दुनिया का सबसे पुराना भरत मिलाप, आज होगा 476 वां मंचन

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वाराणसी। धर्म की नगरी काशी में सात वार और तेरह त्यौहार की मान्यता प्रचलित है। कहा जाता है की यहाँ पर साल के दिनों से ज्यादा पर्व मनाये जाते हैं। नवरात्र और दशहरा के बाद रावण दहन के ठीक दूसरे दिन यहां विश्व प्रसिद्ध भरत मिलाप का उत्सव भी काफी धूम धाम से मनाया जाता है।

शहर में इस पर्व का आयोजन कई अलग अलग स्थानों पर होता है लेकिन चित्रकूट रामलीला समिति द्वारा आयोजित ऐतिहासिक भरत मिलाप को देखने के लिए नाटी इमली स्थित भरत मिलाप मैदान में लाखो के भीड़ उपस्थित रहती है। इस मेले का शुमार भी काशी के लक्खी मेलों में है।

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लगभग पांच सौ वर्ष पहले संत तुलसीदास जी के शरीर त्यागने के बाद उनके समकालीन संत मेधा भगत काफी विचलित हो उठे। मान्यता है की उन्हें स्वप्न में तुलसीदास जी के दर्शन हुए और उसके बाद उन्ही के प्रेरणा से उन्होंने इस रामलीला की शुरुआत की, असत्य पर सत्य की जीत का पर्व होता है दशहरा। इस पर्व के दूसरे दिन एकादशी के दिन काशी के नाटी इमली के मैदान में होता है भरत मिलाप।

लंका में रावण पर विजय प्राप्त करने के बाद मर्यादा पुरषोत्तम राम जब वापस लौटते है राम लक्ष्मण और भरत शत्रुघ्न के मिलाप को भरत मिलाप कहा जाता है। मान्यता ऐसी है की 476 वर्ष पुरानी काशी की इस लीला में भगवान राम स्वय धरती पर अवतरित होते है। कहा ये भी जाता है की तुलसी दास जी ने जब रामचरित मानस को काशी के घाटों पर लिखा उसके बाद तुलसी दास जी ने भी कलाकारों को इकठ्ठा कर लीला यहा शुरू किया था। मगर उसको परम्परा के रूप में मेघा भगत जी ने ढ़ाला। मान्यता ये भी है की मेघा भगत को इसी चबूतरे पर भगवान राम ने दर्शन दिया था तभी से काशी में भरत मिलाप शुरू हुआ।

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इस मेले को लक्खी मेल भी कहा जाता है। काशी की इस परम्परा में लाखों का हुजूम उमड़ता है भगवान राम, लक्ष्मण माता सीता के दर्शन के लिए शहर ही नहीं अपितु पूरे संसार के लोग उमड़ पड़ते है। गौरतलब है कि बिना काशी नरेश के लीला स्थल पर आये लीला शुरू नहीं होती सबसे पहले महाराज बनारस लीला स्थल पर पहुँचते है। इस परंपरा का निर्वाह काशी नरेश सदियों से करते चले आ रहे है।

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शाम को लगभग चार बजकर चालीस मिनट पर जैसे ही अस्ताचल गामी सूर्या की किरणे भरत मिलाप मैदान के एक निश्चित स्थान पर पड़ती हैं तब लगभग पांच मिनट के लिए माहौल थम सा जाता है और भरत और शत्रुघ्न दौड़ कर राम लक्ष्मण के चरणों में नतमस्तक हो जाते हैं।

शहर का यह प्रसिद्द लक्खी मेला नाटी ईमली के मैदान में मनाया जाएगा जिसको लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल है।

देखे विश्वप्रसिद्ध भरत मिलाप की झलक

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