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वाराणसी। मणि मन्दिर प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के चौथे दिन बुधवार को विद्वानों ने धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज के कृतित्वों पर प्रकाश डाला गया। कार्यक्रम में मशहूर सितार वादक पंडित देवब्रत मिश्रा ने मंत्रमुग्ध सितार वादन कर श्रद्धालुओं का मनमोह लिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि तिरुपति संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर मुरलीधर शर्मा ने कहा कि वेद और पुराण ऐसे धर्मशास्त्र है, जिसमें जीव मात्र के कल्याण की बातें ही कही गयी है।

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विशिष्ट वक्ता धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज के शिष्य दीन दयालु महाराज ने कहा की धर्मसंघ वेद की मर्यादा को किंचित मात्र भी डिगने नही देने वाला स्थान है, जो धर्म दूसरे धर्म में बाधा उत्पन्न करें वह धर्म नही कुधर्म है।

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काशी विद्वत परिषद के अध्यक्ष पंडित रामयत्न शुक्ल ने कहा कि सभी सनातनियों के लिए यह हर्ष का विषय है कि धर्मसंघ स्वामी करपात्री जी महाराज के विचारों को आगे बढ़ा रहा है और इस भव्य मन्दिर के निर्माण के संकल्प को पूर्ण किया। प्रोफेसर रामचन्द्र पाण्डेय ने कहा कि धर्मसम्राट के विचार सर्वकालिक है जो हमें सदैव संबल प्रदान करते रहेंगे।

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कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे धर्मसंघ पीठाधीश्वर स्वामी शंकरदेव चैतन्य ब्रम्हचारी जी महाराज ने कहा कि हम सौभाग्यशाली है जिन्हें धर्मसम्राट की परम्परा का निर्वहन करने का अवसर प्राप्त हुआ। धर्मसम्राट ने कहा था कि सनातन धर्म राजमार्ग की भांति है, जिसे भी लम्बी दूरी तय करनी है उसे इस मार्ग पर होकर ही गुजरना होगा।

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देवब्रत के सितार ने रिझाया-
प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के चैथे दिन विख्यात सितार वादक पंडित देवब्रत मिश्रा ने सितार वादन कर देश विदेश से आये श्रद्धालुओं को खूब रिझाया। उन्होंने सबसे पहले राग तिलक कामोद में अलाप, जोड़, झाला के बाद तीन ताल में बंदिश प्रस्तुत की। उसके बाद बनारसी होली पर समर्पित गीत ‘रंग डारूंगी नन्द के लालन पे‘ सितार की मदमस्त कर देने वाली धुन बजायी तो प्रांगण में उपस्थित हर दर्शक खुद को झूमने से रोक न सका। उनके साथ तबले पर प्रशान्त मिश्र, तानपुरे पर अमेरिका के वेड एवांस ने संगत किया।

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