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वाराणसी। हिन्दू धर्म शास्त्र के अनुसार माघ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मौनी अमावस्या या माघी अमावस्या कहा जाता है। इस दिन मौन व्रत रखने से साधारण मनुष्य को भी मुनि पद की प्राप्ति होती है। इस साल मौनी अमावस्या का पर्व 24 जनवरी को मनाया जाएगा। इस दिन लाखों आस्थावान काशी के घाटों पर गंगा स्नान कर पुण्य अर्जित करने के लिए उमड़ते हैं।

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  • कब है शुभ मुहूर्त
    ज्योतिषों और ऋिषि पंचांग के अनुसार अमावस्या की तिथि पूरे 24 घंटे 25 मिनट रहेगी। ऋिषि पंचांग के अनुसार अमावस्या की शुभ मुहूर्त की तिथि 23 जनवरी की रात 1 बजकर 41 मिनट पर लग जाएगी जो दुसरे दिन 24 जनवरी की रात 2 बजकर 4 मिनट तक रहेगी।
  • क्या है पूजा का विधि-विधान
    इस दिन पितरों के निमित तर्पण का विशेष महत्व होता है। भगवान विष्णु के प्रतिक पीपल के पेड़ की पूजा का भी विधान है। इस दिन पूरे नियमानुसार विष्णु चालिसा का पाठ कर भगवान विष्णु को पीले मीठे पकवान का भोग चढ़ाया जाता है। गंगा स्नान कर गरीब को दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में कालसर्प दोष है तो इस दिन कुछ खास उपाय व पूजन करने से इसके प्रभाव को कम किया जा सकता है।
  • क्या है मान्यता
    पौराणिक मान्यता के अनुसार मौनी अमावस्या पर मौन रहकर स्नान और दान करने का विशेष महत्व है। मौनी अमावस्या के बारे में ये भी कहा जाता है कि इस दिन ऋषि मनु का जन्म हुआ था और मनु शब्द से ही मौनी की उत्पत्ति हुई है। इसलिए इसे मौनी अमावस्या कहा जाता है। इस दिन मौन रहकर स्नान करने से मुनि पद कि प्राप्ति होती है।

ऐसे तो शास्त्रों में पूरे दिन मौन रखने की बात कही गई है लेकिन वेदों में लिखा है, अगर दान और नहान से पहले सवा घंटे तक मौन रखा जाए तो दान का 16 गुणा फल प्राप्त होता है।

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