ति‍रुपति‍ में जि‍नके दर्शन को उमड़ते हैं लाखों लोग, काशी में वीरान है भगवान वेंकटेश्‍वर का मंदि‍र

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वाराणसी। धर्म और आध्‍यात्‍म की राजधानी काशी वि‍भि‍न्‍न प्रकार के देवालयों से भरी पड़ी हैं। बाबा श्री काशी वि‍श्‍वनाथ की नगरी में वि‍श्‍वेश्‍वर ज्‍योर्लिंग मंदि‍र स्‍थापि‍त है, जि‍सके दर्शन के लि‍ये दुनि‍याभर से सनानतधर्मी वाराणसी आते हैं। हालांकि‍ हर यानी महादेव की नगरी काशी में हरि‍ (वि‍ष्‍णु) के मंदि‍र भी कम नहीं है। मगर आपको जान कर हैरानी होगी कि‍ भगवान वि‍ष्‍णु के रूप कहे जाने वाले भगवान वेंकटेश्‍वर का भी एक मंदि‍र काशी नगरी में मौजूद है।

जी हां, आपने ठीक पढ़ा। भगवान वेंकटेश्‍वर जि‍नके दर्शन के लि‍ये आंध्र प्रदेश के पवि‍त्र शहर ति‍रुपति‍ में हर रोज लाखों दर्शनार्थी अपनी अपनी मनोकामनाओं के साथ पहुंचते हैं। भारत का सबसे अमीर और भव्‍य मंदि‍र कहे जाने वाले ति‍रुपति‍ मंदि‍र में वि‍राजमान भगवान वेंकटेश्‍वर का एक मंदि‍र काशी में भी है।

काशी के कोनिया इलाके में 150 वर्ष पूर्व स्थापित तोताद्री मठ मे स्थापित भगवान् ति‍रुपति‍ बालाजी का मंदि‍र, जहां वि‍राजमान हैं भगवान वेंकेटेश। सबसे अहम बात ये है कि‍ जहां एक ओर आंध्र प्रदेश के ति‍रुपति‍ शहर में ति‍रुमला पर्वत पर भगवान वेंकटेश्‍वर का भव्‍य मंदि‍र है और वहां प्रति‍दि‍न लाखों की संख्‍या में श्रद्धालु अपनी आस्‍था और वि‍श्‍वास के साथ आते हैं, वहीं दूसरी तरफ वाराणसी में मौजूद ति‍रुपति‍ बालाजी का मंदि‍र तकरीबन खंडहर हो चुका है और ज्‍यादातर वक्‍त ये सूनसान ही रहता है।

150 साल से वरुणा और गंगा के संगम पर वि‍राजमान हैं भगवान् वेंकटेश्‍वर
कहते हैं काशी के कण कण में शंकर बसे हैं पर गंगा और वरुणा के संगम से कुछ दूर पहले कोनिया पलंग शहीद के पास स्थित है भगवान् वेंकटेश्‍वर का विशाल किंतु खंडहरनुमा मंदिर। इस मंदिर को 150 साल पहले रामानुज स्वामी ने स्थापित किया था। वैष्णव सम्प्रदाय के इस मंदिर के बाहर झाड़ झंखड़ा है पर अंदर आते ही किसी औलौकिक शक्ति का एहसास होता है। शान्ति मानों यहाँ जैसे घर कर गयी है और यहाँ कभी किसी ने तेज़ आवाज़ में बात भी नहीं की है।

वैष्णव सम्प्रदाय का है मंदिर
मंदिर के बारे में बात करते हुए दिलीप कुमार पांडेय ने बताया कि यह वैष्णव सम्प्रदाय का मंदिर है जिसका निर्माण रामानुज स्वामी ने आज से 150 साल पहले किया था। इस मंदिर में तिरुपति बालाजी को वेंकटश्वर स्वामी के रूप में पूजा जाता है। तोताद्री मठ के बारे में बात करते हुए दिलीप ने बताया कि यह रामनुज सम्प्रदाय की गद्दी का नाम है जो तमिलनाडू में नागुणेरी नामक स्थान पर है। उस जगह के नाम पर पूरे देश में रामनुज सम्प्रदाय के तोताद्री मठ विराजमान हैं।

