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वाराणसी। कोरोना संक्रमण ने देश में ऐसा पैर पसारा है के आज दो महीने हो गए लॉकडाउन लगे पर यह महामारी लगातार बढ़ती ही जा रही है। इन दो महीनों से लोगों के सभी काम बंद चल रहे हैं। शासन व जिला प्रशासन के आदेश के बाद नियमों और शर्तों के अनुसार बुधवार से दुकानों को खोलने की इजाजत तो मिल गई है पर अभी भी जनपद में कई ऐसे कामगार हैं जो काम-धंधा न शुरु हो पाने से भुखमरी के कगार पर आ गए हैं, जिनमें वाराणसी के ठेला-खोमचा व्यवसायी भी शामिल हैं।

सिगरा थाना क्षेत्र के पास कमलापति स्कूल के समीप रहने वाले ठेला-खोमचा व्यवसाइयों का 2 महीने से काम बंद होने के कारण जिविकोपार्जन के सभी साधन बंद हो गए हैं। इन लोगों का कहना है कि प्रशासन से भी उतनी मदद नहीं मिल पायी है, जिससे बच्चों का पेट भरा जा सके और न ही अभी तक ठेला-खोमचा व्यवसाइयों के सचीव अभिषेक निगम हमारी सुध लेने आये हैं।

नकुल सोनकर जो कैंट-स्टेशन पर ठेले पर फल बेचने का काम करते हैं न कहा कि इतने बड़े मुहल्ले में हमारे सचीव द्वारा सिर्फ 8-10 लोगों को काम करने के लिए पास बनवाकर दे दिया गया, बाकी लोग ऐसे ही अपना जीवन काट रहे हैं।

नकुल सोनकर ने कहा कि सचीव अभिषेक निगम द्वारा राशन बाटा जा रहा है, लोगों द्वारा पता चला कि राशन वितरण कार्य में मेरा नाम भी लिखा है, जब कि मेरे यहां खुद खाने के लाले पड़े हैं और यहां अभी तक कोई पूछने तक नहीं आया है।

वहीं ठेला पटरी व्यवसायी संजय सोनकर का कहना है कि सचीव को कॉल करने पर फोन कभी उठता नहीं और न ही कोई मदद किया गया है। दाना भूजने का काम करने वाली मंजू देवी ने कहा कि जब से लॉकडाउन हुआ है तभी से घर में खाने-पीने की दिक्कतें आ गई हैं। सरकार द्वारा कंट्रोल से जो 5 किलो चावल मिलता है उसी से अपने सात बच्चों का पेट भर रही हूं।

मंजू देवी का भी आरोप है कि कोई भी यहां अभी तक हमारा हाल-चाल पूछने नहीं आया। हम बस यही चाहते हैं कि हमे इतनी इजाजत दे दी जाए के हम अपना घर चला सके और अपने परिवार का पेट भर सकें।

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