This cyber punk mask will protect Korena virus and bird flu, four girls of Kashi have prepared
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वाराणसी। शहर में बर्ड फ़्लू की दस्तक के बाद हर कोई सहमा हुआ है। उधर कोरोना वायरस से भी देश में लोग सहमे हुए हैं। ये सारे वायरस हवा में घुल के इंसान के शरीर में पहुँचते हैं। ऐसे में डॉक्टर्स मास्क लगाकर रहने की बता कहते हैं। ऐसे ही माहौल और बढ़ते एयर प्रदूषण को देखते हुए काशी की चार होनहार लड़कियों ने एक ऐसा मास्क बनाया है जो ऐसे वायरस को हमारे शरीर तक पहुँचने ही नहीं देगा और हमें बढ़ते हुए वायु प्रदूषण से भी मुक्त रखेगा।

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बीटेक की स्टूडेंट है छात्राएं
सुंदरपुर की रहने वाली शैली जायसवाल और उत्सवी सिंह, डीएलडब्लू की श्रुति सिंह और मुग़लसराय की अनामिका यादव शहर के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कालेज अशोका इंस्टीट्यूट से इलेक्ट्रानिक एन्ड कम्यूनिकेशन में बीटेक कर रही हैं और इस वर्ष थर्ड इयर में हैं। इन चारों ही होनहार बनारस की बेटियों ने शहरवासी और देशवासियों को कोरेना, बर्ड फ़्लू और एयर पल्यूशन से सुरक्षित रखने का बीड़ा उठाया है। छात्राओं ने अपना ये आविष्कार बीटेक इलेक्ट्रानिक एन्ड कम्यूनिकेशन के एचओडी सदीप कुमार मिश्रा के दिशा निर्देशन में बनाया है।

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एयर पल्यूशन से मिलेगी मुक्ति
इन चारों ही छात्राओं ने सायबर पंक के नाम से एक स्मार्ट मास्क बनाया है, जिसमें लगे सेंसर बाहर की हवा हानिकारक होते साथ ही उसमे लगे स्पेशल एग्जॉस्ट फैन को ऑन कर देंगे जिससे व्यक्ति किसी भी प्रकार के एयर पल्यूशन से सुरक्षित रहेगा। इस सम्बन्ध में इस मास्क को बनाने वाली छत्राओं में से एक अनामिका सिंह ने बताया कि हमने 15 दिन की मेहनत से इस एयर पल्यूशन कंट्रोल करने वाले सायबर पंक मास्क का आविष्कार किया है। यह मास्क पॉल्यूशन को सिर्फ कंट्रोल ही नहीं करेगा बल्कि बताएगा भी कि शहर में किस जगह पल्यूशन ज़्यादा है।

एग्जॉस्ट फैन करेगा हवा स्वच्छ
अनामिका ने बताया कि इसमें तीन रंग की लाइटी लगायी गयी है जो सेंसर के द्वारा काम करेगी। 200 से 250 AQI रहेगा तो ग्रीन लाइट, 250 से 350 रहेगा तो येलो लाइट और उससे ज़्यादा होने पर रेड लाइट ऑन हो जाएगी। इसके साथ ही सेंसर के साथ लगे दो एग्जॉस्ट फैन एक साथ ऑन हो जायेंगे, जिससे मास्क पहने हुए व्यक्ति को साफ़ और स्वच्छ हवा मिलना शुरू हो जायेगी।

जल्द ही मार्केट में होगा सुलभ
छात्रा श्रुति ने बताया कि इसमें लगे उपकरण को अभी हमने सामानों को खरीदकर बनाया है, इसलिए इसकी लागत ज़्यादा है। हम इसमें इम्प्लीमेंट कर रहे हैं और जल्द ही यह आम व्यक्ति को 300 से 400 रूपये में उपलब्ध होगा।

रिसर्च एन्ड डेवलेपमेंट हेड ने सराहा
छात्राओं के इस आविष्कार के बारे में बात करते हुए इंस्टीट्यूट के रिसर्च एन्ड डेवलेपमेंट हेड श्याम चौरसिया ने बताया कि इन चारों लड़कियों का यह पहला प्रयास है। इसमें कुछ चीज़ें कम करके और कुछ चीज़ें बढाकर इसे और इम्प्रूव करने पर काम शुरू कर दिया गया है। छात्राओं का यह आविष्कार दिल्ली में दिवाली की रात और उसके अगले कुछ दिनों तक होने वाले वायू प्रदूषण में मील का पत्थर साबित होगा।

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