दशश्वमेध घाट पर है महाविद्यालय
दिलीप ने बताया कि इस मठ में वर्षों से छात्रों का आवागमन और शिक्षा दीक्षा का कार्य होता आया है। इसका एक महाविद्यालय जिसमे छात्र आचार्य तक की पढ़ाई कर सकता है दशाश्वमेध घाट पर रामनुज दर्शन महाविद्यालय के नाम से स्थापित है। छात्र वहां रहते और पढ़ते हैं। यहां भी उनका आना जाना लगा रहता है।

सावन के महीने में अनुपम होती है छटा
दिलीप ने बताया कि सावन के महीने में यहां भगवान् वेंकेटेश्वर से आशीर्वाद लेने के लिए भक्त आते हैं। इस वर्ष कोरोना काल की वजह से सावन में लगने वाला झूला भी स्थगित कर दिया गया है। इस मंदिर में भगवान् बालाजी के साथ श्री कृष्ण, श्रीदेवी और भू देवी स्थापित हैं। भगवान् बालाजी की प्रति‍मा अचल जबकि‍ श्रीकृष्ण, श्रीदेवी और भू देवी की प्रतिमा चल हैं, जो सावन में प्रांगण में ही झूला झूलती हैं और भक्त आशीर्वाद लेने आते हैं।

मंदिर के पुजारी की उम्र है महज़ 15 साल
तिरुपति बालाजी के इस मंदिर में पुजारी भी अपने आप में अद्भुत हैं। पूर्व मध्यमा में पढ़ने वाले भागलपुर, बिहार के रहने वाले अभय कुमार दुबे इस मंदिर में एक साल से पुजारी हैं। इसी सम्प्रदाय के महाविद्यालय जो कि दशाश्वमेध में स्थित के छात्र हैं। 3 साल से बनारस में रह रहे अभय इस कार्य से बहुत खुश हैं।

मन को मिलती है शान्ति
अभय ने बताया कि भगवान् बालाजी की आरती और उन्हें भोग चढाने पर मन को असीम शान्ति मिलती है। भगवान् बालाजी के इस मंदिर का पुजारी बनने के लिए जब मेरे गुरु ने मुझसे पूछा था तो मुझे बहुत ही अच्छा लगा। यहाँ आने के बाद ऐसा लगा कि जैसे यहाँ पहले भी आया हूं।

शुक्रवार को है दर्शन का दिन
पुजारी अभय ने बताया कि भगवान् बालाजी के वेंकटेश्वर स्वरूप का दर्शन शुक्रवार को करना लाभकारी है। यहां शुक्रवार को भक्त आते हैं और भगवान् का दर्शन प्राप्त कर निहाल होते हैं।

रामनुज स्वामी, राम दरबार और बजरंगबली के भी हैं मंदिर
इसी प्रांगण में तिरुपति बालाजी के एक तरफ रामनुज स्वामी और एक तरफ राम दरबार में भगवान् राम, लक्ष्मण और माता सीता स्थापित हैं तो वहीं बजरंगबली का भी मंदिर इस प्रांगण में है।

शहर की सीमा पर बने राजघाट पुल से कुछ दूर पहले स्थापित तोताद्री मठ में यह मंदिर अपने आप में अद्भुत है। अगर आपने आज तक इस मंदि‍र में दर्शन नहीं कि‍या है तो एक बार यहां जरूर जाएं। वहीं वाराणसी जि‍ला प्रशासन और पर्यटन वि‍भाग को भी खंडहर में तब्‍दील हो रहे इस मंदि‍र की सुध लेते हुए इसे धार्मि‍क पर्यटन के रूप में वि‍कसि‍त करना चाहि‍ए। काशी में भगवान वेंकटेश्‍वर का प्राचीन मंदि‍र नि‍:संदेह यहां आने वाले लाखों दक्षि‍ण भारतीय पर्यटकों के आकर्षण का भी केंद्र हो सकता है।

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