को मिलेगा।

नजरिया बदलकर करें तनाव को दूर 
एसएसपीजी मंडलीय चिकित्सालय के मनोचिकित्सक डॉ रविंद्र कुशवाहा का कहना है कि लॉक डाउन में लोगों की आमदनी व आजादी कम हो गयी है और उनके पास फ़ालतू वक्त और असुरक्षा की भावना बढ़ गयी है लिहाजा तनाव बढ़ना लाजमी है। हम इस तनाव को नजरिया बदलकर दूर कर सकते हैं। लॉक डाउन कोरोना का फैलाव रोकने के लिए जरूरी है। दूसरा, आप घर में रहकर देश समाज के लिए योगदान दे रहे हैं । तीसरा, यह अनंत काल की समस्या नहीं है। यह जल्द ही ख़त्म हो जाएगा। लॉक डाउन के वक्त को छुट्टी की तरह इस्तेमाल करें। पति-पत्नी एक दूसरे को वक्त दें। बच्चों के साथ खेलें। समय बचे तो भविष्य की प्लानिंग करें।

दोस्तों से करें बात 
इसके साथ ही दौड़ती-भागती जिन्दगी में एकाएक आये ठहराव का असर किसी के भी आचार-व्यवहार में साफ़ देखा जा सकता है । ऐसे ही समय में लोगों के धैर्य की असली परीक्षा होती है। इस समय अपनी बदली दिनचर्या में कुछ समय अपने शुभचिंतकों से फोन के जरिये जुड़कर भी पुरानी यादों को ताजा करने के साथ ही सम्बन्धों को फिर से एक ताजगी दे सकते हैं। इसके लिए भी सावधानी बरतने की जरूरत है कि एक दूसरे से फोन पर भी बात करते समय सिर्फ और सिर्फ कोरोना वायरस के खतरों के बारे में वार्तालाप न करें। अखबार-टीवी और आस-पड़ोस में लोग सिर्फ कोरोना के बारे में सुन-सुन कर ऊब चुके हैं, इसलिए उन्हें कुछ समय के लिए इससे हटकर बात करने की जरूरत महसूस होती है।

न किसी के घर जाएँ और न किसी को घर बुलाए 
डॉ रविन्द्र कुशवाहा ने कहा कि कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव का मूल मन्त्र जरूरी सावधानी बरतने के साथ ही सोशल डिस्टेनशिंग (सामाजिक दूरी) को बरक़रार रखने में ही है। इसके लिए जरूरी है कि जब तक वायरस का खतरा बरकरार है तब तक न तो किसी के घर जाएँ और न ही किसी को अपने घर पर बुलाएं। अगर आस-पड़ोस में किसी से बात करना बहुत ही जरूरी हो तो एक मीटर की दूरी बनाए रखें। साबुन-पानी से अच्छी तरह से हाथ धोएं।

उन्होने कहा कि कोरोना वायरस का प्रकोप लोगों के लिए तनावपूर्ण हो सकता है। एक बीमारी के बारे में डर और चिंता भारी हो सकती है और वयस्कों और बच्चों में मजबूत भावनाओं का कारण बन सकती है। तनाव के साथ मुकाबला करने से आप, उन लोगों के बारे में परवाह करते हैं जिन्हें आप और आपका समुदाय मजबूत बनाते हैं। कुछ चीजें जो आप खुद का समर्थन करने के लिए कर सकते हैं जो इस प्रकार हैं :-

सोशल मीडिया सहित समाचारों को देखने, पढ़ने या समाचार सुनने से ब्रेक लगाना जरूरी है। बार-बार महामारी के बारे में सुनकर आप परेशान हो सकते हैं।

अपने शरीर का ख्याल रखें। गहरी साँस लें, थोड़ा एक्सरसाइज करें,  ध्यान या योग/ मेडिटेशन करें।

स्वस्थ, संतुलित भोजन खाने की कोशिश करें, घर पर नियमित व्यायाम करें, भरपूर नींद लें और शराब और नशीले पदार्थों से बचें। कुछ समय अन्य गतिविधियों का आनंद लेने की कोशिश करें।

दूसरों के साथ कनेक्ट करें। उन लोगों के साथ बात करें जिन्हें आप अपना समझते हैं एक दूसरे को भरोसा दिलायें।

एक बुजुर्ग दम्पति ने बातचीत में बताया कि वह लोग इस लॉक डाउन के वक्त प्रतिदिन कुछ समय के लिए वीडियो काल कर बाहर रह रहे अपने नाती-पोतों के संपर्क में रहते हैं । इससे जहाँ उनका समय भी अच्छे से व्यतीत हो जाता है । इसके अलावा कुछ वक्त योगा करके तो कुछ समय पुस्तकों का अध्ययन करके बिताते हैं , जो कि एक अलग तरह का अनुभव भरा है।

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