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वाराणसी। महाराष्ट्र में भीड़ द्वारा दो साधुओं का पीट-पीटकर मार देने की घटना पूरे देश में आग की तरह फैल गई है। हर राज्य में साधु-संतों ने इस घटना की निंदा करते हुए मृत साधुओं के लिए न्याय मांगा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी खुद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को फोन कर इस घटना की जांच करने का और दोषियों को सजा दिलाने के लिए वार्ता की है।

इस घटना के बाद से धर्म की नगरी काशी में भी साधु-संतों में आक्रोश का माहौल है। साधु-संतों के साथ हुई मॉब लिंचिंग की इस घटना के बाद सभी मठों व अखाड़ों के संतों ने ऑनलाइन बैठक कर इस घटना की निंदा की है और लॉकडाउन खत्म होने के बाद हादसे में मृत साधुओं के इंसाफ के लिए आंदोलन करने का निर्णय लिया है।

पातालपुरी के संत बाबा बालक दास ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि माहाराष्ट्र में साधुओं के साथ हुई इस घटना ने पूरे देश को झंझोर कर रख दिया है। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि पुलिस प्रशासन के सामने निर्मम तरीके से दोनों साधुओँ को लाठी-डंडे से भीड़ द्वारा मार दिया गया, इस घटना से महाराष्ट्र की सरकार क्या दर्शाना चाहती है।

उन्होंने कहा कि इस घटने से पूरे संत समाज में आक्रोश है, अगर महाराष्ट्र सरकार द्वारा जल्द से जल्द इस घटना के आरोपियों को सजा नहीं दिया गया तो पूरा संत समाज अखाड़ा पिरषद के नेतृत्व में महाराष्ट्र में आंदोलन करेंगा।

बाबा बालकदास ने कहा कि अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद महाराज के आदेश पर हम सभी संत आखाड़ा परिषद के साथ मिलकर इस घटना का विरोध करते हुए साधु संतों की रक्षा के लिए आंदोलन करेंगे। यह बात केवल दो संतों की नहीं यह पूरे सनातन धर्म संस्कृति की बात है, संतो को लाठी-डंडे से पीटकर मारना हमारे संस्कृति को आघात पहुंचाने जैसा है।

उन्होंने बताया कि आज हम सभी ने खाकी अखाड़ा के संतों से अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेंद्रनंद महाराज एवं अयोध्य के सभी प्रमुख संतों से ऑनलाइन इस घटना की चर्चा की है। सभी संतों ने इसे निंदनीय बताते हुए लॉकडाउन के बाद आंदोलन करने पर सहमति जताई है।

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