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तीसरे दिन दर्शन-पूजन का यहां है विधान, मिलता है विशेष फल
सिंह पर सवार अस्‍त्र-शस्‍त्रों से सुसज्जित मां का रूप है मनभावन

वाराणसी। नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा के दर्शन-पूजन का विधान है। शारदीय नवरात्रि में देवी चित्रघंटा या चंद्रघंटा का दर्शन अत्‍यंत ही पुण्‍य फलदायी माना गया है। प्रेतबाधा से मुक्‍ति दिलाने वाली मां चंद्रघंटा सिंह पर सवारी करती हैं। इनकी कृपा अपने भक्‍त को सिंह सा पराक्रम भी देती है। इनके दर्शन के लिये आपको बनारस के पक्के महाल की संकरी गलियों में लक्‍खी चौतरा आना होगा।

युद्ध के लिए उद्यत मुद्रा
मस्‍तक पर चंद्र धारण करने वाले मां के इस स्‍वरूप को चंद्रघंटा भी कहा जाता है। यह सिंह पर सवार होकर युद्ध के लिए उद्यत जान पड़ती हैं। मान्‍यता है कि मां चंद्रघंटा के दर्शन से नरक से मुक्ति मिल जाती है। साथ ही सुख, समृद्धि, विद्या और यश की प्राप्ति होती है। मां का यह रूप अत्‍यंत कल्‍याणकारी होता है। यहां विग्रह स्‍वर्ण सा चमकीला नजर आता है जिसकी एक झलक के लिए दर्शनार्थी घंटों कतार में खड़े रहते हैं।

कांति और गुण में होती है वृद्धि
माँ का स्वरूप अत्यंत सौम्यता एवं शांति से परिपूर्ण रहता है। इनकी आराधना से वीरता-निर्भयता के साथ ही सौम्यता एवं विनम्रता का विकास होकर मुख, नेत्र तथा संपूर्ण काया में कांति-गुण की वृद्धि होती है। स्वर में दिव्य, अलौकिक माधुर्य का समावेश हो जाता है। माँ चंद्रघंटा के भक्त और उपासक जहाँ भी जाते हैं लोग उन्हें देखकर शांति और सुख का अनुभव करते हैं। यह भी माना जाता है कि माँ के आराधक के शरीर से दिव्य प्रकाशयुक्त परमाणुओं का अदृश्य विकिरण होता रहता है। यह दिव्य क्रिया साधारण चक्षुओं से दिखाई नहीं देती, किन्तु साधक और उसके संपर्क में आने वाले लोग इस बात का अनुभव भली-भाँति करते रहते हैं।

तीन तरफ से लगती है कतार
कल्याण और सौभाग्य की प्रदाता देवी चंद्रघंटा का मंदिर लक्खी चौतरा के पास गली में है। बेहद संकरी गली में तीन तरफ से लाइन लगती है तो दृश्य देखते बनता है। लक्खी चौतरा की तरफ से बमुश्किल एक कतार लग सकती है। दर्शन करके उसी रास्ते से वापसी करना बेहद कठिन होता है। इसके अलावा चौक में यूको बैंक के पास से एक लाइन लगती है तो तीसरी ओर रानी कुआं की गली से भी लाइन लगानी पड़ती है।

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