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काशी विश्वनाथ मंदिर में अब सुबह 11 बजे तक कर सकेंगे स्पर्श दर्शन
काशी विद्वत परिषद की बैठक में हुए कई अहम निर्णय
पुरुष धोती कुर्ता और महिलाएं साड़ी में कर सकेंगे स्पर्श दर्शन !

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वाराणसी। श्रीकाशी विश्वनाथ के दर्शन को पूरी दुनिया से करोड़ों श्रद्धालु साल भर में आते हैं। उनकी सुख सुविधा का ख्याल काशी विद्वत परिषद् समय-समय पर की पारित प्रस्तावों के माध्यम से करता है। इसी क्रम में रविवार को पर्यटन एवं धर्मार्थ कार्य मंत्री डॉ नीलकंठ तिवारी की अध्यक्षता में हुई बैठक में अहम् सुझाव दिया गया। इस बैठक में भक्तों को बाबा के स्पर्श दर्शन का समय सुबह 11 बजे तक कर दिया गया है, लेकिन यह स्पर्श दर्शन सिर्फ पारम्परिक भारतीय परिधान में ही सम्भव हो ऐसा सुझाव विद्वत परिषद् की और से दिया गया है।

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उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं धर्मार्थ कार्य राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉक्टर नीलकंठ तिवारी की अध्यक्षता में रविवार को कमिश्नरी सभागार में श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के पूजन दर्शन की व्यवस्था सहित कई अन्य विषयों को लेकर मंदिर प्रशासन और काशी विद्वत परिषद के सदस्यों के साथ बैठक सम्पन्न हुई। मंत्री डॉ नीलकंठ तिवारी ने सभी विद्वत जनों के सामने दो अहम प्रश्न रखे। उन्होंने कहा कि मंदिर में स्पर्श दर्शन का समय कैसे और बढाया जाए, ताकि अधिक से अधिक श्रद्धालु बाबा को स्पर्श दर्शन कर सकें। साथ ही विश्वनाथ धाम में खरीदे गए भवनों से निकले विग्रह को कैसे संयोजित किया जा सके।

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इस मुद्दे पर बैठक में आए सभी विद्वत जनों ने एक मत से कहा कि बाबा का स्पर्श दर्शन मध्यान्ह आरती से पहले 11 बजे तक किया जा सकता है। इससे अधिक से अधिक श्रद्धालु बाबा का स्पर्श दर्शन कर सकेंगे, लेकिन किसी भी विग्रह को स्पर्श करने के लिए एक प्रकार का वस्त्र तय होना आवश्यक है। ऐसे में पुरुष को धोती कुर्ता व महिलाओं को साड़ी पहनने का एक नियम बनना चाहिए। इसके अलावा पैंट शर्ट, जींस, सूट, टाई कोर्ट वाले पहनावा पर केवल दर्शन की व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।

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सभी विद्वानों ने उज्जैन स्थित महाकाल ज्योतिर्लिंग, दक्षिण भारत स्थित सभी मंदिरों का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए बताया कि महाकाल में भी भस्म आरती के समय स्पर्श करने वाले बिना सिले हुए ही वस्त्र धारण करते हैं। बाकी सभी लोग केवल दर्शन पूजन करते हैं इसलिए श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में भी यह व्यवस्था लागू होनी चाहिए।

इसके साथ ही विद्वत परिषद ने मंदिर में पूजा पाठ करने वाले सभी अर्चकों का भी एक ड्रेस कोड निर्धारित करने के लिए मंदिर प्रशासन को सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि अर्चक का ड्रेस कोड ऐसा हो कि कहीं भी भीड़ में उसने आसानी से पहचाना जा सके। इस पर मंत्री डॉ0 नीलकंठ तिवारी ने भी कहा कि इस इस व्यवस्था को जल्द ही मंदिर में लागू कराया जाए 11 बजे तक स्पर्श दर्शन को आने वाले श्रद्धालुओं को ड्रेस कोड के अनुसार ही स्पर्श कराया जाए।

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