शुरू हुआ पितरों के तर्पण का पखवारा, पिशाचमोचन और गंगा घाटों पर लगा रेला

14 दिन का होगा इस बार का पितृपक्ष, त्रयोदशी तिथि की हानि होने से कम हुआ एक दिन
दूरदराज से लोग पहुंचे पिशाचमोचन तीर्थ, दिनभर चलता रहा श्राद्ध और तर्पण

वाराणसी। पितरों के तर्पण का पखवारा यानी पितृपक्ष शनिवार से शुरू हो गया। इस बार त्रयोदशी तिथि का लोप होने से पखवारा 14 दिनों का ही होगा। 28 सितंबर को महालया या सर्वपितृ विसर्जन होगा। शुक्रवार को भाद्रपद पूर्णिमा के चलते शाम से ही पिशाचमोचन तीर्थ और घाटों पर श्रद्धालुओं का रेला उमड़ा रहा।

हिन्‍दू मान्‍यताओं के अनुसार, साल में एक बार सभी पूर्वजों की आत्‍माएं धरती पर आती हैं और अपनी संतानों के साथ रहती हैं। इस दौरान उनका पूजन और अर्पण-तर्पण किया जाता है। तर्पण से प्रसन्‍न होकर वह पखवारे भर बाद लौटते हैं और संतानों का जीवन सुखमय बना रहता है। शनिवार को प्रतिपदा और रविवार को द्वितीया तिथि का श्राद्धकर्म संपन्‍न किया जाएगा।

पिशाचमोचन कुंड पर शनिवार को पितरों का तर्पण करने के लिए दूरदराज से आए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। श्राद्ध और पिंडदान के पश्‍चात पिंड कुंड में प्रवाहित किए गए। पितृदोष निवारण और नारायण बलि के लिए भी पूजा कराई गई। हालांकि दिनभर धूप और उमस के कारण लोगबाग परेशान दिखे मगर पूजन कार्य में इनसे कोई विघ्‍न नहीं पड़ा। गंगा घाटों पर भी पानी बढ़ने के बावजूद लोग पितरों के लिए पूजन और स्‍नान करते नजर आए।

Loading...