रेलवे ट्रैक पर कटकर ख़त्म करना चाहता था ज़िंदगी, आज ‘ कबीर’ के प्रयासों से रवाना हुआ घर

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वाराणसी। लॉकडाउन 1 से लेकर आज तक की लोगों को उनके घर भेजने का प्रबंध करने वाले। बुज़ुर्गों, असहायों की मदद करने वाले, पुलिस की एक सूचना पर किसी के लिए भी मौके पर पहुँचने वाले काशी के अमन यादव ने बुधवार को एक बार फिर एक बुज़ुर्ग को उनके घर के लिए समाजसेवी चंद्रशेखर यादव के सहयोग से हाइवे पर गुजरने वाली बस से बिहार के गया जनपद भेजा।

यह व्यक्ति जब अमन को मिला था तो वह सुसाइड करने जा रहा था और पिछले कई दिनों से उसने कुछ खाया भी नहीं था।

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कहते हैं जहां चाह वहां राह। इस वाक्य को बनारस में साल 2014 से चरितार्थ करने वाले अमन यादव अब किसी पहचान के मोहताज नहीं है क्योंकि उन्हें शहर के सभी गरीब असहाय जानते हैं क्योंकि अमन उनकी एक आह पर मरहम बनकर तैयार रहते हैं। अमन यादव ने ऐसा ही कुछ किया जिसे जानकार हर कोई उनकी तारीफ़ कर रहा है।

अमन ने बताया कि संतोष प्रसाद वर्मा बिहार जनपद के गया के रहने वाले हैं। हमें किसी ने सूचना दी कि एक व्यक्ति है जो सुसाइड करने के लिए रेलवे स्टेशन की तरफ जा रहे हैं। इस सूचना पर बताई हुई जगह पर पहुंचा तो वहां एक 55 वर्षीय व्यक्ति रो रहे थे। मै उन्हें घर ले आया। उन्होंने अपना नाम संतोष प्रसाद वर्मा बताया।

हमने अमन की मदद से संतोष से बात की तो वो फफक के रो पड़े और बताया कि होली के पहले हम घर से यहाँ आये थे एक व्यक्ति के साथ जिसने काम के लिए कहा था। संतोष ने बताया कि बच्चे मना कर रहे थे की होली करके जाइये पर हम चले आये। उसके बाद वह व्यक्ति हमें छोड़ के गायब हो गया फिर लॉकडाउन लग गया तब से हम बिना खाए पिए रह रहे हैं।

समाजसेवी चंद्रशेखर यादव के साथ अमन कबीर और संतोष वर्मा

संतोष ने बताया कि कभी कोई दे देता, कभी मन करता तो खाते कभी नहीं खाते। अमन ने बताया कि इसके लिए एक बार फिर हमने सोशल मिडीया का सहारा लिया और फेसबुक पर लिए लोगों क्योंकि रोडवेज की कोई बस या कोई नहीं जा रही है और जो जा रही है उसमे टिकट नहीं है। ऐसे में मुग़लसराय के रहने वाले समाजसेवी चंद्रशेखर यादव ने मदद की और आज इन्हे हम लोगों ने नेशनल हाइवे से सासाराम बिहार के लिए जा रही बस से सासाराम भेजा जहाँ मेरे मित्र इन्हे रिसीव करेंगे और आगे गया जाने का इंतज़ाम करेंगे।